अमेरिका चीन टैरिफ टैरिफ गेम खेल रहे हैं
मेमोरी कार्ड स्मार्टफोन कंप्यूटर और उन इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट को ट्रंप की तरफ से राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को एक नया टैरिफ पूरे दुनिया में लागू किया था, जिससे अनुमान यह लगाया जाता था की चीज महंगी होगी, कुछ चीज सस्ती भी होगी, लेकिन ताजा खबर यह है कि ट्रंप ने स्मार्टफोन कंप्यूटर उन इलेक्ट्रॉनिक पर टैरिफ से छूट दे दी है
ट्रंप का कहना है कि यह छूट चीन से अमेरिका आने वाले स्मार्टफोन और उसके इक्विपमेंट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल है जिन पर हाल ही में 145 प्रतिशत एक्स्ट्रा टाइप लगाया गया था, इस फैसले से अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि उनका कहना था कि टैरिफ लगने के बाद अमेरिका के इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगी हो सकते थे, क्योंकि ज्यादातर प्रोडक्ट चीन से बनते थे, क्योंकि कई चीजों की अमेरिका में मैन्यूफैक्चरिंग या तो होती नहीं है या बहुत कम मात्रा में होती है, एप्पल जैसे टेक कंपनियों के बहुत सारे प्रोडक्ट चीन में बनते हैं और चीन से अमेरिका का ट्रेड वॉर चल रहा है इसलिए चीन भी झुकने को तैयार नहीं, चीन से अगर कोई प्रोडक्ट अमेरिका जाता है तो भारी भरकम टैक्स देना पड़ेगा जिसकी वजह से अमेरिका की भी अर्थव्यवस्था गड़बड़ा सकती है, अमेरिका के शेयर बाजार पर भी इसका तगड़ा असर पड़ेगा, एक तरह से कहा जाए तो चीन तमाम इलेक्ट्रॉनिक सामानो के उत्पादन का हब है
आईए जानते हैं चीन और अमेरिका का टैरिफ वार कैसा था
2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के ऊपर 34 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया जो 54% तक पहुंच गया, उसके बाद 4 अप्रैल को चीन ने अमेरिका का जवाब देते हुए 34% टैरिफ लगाया, चीन द्वारा अमेरिका पर 34% टैरिफ लगाया गया तब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 अप्रैल को चीन पर 50% एक्स्ट्रा ट्राइब लगाया जो चीन पर 104 परसेंट टैरिफ हो गया, इस 9 अप्रैल को ट्रंप ने कहा कि चीन पर 125 परसेंट एक्स्ट्रा टाइप लगेगा, फिर क्या था फिर चीन ने अमेरिका पर 50% तारीफ और बढ़ा दिया जो 34 परसेंट टाइप हो गया, 10 अप्रैल को डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से साफ कह दिया कि चीन पर कल टैरिफ 145 परसेंट है, वही 11 अप्रैल को चीन ने वापस अमेरिका पर 125 परसेंट तारीफ लगाया यह कहते हुए कि हम किसी देश के आगे नहीं झुकेंगे, दोनों देश एक दूसरे के प्रति नरम होने का नाम नहीं ले रहे हैं दोनों का कहना है कि अगर अगर तारीफ बाद तो हम भी टैरिफ बढ़ाएंगे, यह दोनों देशों के बीच टैरिफ नहीं कुत्ते गुड़ियों का खेल हो गया है, अगर अमेरिका चीन के हितों का उल्लंघन करने पर जोर देता है तो चीन दृढ़ता से जवाबी कदम उठाएगा और अंत तक लड़ेगा,
चीन और अमेरिका के इस टैरिफ लड़ाई , क्या भारत पर भी असर डालेगा, भारत का अधिकतम इलेक्ट्रॉनिक सामान चीन से ही आता है अगर चीन ने अमेरिका पर 125% टैक्स बढ़ा दिया है तो क्या भारत में भी सामान महंगे होंगे इस पर विचार करना चाहिए, भारत पर चीन का दर 26 प्रतिशत है
अमेरिका का यह नया टैरिफ प्लान इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने वाली कंपनियों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि अमेरिका में इन इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मैन्युफैक्चरिंग लगभग ना के बराबर होती है सारे सामान बाहर से आते हैं और अगर टैक्स बढ़ाया गया तो असर कंपनियों पर और ग्राहकों पर पड़ेगा, टैक्स में छूट देने से ग्राहक को भी फायदा होगा और कंपनियों को भी फायदा होगा क्योंकि जब टैरिफ सस्ता होगा तो सामान्य सस्ता होगी तो ग्राहक को भी सस्ते दाम पर मिलेंगे, टैरिफ कंपनियां यह सोचने पर मजबूर हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अलग-अलग टैरिफ ला सकते हैं जिससे कंपनियों को नुकसान भी हो सकता है
अमेरिका और चीन के बीच पनामा का कारनामा
पनामा पहले कोलंबिया का गुलाम हुआ करता था अमेरिका की मदद से वह आजाद हुआ, अमेरिका को पनामा नहर बनाने का 1904 में अधिकार मिल गया, अरकाई 10 को तक यह पनामा नहर का प्रभाव अमेरिका के हाथों में रहता था अमेरिका इसे अपना समुद्री व्यापार मजबूत करता था, दोनों विश्व युद्ध में भी अमेरिका को इससे काफी लाभ हुआ इसीलिए अमेरिका फिर से इसको अपने अधीन करना चाहता है,20वो सदी में अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के नेतृत्व में अमेरिका का पनामा पर यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया, बाद में जब यह अमेरिका की मदद से आजाद हुआ तो पनामा नहर का नियंत्रण अमेरिका के हाथों में चला गया धीरे-धीरे दर्शन तक अमेरिका इस पर नियंत्रण करता रहा , बाद में पनामा के लोगों ने अमेरिकी नियंत्रण को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए विरोध प्रदर्शन किया और एक संधि पर हस्ताक्षर हुआ जिसके तहत अमेरिका का पनामा नहर पर नियंत्रण हट गया, पनामा नहर अमेरिका को स्थिति में लाभ देता था वहां के तत्वों पर माल बेचना तेल कृषि उत्पादक जैसी वस्तुएं पर अमेरिका निर्भर रहता था,
चीनी कंपनियों का भी पनामा नहर के पास बंदरगाहों और भी बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश है जिसकी वजह से अमेरिका की भी चिंता बढ़ गई है चीन भी धीरे-धीरे इस नहर में रुचि दिखा रहा है, चीन के इस भारतीय प्रभाव से अमेरिका थोड़ा डरा हुआ है यही कारण है कि वह दोनों देश एक दूसरे पर टैरिफ का प्रभाव बढ़ाते जा रहे हैं, पनामा नहर को अपने नियंत्रण मैं करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नया रुख अपनाया है, उसने अब चीन पर अपने तारिफ का प्रतिशत बढ़ा दिया है, अमेरिका जब-जब पनामा नहर के तरफ अपनी नियंत्रण रखने की कोशिश करता है तो चीन भी उसी की तरफ अपना शाख जमाना चाहता है,अब देखना है की अमेरिका और चीन के इस टैरिफ युद्ध में भारत को कितना नुकसान पहुँचाता है
