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नेपाल में फिर गूंजा हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग

नेपाल में फिर गूंजा हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग

नेपाल में फिर गूंजा हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग

नेपाल में फिर गूंजा हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग

नेपाल में इन दिनों हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज हो गई है उर राजशाही वापस करने की मांग हो रही है,जिसे लेकर कई आंदोलन भी सुरु हो चुके है , विगत 9 मार्च 2025 को काठमांडू में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में इक्कठा हुए,लोगों ने नारे लगाने लगे “राजा आओ देश बचाओ” इसी बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई ,कई नेता गिरफ्तार भी हुए ,फिर दोबारा प्रदर्शन होने लगा उर गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग होने लगी,2006 में बड़ी तादाद में लोग राजशाही समाप्त करने की मांग कर रहे थे, वहीं 2025 में लोग राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं,नेपाल में इन दिनों अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था खराब है,प्रदर्शनकारियों ने इसको मुद्दा बनाकर फिर से हिंदू राष्ट्र और राजशाही वापस जाने की मांग कर रहे है नेपाल में फिर गूंजा हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग

 

आखिर नेपाल की जनता क्यों राजशाही की मांग कर रही है?
आको बता दे 2008 में , संसद जो की समाप्त हो चिकाक था उसे रिवाइव किया गया था ,और इस संसद ने देश को धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया और राजशाही को भी समाप्त कर दिया,नेपाल में इस भ्रष्ट्राचार्य और अव्यवस्था फैली हुई है,लोगों का कहना है की नेपाल में अभी जो राष्ट्रपति हैं वह राष्ट्रपति से ज़्यादा पार्टी सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे वह जुड़े हुए हैं. मुझे लगता है कि इन्हीं सब कारणों से यह स्थिति बनी है,काठमांडू की सड़कों पर राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है ,नेपाल में २००८ से पहले राजशाही थी,वहां के लोगों का कहना है कि यहां पर सरकार हमेशा बदलती रहती है,नेपाल की जो मौजूदा सरकार है उसे लेकर लोगों में कही न कही बहुत नाराजगी है,लोगों का कहना है की भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है,जिस तरीके से सरकार को काम करना चाइए था वैसे सरकार काम नही कर रही है ,वहां के लोगों के कहना है की यहां की राजनीतिक व्यवस्था बहुत खराब है,इन्हीं सब चीजों से परेशान होकर नेपाल के लोगों ने राजशाही की मांग की है,उनका कहना है की इसे अच्छा तो तब था जब नेपाल में राजशाही था, कम से कम नेपाल के लोग तो उनके नियंत्रण में रहते थे,सब कुछ स्थाई था,नेपाल के ज्यादातर लोग हिंदू राष्ट्र के पक्ष में है,लोगों का कहना है की हिंदू राष्ट्र हमारी सांस्कृतिक पहचान है,लोगों का कहना है की नेपाल एक देश है जिसकी पहचान कभी राजाओं तो कभी राजशाही परंपराओं से है ,240 साल पुरानी राजशाही का अंत हुआ है इसे फिर से वापस करेंगे http://news24hourslatest.in

आपको बता दे की 2021 की नेपाल जनगणना के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी लगभग 5.09% है, जो लगभग 14.83 लाख लोगों के बराबर है ,नेपाल के लोगों का कहना है की यहां के मुसलमानो को भ कोई दिक्कत नही है अगर नेपाल हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएं,नेपाल की जनसंख्या लगभग 31.24 मिलियन (3.12 करोड़) है

नेपाल साम्राज्य के पहले राजा पृथ्वी नारायण शाह ने 1769 में काठमांडू और नेपाल के आखिरी राजा ज्ञानेन्द्र बीर बिक्रम शाह देव थे। उन्होंने 2001 से 2008 तक राज किया, उसके बाद नेपाल में राजशाही खत्म हो गई थी,नेपाल लंबे समय तक दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र रहा है लेकिन लोकतंत्र आने के बाद नेपाल को सेकुलर घोषित कर दिया गया,अब देश में राजशाही समर्थक आवाजें उठा रहे हैं और उनका कहना है कि लोकतंत्र की व्यवस्था को खत्म करके शाही परिवार को फिर से सत्ता सौंप दी जाए,आपको बता दे की नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली है वह नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष हैं

राजशाही वापस आ जाए तो क्या होगा तो भारत से कैसा संबंध रहेगा

अगर नेपाल में 16 साल बाद अगर राजशाही वापस आ जाए तो इसे निवेश में काफी बढ़ोतरी होगी,क्योंकि यहां लोकतंत्र विफल है ,नौकरियां नही है,आमजन परेशान है ,युवा पलायन कर रहे है दूसरे देशों में,नेपाल की अर्थव्यवस्था बाहर से आने वाले धन पर निर्भर रहता है,लोगों का कहना है की अगर राजशाही वापस लौटती है तो इससे नेपाल फिर से अपनी पुरानी पटरी पर आ जाएगा,निवेशकों का भरोसा लौटेगा,भारत का नेपाल से केवल पड़ोसी का संबंध नहीं है,ना की भौगोलिक है बल्कि नेपोल भारत का संबंध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी है,राजशाही के दौरान भारत ने नेपाल की बहुत मदद की ,यहां तक कि जब नेपाल में भूकंप आया तो भारत मदद की लिए पीछे नही हटा,भारत की दोस्ती नेपाल से सांस्कृतिक इसलिए है क्योंकि भगवान राम का जन्म अयोध्या (भारत) में हुआ, तो माता सीता का जन्म जनकपुर (नेपाल) में माना जाता है,बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था, लेकिन उनके जीवन के अधिकांश महत्वपूर्ण स्थल भारत में हैं,दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहाँ आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं,आर्थिक और व्यापारिक संबंध से भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है ,भारत की सेना में नेपालियों की गोरखा रेजिमेंट एक गौरवशाली हिस्सा है,कभी-कभी सीमा या राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आते हैं,लेकिन इन मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाने की कोशिश होती रही है।

चीन से संबंध

नेपाल और चीन के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। लुम्बिनी, जो भगवान बुद्ध का जन्मस्थान है, चीन के लिए भी एक धार्मिक स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है। नेपाल ने हमेशा “एक चीन नीति” का समर्थन किया है, यानी ताइवान और तिब्बत को चीन का हिस्सा माना है,चीन ने नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है,बता दे की चीन नेपाल का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है,चीन ने नेपाल में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश किया है जैसे:सड़क निर्माण (कोडारी हाईवे) पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डापोखरा सैन्य सहयोग नेपाल और चीन के बीच सीमित लेकिन बढ़ते सैन्य सहयोग हैं

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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