
यूजीसी का नियम अब पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में भारी विरोध हो रहा है,जनरल कैटेगरी के छात्र और अभिभावक इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं,उनका कहना है कि इक्विटी कमेटी में सामान्य लोगों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है और जो झूठी शिकायतें करने वालों पर भी कोई दंड का प्रावधान नहीं है,आप यूजीसी के इसी नए नियम को लेकर पूरे देश भर में अच्छा खासा विरोध हो रहा है
यूजीसी के नए नियम का विरोध:
यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम का विरोध जनरल कैटेगरी के छात्र और अभिभावक कर रहे हैं,आपको बता दे कि यह विरोध उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लाने के नाम पर लागू किए गए नए कानून का है,आपको बता दे की उच्च शिक्षण संस्थान बुद्धिमता योग्यता का केंद्र माना जाता है,जहां पर छात्रों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है, लेकिन यूजीसी के नए नियम के वजह से समानता में आई गड़बड़ी को लेकर छात्र विरोध कर रहे है,आपको बता दे कि यूजीसी प्रमोशन आफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 लागू किया है और आपको बता दे कि इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग,आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग दिव्यांग छात्रों शिक्षक को कर्मचारी के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है,और इसके लिए 9 सदस्य वाली एक समिति का प्रावधान भी किया गया है,आपको बता दे कि इस समिति में तीन प्रोफेसर एक कर्मचारी दो सामान्य नागरिक,और दो विशेष रूप से आमंत्रित छात्र और एक कोऑर्डिनेटर शामिल होंगे
सामान्य वर्गों के लिए कोई जगह नहीं:
आपको बता दे कि जो यूजीसी के नए नियम आए हैं उसमें अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शिक्षक दिव्यांग छात्रों कर्मचारियों के लिए नया कानून लागू हुआ है लेकिन जनरल कैटेगरी वालों के लिए कोई प्रावधान नहीं है,इसी का जमकर विरोध हो रहा है,आलोचना करने वालों का कहना है कि समान वर्ग के लिए कोई प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है जबकि भेदभाव अगर कहीं सबसे अधिक है तो इसी वर्ग में है,इसलिए सरकार इस कानून के तहत सामान्य वर्गों का अधिकार छीनना चाहती है,आलोचकों का यह भी कहना है कि अगर कोई भी झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ भी इस कानून में दंड का प्रावधान नहीं है
यूजीसी का क्या कहना है नए कानून पर:
यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के हिसाब से यह नियम उच्च शिक्षण संस्थान मे समानता की भावना को मजबूत करेगा,लेकिन जो वर्ग इस कानून का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि नये नियम यह सोचकर बनाया गया है कि एक वर्ग हमेशा शोषीत रहेगा और दूसरा वर्ग हमेशा शोषक,और उन्हें डर है कि समान वर्ग के छात्र और शिक्षक को किसी भी झूठे मामले में फसाया जा सकता है और इस मामले में कोई सुनवाई भी नहीं होगी क्योंकि झूठी शिकायत करने वालों पर किसी प्रकार का दंड का कोई प्रावधान नहीं है
यूजीसी ने क्या आंकड़े पेश की है:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का कहना है की जातिगत भेदभाव की शिकायत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, यूजीसी के 2024 के रिपोर्ट के अनुसार 2019 और 2020 में 173 भेदभाव की शिकायतें दर्ज हुई थी वहीं 2023 और 2024 में यह शिकायत बढ़कर 380 हो गई,यानी हमेशा दिन प्रतिदिन भेदभाव की शिकायतों में बढ़ोतरी होती जा रही है,वही विरोध करने वालों का कहना है कि इतनी कम शिकायत हो में सामान्य वर्ग को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है,आपको बता दे की 2019 से 2023 के बीच लगभग 60,000 से ऊपर छात्रों ने आत्महत्या कर ली,आलोचकों का कहना है सिस्टम को छात्रों के मानसिक तनाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ना कि नए नियम कानून बनाने चाहिए, और यही कारण है की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है,समान वर्ग का गुस्सा सीधे केंद्र सरकार पर फोड़ा जा रहा है
भारतीय जनता पार्टी में भी हो रहा है इसका विरोध:
आपको बता दे कि यूजीसी के नए नियम का केवल सामान्य वर्ग विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी इसका विरोध हो रहा है और इसी के चलते 11 पदाधिकारी ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया,आपको बता दे की नोएडा के भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा कि यह सामान्य वर्ग के लिए जो कानून है वह काला कानून है,वही बीजेपी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय सिंह ने भी यूजीसी के नए नियम का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया,अब देखना है कि यूजीसी का यह जो नया नियम है उसे समान वर्ग के नागरिकों को क्या नुकसान झेलना पड़ेगा
