
उ.प्र सरकार को झटका मदरसे से को खोलने का आदेश
उत्तर प्रदेश की सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झटका दे दिया है मद्रास को खोलने के आदेश दिए जा चुके हैं,आपको बता दे की इलाहाबाद की हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ ने बगैर मान्यताप्राप्त मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा खोलने का आदेश जारी कर दिया है वह भी 24 घंटे के अंदर, मद्रास को अवैध घोषित कर सील किए जाने वाली कार्रवाई पर अब हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है,हाई कोर्ट ने यह सख्त निर्देश दिया कि हर हाल में 24 घंटे के अंदर मदरसे को खोला जाए,हाई कोर्ट ने साफ कह दिया है कि पूरे प्रदेश में बिना किसी रोक-टोक के मदरसे को चलाया जा सकता है,हाई कोर्ट के इस आदेश से मुस्लिम लोगों के बीच खुशी के लहर दौड़ी है उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश की सरकार जिस मदरसे को अवैध बता रही है हाई कोर्ट ने उस फैसले पर ताला लगा दिया है और हमारे पक्ष में फैसला आ गया है
क्या उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी:
हाई कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के तरफ अपना रुख करने की तैयारी में है, आपको बता दे की पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के मद्रास को लेकर एक अभियान चलाया था, आपको बता दे की नेपाल से सटे हुए जो भी जिले हैं जैसे बहराइच श्रावस्ती इन जिलों में जो जो मदरसे हैं उन पर योगी सरकार ने अतिक्रमण करके लगभग 80 से अधिक मद्रास पर ताला लगा दिया था यानी कि उसे पूर्ण रूप से सील कर दिया गया, अकेले श्रावस्ती में केवल 10 मदरसे जो अवैध है जिनकी मान्यता नहीं है उन्हें सील कर दिया गया था, आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश सरकार की जांच टीम ने लगभग 13000 मद्रास को बंद करने की सिफारिश की थी, क्योंकि यह मदद से अपनी फंडिंग का खुलासा करने में नाकाम थे, हालांकि आजमगढ़ और संत कबीर नगर के मद्रास से जब यह पता चला कि उनकी फंडिंग विदेश से हो रही है और संदिग्ध गतिविधियों में हो रही है तो उनकी मान्यता रद्द करके इन्हें सील कर दिया गया
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का चाल जादू:
आपको बता दें कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अवैध मत रासो को सील करने का तत्काल निर्देश भी दिया था और इसमें कई मदरसे शामिल थे जिनकी फंडिंग का कोई स्रोत नहीं पता चल रहा था, और आपको बता दे की मदरसे के लोग जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख अपनाया था, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइवेट मद्रास को 24 घंटे के अंदर खोलने का आदेश दे दिया और उधर राज्य सरकार की ओर से इस याचिका का लगातार विरोध हो रहा है राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि एक गैर मान्यता प्राप्त मद्रास को मान्यता मिलने तक किसी भी सरकारी अनुदान का दवा नहीं कर सकता, हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अगर मदरसा गैर मान्यता प्राप्त हो तो उसे बंद किया जाये
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने फैसला सुनाया:
आपको बता दे कि न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया है, उन्होंने कहा कि केवल मानता नहीं प्राप्त होने के कारण मद्रास को रोक नहीं जा सकता इसे 24 घंटे के अंदर तत्काल खोला जाए, और ऐसे ही कर्मियों के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कई मद्रास पर बुलडोजर चला दिया था, अदालत के अनुसार प्रदेश के मद्रास पर लगाई गई ताले और सील को जल्दी से जल्दी हटाने का काम किया जाएगा, हाई कोर्ट ने अभी कहां है कि जो प्राइवेट मदरसे हैं उनको सरकारी अनुदान नहीं मिलने का प्रावधान है लेकिन बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है, और यह जितने भी गैर मान्यता प्राप्त मदरसे हैं यह सरकार से कोई अनुदान नहीं मांग रहे थे ऐसा कोर्ट का कहना है
तीन प्रकार के मदरसे चलाए जा रहे हैं:
अल्पसंख्यक विभाग से जारी की गई लिस्ट में मद्रास को तीन श्रेणी में बांटा गया था पहले वह मदरसा जो राज्य सरकार से कोई अनुदान नहीं मांगते हैं, दूसरी श्रेणी उन मद्रास की है जो सहायता चाहते हैं और तीसरी श्रेणी उन मद्रास की है जो केवल मान्यता चाहते हैं लेकिन कोई सहायता नहीं, संविधान इनको एक अलग मौलिक अधिकार प्रदान करता है ताकि वह अपनी संस्कृति अपनी लिपि को जिंदा रख सके, और याचिका करता का कहना है कि जो मदरसे सील किए गए हैं वह पहली श्रेणी में आते हैं जो ना तो कोई मानता मांगता है और ना ही कोई सहायता लेकिन राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जो भी गैर मान्यता प्राप्त मदरसे हैं वह समस्या का कारण बन सकते हैं इसलिए उन्हें बंद करना उचित है अब देखना है कि कोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार का क्या रवैया होता है