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कितना खतरे में है संविधान

कितना खतरे में है संविधान

हम हर 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस मनाते हैं और,क्यों मनाते हैं अगर यह आम हिंदुस्तानियों से सवाल पूछा जाए तो सबकी अलग-अलग व्याख्याएं नजर आएंगी,कुछ लोग कहेंगे कि यह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने लागू किया था सही बात है,कुछ लोगों की राय है कि यह सरकारी रस्म अदायगी है,कुछ लोग का कहना है कि संविधान आन बान शान का प्रतीक है,मतलब की जिससे आप पूछेंगे सब कोई अलग-अलग जवाब देगा,पिछले 76 सालों में हमने क्या खाया और क्या पाया इसका आकलन करना चाहिए,2 साल 11 महीने 18 दिन में अपना संविधान बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ जिसमें मुख्य भूमिका संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की रही

आईए जानते हैं कुछ तथ्य:

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ था,आपको बता दे कि संविधान सभा में 299 महानुभाव शामिल हुए थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत के लिए अनिवार्य दस्तावेज के रूप पर गंभीर मतभेद भी थे यानी की 11 अप्रैल 1947 को संविधान निर्माता डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल पेश किया और इस कोड बिल में यह था कि बिना वसीयत करने वाले हिंदू स्त्री या पुरुष की संपत्ति के बंटवारे को कानूनी रूप देने का प्रस्ताव पारित हो यानी कि यह विधेयक मृतक की संपत्ति में विधवा और बेटे बेटियों को बराबर का हकदार देने का हिमायती था,इस विधेयक में कुछ बदलाव की सिफारिश भी थी जैसे कि हिंदू औरतों को तलाक का अधिकार मिल जाता लेकिन इसका भारी विरोध हुआ,अंबेडकर और नेहरू ने अपने तर्कों से सदस्यों को रिझाने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहे

आरक्षण को लेकर भी काफी तीखी बहस थी:

आपको बता दे कि अल्पसंख्यक,अनुसूचित जाति और जनजातियों को आरक्षण को लेकर काफी तीखी बहस हुई थी सरदार वल्लभभाई पटेल भी आरक्षण के खिलाफ थे लेकिन अंबेडकर इसके पक्ष में थे और इस संदर्भ में पंडित नेहरू ने 26 मई 1949 को कहा था अनुसूचित जातियों के संबंध में यानी कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण हटाना संभव नहीं है,और तब से लेकर आज तक आरक्षण पर कोई न कोई बहस होती रहती है और यही वजह है कि हर महत्वपूर्ण विषय पर हमेशा मतभेद होते रहे हैं,चाहे वह केंद्र की शक्ति का प्रश्न हो,आरक्षण का मुद्दा हो,राष्ट्रभाषा का मुद्दा हो,इन सब पर टिकी भैंस होती रहती है,हर मुद्दे पर सब लोग कि राय अलग-अलग है लेकिन जो वोट देने का अधिकार है वह हर नागरिक के लिए बराबर है,यही संविधान की ताकत है

कौन आरक्षण के पक्ष में था कौन विपक्ष में था:

आपको बता दे की डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू यह दोनों आरक्षण के पक्ष में थे उनका कहना था कि विभाजन के बाद देश में एकता बनाए रखना,अखंडता बनाए रखना,गरीबी दूर करने के लिए हमें और मजबूत होना चाहिए जिसके लिए आरक्षण की बेहद जरूरत है,कई लोगों का मानना था की संविधान को ग्राम पंचायत का ख्याल रखना चाहिए लेकिन अंबेडकर इसके खिलाफ थे क्योंकि वह गांव को अज्ञानता का अड्डा और स्थानीयता का गढ़ मानते थे और इसी प्रकार सरदार वल्लभभाई पटेल संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने के पक्ष में खड़े थे ताकि किसानों और अन्य गरीब लोगों को उनकी हक मिल सके

लाख विरोध के बावजूद भी संविधान बना:

लाख मतभेद के बावजूद भी संविधान आखिरकार बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हो गया,भाषा,आरक्षण,समान नागरिक संहिता एक मतभेद का हिस्सा है,संविधान सभा के गठन से आज तक भारतवासियों में राष्ट्रीय एकता लोकतंत्र की एकता जीवित है और यही कारण है कि भारत सबसे अलग है, पाकिस्तान भी आजाद हुआ भारत के समय लेकिन आज उसकी स्थिति देख लीजिए वहां तो ना तो संविधान है और ना ही एकता है,बांग्लादेश को देख लीजिए वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को भागना पड़ा वहां का लोकतंत्र भी बर्बाद हो चुका है इसलिए हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि हम भारत में पैदा हुए जहां संविधान की ताकत नजर आती है,जहां संविधान की ताकत नजर नहीं आती है वह देश बर्बाद हो जाते हैं चाहे वह बांग्लादेश हो,ईरान हो,वेनेजुएला हो,बांग्लादेश हो, पाकिस्तान हो,नेपाल हो,इन सारे देशों में पिछले कुछ सालों में लोकतंत्र की नींव पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुकी है इसलिए यह देश बर्बाद हो रहे हैं
दोस्तों लाख मतभेदों के बाद भी हम एक हैं यह हमारे पूर्वजों की मेहनत का फल है और उनके प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए क्योंकि उस समय देश की जो स्थिति थी वह बेहद ही नाजुक मोड़ पर थी आज हम समृद्ध हो चुके हैं हर देश से लड़ने की क्षमता है हमारे में,इसलिए हमे इस मशाल को जलाए रखना चाहिए और हर हिंदुस्तानियों को संविधान का सम्मान करना चाहिए

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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