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सुप्रीम कोर्ट में दोनो पक्षों से पूछे तीखे सवाल,केंद्र ने जवाब के लिए मांगा समय

सुप्रीम कोर्ट में दोनो पक्षों से पूछे तीखे सवाल,केंद्र ने जवाब के लिए मांगा समय

सुप्रीम कोर्ट में दोनो पक्षों से पूछे तीखे सवाल,केंद्र ने जवाब के लिए मांगा समय


वक्फ  अधिनियम 2025 के खिलाफ दायर की याचिकाओं के खिलाफ  सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा  है ,जवाब के लिए सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन का समय दिया है,

केंद्र सरकार की दलील है की वक्फ संस्था में गैर मुस्लिम को भी सदस्य बनाया जाए ,

दूसरी दलील थी की वक्फ संपत्ति की जांच कलेक्टर की निगरानी में हो ,

तीसरी दलील है कि वक्फ बाय यूजर की अनरजिस्टर्ड प्रॉपर्टी के डिनोटिफेकेशन पर रोक लगाना ,

इस पर कोर्ट में एडवोकेट ,राज्य सभा सांसद कपिल सिब्बल ने जो दलील रखी थी उस पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सवाल उल्टा पूछ लिए,कपिल सिब्बल ने उन्होंने वक्फ बाय यूजर और धार्मिक संपत्ति पर सरकार के अधिकारों को लेकर कई बड़े तर्क रखे।कपिल सिब्बल अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए कहा कि ये मुसलमानों के धार्मिकता के नाम पर हमला है,उनका कहना है कि नए कानून में वक्फ बोर्ड के सदस्य हिंदू भी हो सकते है,उनका ये तर्क है  की पहले केवल मुसलमान ही वक्फ का हिस्सा होते थे,तो इस कानून में ये बदलवा क्यों?उन्होंने ये सवाल किया की राज्य कैसे ये सुनिश्चित कर सकता है की में मुसलमान हूं नही और वक्फ बना सकता हूं या नहीं ,सिब्बल ने कहा कि नए कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति तब तक वक्फ नहीं बना सकता जब तक वह पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का अभ्यास कर रहा न हो,भला मै य प्रमाण क्यों राज्य को द की मैं मुसलमान हूं  या नहीं ,कपिल सिब्बल का कहना है की नया कानून “वक्फ बाय यूजर” पर रोक लगाता है ,वक्फ बाय यूजर का मतलब है की अगर किसी संपत्ति का लंबे समय तक धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य से उपयोग हुआ है, लेकिन लिखित में इसका कोई प्रमाण ना हो ,तब  उसे “वक्फ बाय यूज़र” माना जाता है.कपिल सिब्बल ने गैर मुस्लिम की वक्फ बोर्ड में भागीदारी पर सवाल उठाते हुए बोला की हिंदू या सिख की कोई संस्था में केवल उसी के धर्म के लोग की भागीदारी होती है तो फिर मुस्लिम वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम क्यों?सिब्बल का धारा 3c पर आपत्ति जताते हुए कहा है की सरकारी आदमी को जज बना देना गलत है,धारक 3c य कहती है की सरकार किसी भी संपत्ति को एकतरफा तरीके से सरकारी घोषित कर और उसे वक्फ की श्रेणी से हटा दे ,इसका जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा है की सरकार य कैसे फैसला ले  सकती है की ?  जबकि मामला वक्फ और सरकार के बीच का है,सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा और ‘वक्फ बाय यूजर’ को हटाया नहीं जा सकता। http://news24hourslatest.in

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ की सुनवाई पर AIMIM के सांसद असुदुद्दीन ओवैसी के कहा है की ये कानून धार्मिक स्वतंत्रता का उलंघन है,हम इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे

कांग्रेस के राज्य सभा सांसद,इमरान प्रतापदगढ़ी में कहा है की ,”वक्फ से जुड़े माननीय उच्चतम न्यायालय के अंतरिम राहत के आदेश पर मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं। वक्फ कानूनों में जो संविधान विरोधी संशोधन किए गए थे, उच्चतम न्यायालय ने उसके कई बिंदुओं पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

इसका जब देते हुए केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि  अगर वक्फ मामलों में गैर-मुस्लिमों की भागीदारी गलत है, तो फिर इस केस में हिंदू जजों को सुनवाई नहीं करनी चाहिए. इस पर CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘जब हम यहां बैठते हैं, तो हम धर्म छोड़ देते हैं. हम पूरी तरह सेक्युलर होते हैं.’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश  संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने संकेत दिया कि वे कानून के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक (stay) लगा सकते हैं,वो प्रावधान  है की पांच साल का मुस्लिम अभ्यास प्रमाण,वक्फ घोषित संपत्तियों को कोर्ट के आदेश के बावजूद डिनोटिफाई करना,वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति,सुप्रीम कोर्ट का ये भी कहना है की अदालत सभी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर सकता,सिर्फ 5 याचिकाओं और सुनवाई होगी,

अब देखना है की 5 मई को सुप्रीम कोर्ट दोनों की दलीलों को सुनने के बाद कोई आदेश जारी करता है या नही ?

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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