
बेजुबान जानवरों का क्या कसूर
तेलंगाना के कांचा गचीबावली जंगल जो 400 एकड़ में फैला हुआ है उसकी कटाई का।मामला काफी दिनों से सुर्खियों में है,अपने निजी सुख सुविधाओं के लिए हम किसी का भी कत्ल कर सकते है , हैदराबाद की सरकार ने हैदराबाद के विश्वविद्यालय के 400 एकड़ की जमीन को काटना का फैसला वहां के जानवरों के लिए काफी कष्टदायक सिद्ध हो रहा है,जानवरों को जंगल से भगा कर पेड़ों काटा जा रहा है,जंगल को काटने के बाद वहां के छात्र सड़कों पर उतर आए है, छात्रों का कहना है कि इस निर्णय से बेजुबान जानवरों को, पर्यावरण को काफी हद तक नुकसान पहुंच सकता है,http://news24hourslatest.in
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कहना है
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कहना है इस 400 एकड़ में बनने जा रहे IT पार्क जैसे प्रोजेक्ट पर 50000 करोड़ का निवेश आयेगा और लगभग 5 लाख नौकरियां पैदा होंगी , मुख्यमंत्री का कहना है कि ये प्रोजेक्ट विकास के लिए ऑक्सीजन जैसा है,आपको बता दे तेलंगान उच्च न्यायाल ने 3 अप्रैल तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी, मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने से पर रोक लगा दी,और उच्च न्यायालय को इसमें संज्ञान लेने को कहा,आखिर कहा है बड़े बड़े उद्योगपति जो जानवरों से बेहद प्रेम करते हर जगह नजर आते हैइस मामले की सुनवाई अब तेलंगाना उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हो रही है।,काफी बढ़ता हुआ विवाद को देखकर कांग्रेस नेता नटराजन का कहना है कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए,साथ ही उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर नागरिक समाज समूहों से भी बैठकें की जाएंगी,छात्रों और सरकार के बीच बढ़ते हुए विवाद को देख कर साइबराबाद पुलिस ने सार्वजनिक शांति को बनाए रखने के लिए 4 अप्रैल को 400 एकड़ भूमि क्षेत्र में लोगों के प्रवेश पर 16 अप्रैल तक प्रतिबंध लगा दिया है,आपको बता दे इस मामले की सुनवाई अब तेलंगाना उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हो रही है,दिल्ली में बीजेपी के नेता ने लोक सभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बकायदा पोस्टर लगवाए है जिसमें लिखा है तेलंगाना में हमारे जंगलों को कटना बंद करे
सर्वोच्च न्यायालय का दखल
पेड़ को कटने से बचाने के लिए छात्र उस जगह को वन संरक्षित छेत्र घोषित करने की मांग कर रहे है, बात जब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंची तो अगले आदेश तक इस पर रोक लगा दी गई,इस मामले में एक नया विवाद देखने को मिला विश्वविद्यालय का कहना है कि जमीन विश्वविद्यालय की है उधर सरकार का दावा है कि जमीन सरकार के अधीन है
,लेकिन मामला जब उच्च न्यायालय में पहुंचा तो न्यायालय का कहना था कि विश्वविद्यालय के कोई मालकियत उपलब्ध नहीं है,बाद में मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा तो उसने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा,यही कारण है कि सरकार उस जमीन पर अपना पड़ों की वाणिज्यिक कटाई कर उद्योग पैदा करना चाहती है
आपको बता दे कि पेड़ो को कटने से बचाने के लिए भारत में बहुत सारे आंदोलन भी हुए है
चिपको आंदोलन-
चिपको आंदोलन भारत का वन संरक्षण आंदोलन है,1970 के दशक में लोगों में पेड़ों को गले लगाने का काम किया ताकि पेड़ों को कटने से बचाया जा सके,इस आंदोलन से महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा थी,क्योंकि सबसे ज्यादा इस चीज का प्रभाव पड़ा तो वो महिलाओं को
बिश्नोई आंदोलन
इस आंदोलन में पेड़ों की सुरक्षा के लिए 363 लोगों में अपनी जान तक दे दी थी,इस आंदोलन का नेतृत्व अमृता देवी ने किया था
अप्पिको आंदोलन
भारत के वन-आधारित पर्यावरण आंदोलनों में से एक है अप्पिको आंदोलन। यह विरोध कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के पश्चिमी घाट में हुआ। कर्नाटक का ‘वन जिला’ उत्तर कन्नड़ है, जो पश्चिमी घाट का हिस्सा है
जंगल बचाओ आंदोलन
आदिवासियों ने सन 1982 में बिहार एक जिले सिंहभूमि जो कि अब झारखंड में है वहां के जंगलों को बचाने के लिए ये आंदोलन चलाया था 1978 से 83 तक चले सघन आंदोलन के दौरान 18 आंदोलनकारी मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 15 हज़ार केस दर्ज किए गए. साल 2006 में यूपीए सरकार ने जब जंगल अधिकार कानून पास किया, तब जाकर आदिवासियों के ऐसे आंदोलनों को राहत मिली.