
कैसे बनी रहेगी गणतंत्र की गरिमा
आपको बता दे कि देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, इसी दिन यानी 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू हुआ था,इस ऐतिहासिक अवसर पर हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों संविधान निर्माता के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हैं,उनको याद करते हैं उनके प्रति श्रद्धा जताते हैं बीते 76 वर्षों में भारत के संविधान को दुनिया में ऊंचा दर्जा पहुंचने में बहुत योगदान भारतीयों ने किया है एक समय था जब देश की आबादी 36 करोड़ थी जब हम अपना पहला गणतंत्र मना रहे थे और आज देश की आबादी 140 करोड़ के करीब है तब भी हम अपना गणतंत्र दिवस पूरे धूमधाम से मनाते हैं
शून्य से शिखर तक:
26 जनवरी 1950 से लेकर अभी तक यानी 26 जनवरी 2026 का जो सफल रहा है वह बेहद ही चुनौती पूर्ण रहा है,उसके बावजूद भी हम अपने संविधान को जिंदा रखे हैं 36 करोड़ से 140 करोड़ हो गए हम लेकिन हमारे संविधान की मर्यादा अभी भी जिंदा है,याद करिए जब देश आजाद हुआ था उस समय लोगों को दो वक्त का भोजन नसीब नहीं हुआ करता था देश अलग-अलग विसंगतियों से गुजर रहा था और जितनी भी सरकारे आई सब तरक्की के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने का अथक प्रयास किया और वह आज सफल भी दिख रहा है,आज देश न सिर्फ 80 करोड लोगों को मुफ्त अनाज बांटने की स्थिति में है बल्कि अन्य देशों को भी भारत भोजन करा सकता है,हमारे गणतंत्र की कामयाबी में स्वतंत्र नगर पालिका निर्वाचन आयोग विधायिका शिक्षा केंद्रों की मुख्य भूमिका रही है
क्या हम पूरी तरीके से गणतंत्र की गरिमा बनाए रखे हैं:
देश के आजाद होने के बाद जब राजनीतिक सत्ता जनता के हाथ में आई तब से अलग-अलग सरकार भारतीय जनता के द्वारा चुनी गई मगर एक सवाल जो सबके दिलों में उठता है कि हमारे संविधान निर्माता ने शासको और नागरिकों से जो अपेक्षाएं की थी क्या पूरी हो गई है,भारत आज भले ही अपनी राजनीतिक स्थिरता सत्ता के सफल हस्तांतरण गरीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ा चुका है लेकिन क्या फिर भी संविधान निर्माता ने जो सपना भारत के लिए देखा था वह पूरा हो रहा है
क्या संविधान निर्माताओं का सपना पूरा हुआ:
आजादी के बाद से लेकर अब तक क्या संविधान निर्माता का सपना पूरा हुआ है या फिर कही कोई चूक रह गई है,भले ही हम शिक्षा के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ धर्म जाति के संकेत दायरे के टूटने और एक समता मूलक समाज के निर्माण का जो सपना देखा गया था वह पूरा कर रहे हैं लेकिन जो मूल मुद्दा था क्या उसे हम पूरा कर सके हैं,इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते हैं कि गणराज्य का प्रथम वर्ष हमारे लिए कठिनाइयों और विसंगतियों का वर्ष रहा,हम अनेकों चुनौतियों से गुजरते हुए यहां तक पहुंचे हैं,शिक्षा, रोजगार,गरीबी उन्मूलन यह सब आजादी के बाद भारत का मुख्य मुद्दा रहा है
नेहरू जी ने क्या कहा था:
आपको बता दे कि नेहरू जी ने यूरोप के तीन सप्ताह के दौरे के बाद जब वापस लौटे तो उन्होंने रेडियो पर भाषण दिया जिसमें उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ये नहीं समझना चाहिए कि युद्ध से उसका या अथवा देश का भला होगा क्योंकि उस समय देश युद्ध से ही गुजरा हुआ था,आगे उन्होंने कहा कि युद्ध से न केवल असीम विनाश होगा बल्कि जो बचे रहेंगे उनकी आत्माओं को भी वह कुलशित कर देगा और दुनिया को इस युद्ध की महाविपत्ति से बचने के लिए भारतीय गणराज्य ने अपनी समस्त शक्ति से प्रयत्न किया है,आज स्थिति यह है भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे अच्छा लोकतंत्र माना जा रहा है हालांकि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन फिर भी हम जिस प्रगति के पथ पर हैं वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे
स्वर्णिम भारत की जो बात होती रहती है वह केवल एक विरासत तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें भारत के जहां हर एक नागरिक को शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के समान अवसर की बात होती है,स्वर्णिम भारत विकास का वह मार्ग है जो हमें एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की ओर ले जाता है,गणतंत्र का असली अर्थ सिर्फ परेड या उत्सव नहीं बल्कि हमारे संविधान की एक तरह से पूजा करना होता है,भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसलिए यह भारत के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि लोकतंत्र को जिंदा रखें अन्यथा आप बीते कुछ सालों में कुछ देशों का उदाहरण ले लीजिए जैसे नेपाल,पाकिस्तान,बांग्लादेश,श् रीलंका जहां लोकतंत्र की धज्जियां तक उड़ाई गई और आज वह देश पूरी तरीके से बर्बाद होने के कगार पर है तो इस बात पर आप गर्व कीजिए कि आप भारत में पैदा हुए जहां भारत का लोकतंत्र इतना मजबूत है कि कोई उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता है
