देश संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की 135वी जयंती मना रहा है
14 अप्रैल 2025 को एक ऐसे शख्स की जयंती है जिन्होंने अपना सारा काम और जीवन मजदूरों और अछूतों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया,उनका नाम है संविधान निर्माता ,देश के पहले कानून मंत्री डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर,देश इस संविधान निर्माता की 135वीं जयंती मना रहा है

जन्म
संविधान निर्माता डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 महू छावनी,(पहले महाराष्ट्र में था )अब मध्य प्रदेश में है,इसे समानता दिवस भी कहा जाता है, देश के पहले कानून मंत्री भी थे, और 1956 दिसंबर को दिल्ली में अंबेडकर जी का निधन हो गया, भारत में सामाजिक और जाति भेदभाव को मिटाने के लिए इन्होंने अपने जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिए ,दलितों का एक मात्र चेहरा बन कर उभरे थे अम्बेडकर,आज भी दलितों के दिल,बल्कि सभी भारतीय के दिल में अम्बेडकर के लिए इज्जत है,उनके जीवन से हमें कई सीख मिलती है इनका कहना था कि मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व सीखता है,उन्होंने अंतिम समय में हिंदू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया,उनका कहना है कि हम सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं, बहुत ही अच्छी सोच थीhttp://news24hourslatest.in
संसद भवन के कार्यक्रम
अंबेडकर जयंती पर संसद भवन में बाबा साहब अंबेडकर का श्रद्धांजलि दी गई इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और कई कैबिनेट मंत्री, कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भाजपा अध्यक्ष और विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधि की उपस्थित रहे जिन्होंने संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि दी,
कोलेज,स्कूल,दफ्तर, बैंक बंद रहेंगे आज के दिन
अंबेडकर जयंती के मौके पर शेयर बाजार से लेकर बैंक स्कूल कॉलेज सरकारी दफ्तर सब कुछ बंद रहेंगे आज 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती है और इस मौके पर देश भर की अलग-अलग राज्य सरकार की तरफ से सार्वजनिक अवकाश घोषित की गई है ,आपको बता दे कि आज स्टॉक मार्केट भी बंद रहेगा, शेयर बाजार में कामकाज नहीं होगा इसके अलावा 14 अप्रैल को कई राज्यों में बैंक भी बंद रहने वाले अधिकतर राज्य में बैंकों की छुट्टी रहेगी, सारे स्कूल और सरकारी ऑफिस बंद रहेंगे, देश की अधिकतर राज्य सरकारों ने आज अवकाश घोषित कर रखा है और अंबेडकर जयंती के मौके पर सभी राज्यों में अलग-अलग जिलों में कई कार्यक्रम में आयोजित होंगे देश की राजधानी दिल्ली में भी नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डॉक्टर अंबेडकर जयंती के मौके पर मैराथन का आयोजन किया
अम्बेडकर के साथ भेदभाव
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का विवाह सविता अंबेडकर के साथ हुआ था जो मूल रूप से ब्राह्मण परिवार से थी और बाद में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गई,
संविधान निर्माता बाबा साहब को उनकी जाती के वजह से उनको हर समय नीचा होने की अनुभूति कराई गई,उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया था ,अंबेडकर को अपने जीवन काल में बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ा , शिक्षा में स्कूल में उन्हें अन्य छात्रों से अलग बैठाया जाता था और उन्हें कभी-कभी सार्वजनिक मटके से पानी पीने की भी अनुमति नहीं थी, रोजगार में कुछ नौकरियों में उन्हें उनके दलित होने के कारण प्रवेश से वंचित कर दिया गया था ,सामाजिक जीवन में उन्हें सार्वजनिक स्थानों जैसे कि मंदिरों और सर्वजनिकों से भी वंचित रखा गया था और उनकी जाति के कारण कुछ लोगों ने उन्हें खाना पर देने या उनकी सेवा करने से भी इंकार कर दिया था,अंबेडकर ने अपने जीवन काल में इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया उन्होंने दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र शिक्षा में आरक्षण और अन्य सामाजिक सुधारो की मांग की,लेकिन विडंबना देखिए कि उसी दलित के लड़के ने जिसे दुनिया संविधान निर्माता पहले कानून मंत्री डॉ भीमराव अंबेडकर से जानती है जिनकी वजह से आज भारत में संविधान है जिनकी वजह से दलित भी आज सवर्ण जाति से कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हैं,उनके इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत,भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया
ज्ञान के भंडार थे अंबेडकर
डॉ भीमराव अंबेडकर 64 विषयों के मास्टर थे उन्हें 9,10 भाषाओं का ज्ञान था उनके पास कुल 32 डिग्रियां थी ,उन्होंने कई वर्षों तक सभी धर्म को अच्छे से अध्ययन किया वह इतनी तेज थे कि लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स की पढ़ाई जो 8 साल में पूरी होती थी उन्होंने 2 साल 3 महीने में पूरा कर लिया और उन्हें वहां से “,डॉक्टर ऑफ साइंस” की उपाधि मिली और यह दुनिया के पहले व्यक्ति थे और एकमात्र व्यक्ति थे जिन्होंने यह उपाधि हासिल की,
चुनाव भी हारे
देश आजाद होने के बाद पहली लोकसभा चुनाव 1951 और 52 में लड़ा गया जिसमें अंबेडकर को बुरी तरीके से हार मिली1,4000 वोटो से हारे थे ,उन्होंने कांग्रेस की तरफ से मुंबई उत्तरी सीट से लोकसभा चुनाव में उतरे थे, हालांकि अंबेडकर को इस चुनाव में धांधली नजर आई और उन्होंने मुकदमा भी दाखिल किया था, आपको बता दे की आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पहली अंतरिम सरकार में बाबा साहब को न्याय मंत्री बनाया उनके नेतृत्व में ही बना संविधान पूरे देश में लागू हुआ ,लेकिन बाद में कुछ मतभेदों के कारण प्रधानमंत्री नेहरू को बाबा साहब ने पत्र लिखकर बाबा साहब ने अपने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया,
मृत्यु
बाबा साहब ने 6 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में अपनी अंतिम सांस ली, बाबा साहब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म पर एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम है बुद्ध और उनका धर्म हालांकि इस किताब का प्रकाशन उनकी मृत्यु के बाद हुआ था और वह 14 अक्टूबर 1956 को खुद बौद्ध धर्म अपना लिए थे इसके बाद ही उनका निधन हो गया, ऐसा कहा जाता है कि वह लंबे समय से बीमार थे उन्हें डायबीटीज , उच्च रक्तचाप, गठिया जैसी कई बीमारियां थीं जिनके कारण उनके मृत्यु हो गई
