
क्या जर्मनी देगा भारत का साथ
वैसे तो भारत के रिश्ते काफी देश के साथ अच्छे हैं लेकिन जब से जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का पद संभालने के कुछ महीने के भीतरी एशिया की अपनी पहली यात्रा के रूप में भारत को ही चुनना पसंद किया इसका यह संदेश साफ है कि बर्लिन अब नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करना चाहता है आपको बता दे की अक्टूबर 2024 में जर्मन कैबिनेट ने एक पत्र जारी किया था जिसका नाम था फोकस ओं इंडिया जिसमें यह कहा गया कि भारत और जर्मनी के रिश्ते बहुत मजबूत हो सकते हैं,जर्मनी भारत के साथ सहयोग में भागीदारी निभा सकता है
जर्मनी की बदल रही है सोच:
आपको बता दे की बर्लिन की बदलती सोच उसके लिए अच्छे दिन की शुरुआत है इस सोच का कारण है कि द्विपक्षीय रिश्ते को नई ऊंचाइयां मिलेगी,भारत और जर्मनी दोनों देशों एक दूसरे के महत्व को समझने लगे हैं, दोनों देश चाहते हैं कि भारत के कुशल कामगारों को जर्मनी में काम के अवसर मिल सके और इसी राह पर दोनों देश अग्रसर है,भारत अपने संबंध हर देश से अच्छा रखना चाहता है,भारत के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है आतंकवाद जिसे मिटाने के लिए भारत के लोग,भारत की सरकार संकल्पित है
भारत के लिए यह रिश्ता महत्वपूर्ण:
आपको बता दे कि भारत के लिए यह रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण है,जर्मनी और भारत के बीच सुरक्षा,शिक्षा, आर्थिक व्यापार,विज्ञान और तकनीक ऐसे बहुत सारे क्षेत्र हैं जिनका इन दोनों देशों को फायदा मिल सकता है, मर्ज की यात्रा यह बताती है कि जर्मनी के रिश्ते भारत से फायदेमंद होने वाले हैं इससे आपसी संबंध और मजबूत होगा,आपको बता दे कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज बखूबी समझ रहे हैं कि उनकी भारत यात्रा कितनी महत्वपूर्ण है
जर्मनी की संख्या कम है:
आपको बता दे कि जर्मनी की आबादी अभी लगभग 8 9 करोड़ है,जिसमें 10 प्रतिशत तो हिस्सा विदेशी लोगों का है और जिनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है,आपको बता दे कि जर्मनी में प्रतिस्थापन दर एक प्रतिशत से भी नीचे चली गई है,इसका सीधा अर्थ यह है कि भविष्य में जर्मनी की आबादी घटती जाएगी और इससे जर्मनी के विकास पर असर पड़ेगा और सामाजिक सुरक्षा पर भी खतरा पड़ सकता है तो यह भारत को एक मौका है कि जर्मनी के साथ मिलकर इस दिक्कत को सॉल्व करें,जर्मनी में अवसरों का लाभ उठाने के लिए जरूरी है जर्मन भाषा में कुशलता पाई जाए क्योंकि अगर आप वहां के राज्य की भाषा का ज्ञान रखेंगे तो यह भारत के लिए और जर्मनी के लिए दोनों के लिए सराहनी रहेगा,भारत में अंग्रेजी के साथ-साथ जर्मन और फ्रांसीसी लोग सिखाते हैं आपको बता दें कि बर्लिन में अभी लगभग तीन लाख लोग भारतीय रहते हैं,कई लोग इसलिए वहां नहीं जा पाए क्योंकि उनको जर्मन नहीं आती है जबकि भाषाई दक्षता के साथ-साथ यदि आपके पास विज्ञान की अगर डिग्री है तो वहां नौकरी पाना आसान प्रक्रिया है
दोनों देश डिग्री को मान्यता देते हैं:
आपको बता दे कि पहले यह दोनों देश डिग्री को मानते नहीं देते थे लेकिन अब इस मामले में बातचीत आगे बढ़ चुकी है और यही कारण है कि दोनों देश चाहते हैं कि लोग एक दूसरे की भाषा कौशल को सीखें जर्मन चांसलर की यात्रा में सहविकास और सह उत्पादन पर भी सहमति बनी है,आपको बता दें कि बर्लिन अब नई दिल्ली के साथ रक्षा सौदा कर रहा है जो हमारे लिए बहुत अच्छी बात है,मर्ज के दौर में पनडुब्बियों से सजा निर्माण पर हुआ समझौता भी एक बहुत बड़ा कदम है, भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा महिया करने वाला महत्वपूर्ण देश है,हिंद महासागर में समुद्री डकैती और ऐसे ही दूसरे खतरों के खिलाफ भी नई दिल्ली सुरक्षा की गारंटी देता है
भारत और जर्मनी की चुनौतियां कम नहीं है:
भले ही भारत और जर्मनी एक दूसरे से पक्की दोस्ती करना चाहते हैं लेकिन दोनों देशों के बीच चुनौतियां कम नहीं है,भले ही भारत जर्मनी के बीच 50 अरब डॉलर के का सालाना कारोबार होता है लेकिन चीन के मुकाबले ये चार गुना कम है,जर्मनी का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार अमेरिका था पर बीते साल चीन ने उससे यह जिम्मेदारी छीन ली आपको बता दे की साल 2025 के शुरुआती 10 से 12 महीना में 173 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार दोनों देशों के बीच हुआ था जो 2024 से 4% अधिक था और यह बताता है कि हमें अभी बहुत कुछ करना बाकी है,ऐसे में मर्ज का दौरा एक नए साल में अच्छी शुरुआत लेकर आ सकता है
प्रधानमंत्री की यात्रा पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है हर साल प्रधानमंत्री कई देशों की यात्रा करके, भारत का संबंध मजबूत रखना चाहते हैं अब देखते हैं कि जर्मनी के साथ भारत का संबंध कैसा रहता है
