
अब बहुजन कर रहे हैं यूजीसी के रोक का विरोध
यूजीसी कानून अब विरोध बनकर रह गया है,हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए कानून पर अंतरिम रोक लगा दी है,आपको बता दे कि यूजीसी का जो नया कानून 13 जनवरी 2026 को लाया गया था उसका जमकर विरोध जनरल कैटेगरी वालों द्वारा किया जा रहा था,उनका कहना था कि यह कानून भेदभाव से पूर्ण है अतः इसे लागू न किया जाए,मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी लेकिन अब मसला और बढ़ता चला जा रहा है जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाया वैसे ही अब बहुजन समाज के लोग इसका जमकर विरोध कर रहे हैं,उनका कहना है कि यह यूजीसी कानून लागू होना चाहिए एक तरफ एससी,एसटी,ओबीसी तो दूसरी तरफ जनरल कैटेगरी वाले लोग
बहुजन समाज के लोग कर रहे हैं जमकर विरोध:
बहुजन समाज के लोग यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक लगाया उसका जमकर विरोध कर रहे हैं और जय भीम जय भारत का नारा लगाकर आंदोलन कर रहे हैं,केंद्र सरकार यूजीसी द्वारा लाया गया यह कानून जिसके लिए केंद्र सरकार खुद को महान साबित करना चाहती थी अब विरोध के स्वर केंद्र सरकार के प्रति उठने लगे हैं,यह यूजीसी कानून अब केंद्र सरकार के लिए जी का जंजाल बनता दिख रहा है,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे हैं खासकर सुप्रीम कोर्ट ने जब इस कानून पर अंतरिम रोक लगा दी है तब से
क्या होगा बाटोगे तो काटोगे के नारा का:
अब तक तो केंद्र सरकार का नारा था एक है तो सेफ है, बाटोगे तो काटोगे लेकिन जैसे ही UGC का कानून आया सब लोग अलग-अलग दिखाई पड़ने लगे,सब एक दूसरे का विरोध करने लगे,कोई यूजीसी के पक्ष में था तो कोई यूजीसी के विपक्ष में था ऐसे में केंद्र सरकार पूरी तरीके से फंस चुकी है,कुछ लोगों का कहना है कि सरकार ने ये कानून अपना वोट बैंक इकट्ठा करने के लिए लाया है,यहां तक की अपर कास्ट के लोगों ने अपने घरों से बीजेपी के झंडे उखाड़े और फेंक दिए,हर चौराहे पर विरोध प्रदर्शन हो रहा था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,मंत्री अमित शाह का पुतला भी फुका गया उनके पुतले को चप्पल से मारा गया
आखिर बीजेपी को झुकना पड़ा:
बीजेपी को यह लग रहा था कि वह जो कानून लेके आये हैं उसका कोई विरोध नहीं होगा,लेकिन इधर सब उल्टा पड़ गया इस कानून का जमकर विरोध हुआ बीजेपी के खिलाफ नारे लगाए गए,और जब मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर अंतरिम रोक लगा दी अब अगली सुनवाई 19 मार्च को होनी है,आपको बता दे की याचिका के खिलाफ केंद्र सरकार ने कोई अपील नहीं की,आपको बता दे जब मामला सुप्रीम कोर्ट में जाता है और सुनवाई होती है तो याचिकाकर्ता के तरफ से यह अपील की जाती है कि यह जो नया कानून है यह सबके हित में नहीं है,इससे किसी विशेष वर्ग कोे नुकसान होने वाला है लेकिन यहां सब दाव उल्टा पड़ गया,सरकार की तरफ से कोई अपील नहीं की,बहुजन समाज के लोग इस बिल के प्रति सड़कों पर उतर चुके हैं
आरक्षण के खिलाफ है केंद्र सरकार:
आरक्षण इस देश के शोषित वर्गों को मजबूती से खड़ा होने का हथियार है,यह आरक्षण शोषितों का संवैधानिक हक है,लेकिन पिछले कुछ समय से आरक्षण को लेकर जो खयालात सामने आ रहे हैं वह बेहद ही निंदनीय है, कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को आरक्षण के प्रति मजबूत रहना चाहिए तो सरकार कुछ वर्गों को खुश करने के लिए आरक्षण को गलत बताने की कोशिश कर रही है,अब यह आंदोलन जन आंदोलन बन चुका है,चारों तरफ से हर जाति के लोग सरकार को घेरने में लगे हुए हैं,उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार,महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान हर जगह लोग आंदोलन कर रहे हैं सरकार के खिलाफ,सबका यही नारा है कि आरक्षण से कोई समझौता नहीं
आरएसएस का एजेंडा क्या है:
लोगों का कहना है कि मोदी सरकार आरएसएस के उस एजेंडे को लागू करना चाहती है जिसमें आरक्षण को खत्म करना है क्योंकि आरएसएस हिंदुत्व का चेहरा लेकर आगे बढ़ती है,आरएसएस का कहना है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए,आपको बता दे कि जो लोग सड़कों पर उतरे थे उनके हाथों में सिर्फ झंडे ही नहीं बल्कि उनकी आंखों में वह आक्रोश भी दिख रहा है जो सरकार को हिलाने के लिए काफी है,यह लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि जब 10% आरक्षण की बारी आई तो रात भर में इन्होंने क़ानून बना दिया लेकिन जब पिछड़ोे और दलितों की बारी आई तो सरकार अंधी क्यों हो गई,अब देखते हैं कि यह मुद्दा केंद्र सरकार के सिंहासन को कितना हिलाता है
