वक्फ पर सुप्रीम कोर्ट में क्या क्या दलीलें दोनो पक्षों के तरफ से रखी गई?

वक्फ कानून पर पहले दिन यानी 16 अप्रैल की सुनवाई पूरी हो गई,सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना,जस्टिस संजय कुमार,और जस्टिस के वी विश्वनाथ की बेंच ने केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष वक्फ कानून के समर्थन में रखा,वही मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलील रखी,वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाएं की तरफ से वकील कपिल सिब्बल,अभिषेक मनु सिंघवी,राजीव धवन ने अपनी दलीलें रखी,आप को बता दे की सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ 73 याचिकाएं दाखिल की गई,सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बताया की दोनो की सुनवाई सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायलय ने कोई आदेश जारी नही किया,गुरुवार 2 बजे (17 अप्रैल)फिर सुप्रीम कोर्ट फिर से सुनवाई करेगी,
सुप्रीम कोर्ट ने सीधा सवाल केंद्र सरकार से पूछा की वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य हो सकते है क्या हिंदू बोर्ड में कोई मुसलमान सदस्य हो सकते है,,विपक्ष का कहना है की ये कौन सा कानून है की मुस्लिम बोर्ड में हिंदू सदस्य होंगे और हिंदू बोर्ड में कोई भी मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे,इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कुछ खास जवाब नही दे पाए,विपक्ष का कहना है की वक्फ की संपत्ति का मामला धार्मिक मामला है न की कोई संपत्ति का मामला है,लेकिन सत्ता पक्ष का कहना है की वक्फ की संपत्ति का मामला धार्मिक मामला नहीं है सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा है कि “एक बात बहुत परेशान करने वाली है,वह है हिंसा,यह मामला कोर्ट में है,हम इस पर फैसला करेंगे” मुख्य न्यायाधीश का कहना है की मामला जब सुप्रीम कोर्ट में है तो फिर हिंसा क्यों हो रही है,इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जेनरास्ल तुषार मेहता का कहना है की वक्फ कानून के विरोध में हिंसा दबाव बनाने के लिए कराई जा रही है,http://news24hourslatest.in
कपिल सिब्बल ने कहा है की “हम उस प्रावधान को चुनौती देते है जिसमे कहा गया है की वक्फ केवल मुसलमान ही बना सकते है,सिब्बल का कहना है वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाया गया है,अगर वक्फ का रजिस्ट्रेशन नही होगा तो वो जेल जाएगा,
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की “अगर कोई पुरानी मस्जिद है तो यानी 16 वी ,15 वी शताब्दी की मस्जिदें हैं जिनके पास रजिस्ट्रेशन सेल डिड नही होगी,सजीव खन्ना ने केंद्र से पूछा है की ऐसी संपत्ति को कैसे रजिस्टर करेंगे,उनके पास क्या दस्तावेज होंगे,इसका क्या प्रावधान होंगे,
कपिल सिब्बल ने फिर अपनी दलील रखी की केवल मुस्लिम ही बोर्ड का हिस्सा हो सकते है,अब हिंदू भी इसका हिस्सा होंगे,ये अधिकार का हनन है ,कपिल सिब्बल ने आर्टिकल 26 का हवाला देते हुए कहा है की सभी मेंबर मुस्लिम होंगे,अब कानून लागू होने के बाद बिना वक्फ डिड के कोई वक्फ नही बनाया जा सकता है,
इस पर CJI संजीव खन्ना का कहना है इसमें क्या समस्या है,जस्टिस कुमार का कहना है की “हमे उदाहरण दीजिए”,क्या तिरुपति बोर्ड में भी गैर हिंदू है ,सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है की क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है,हिंदुओं के दान कानून के मुताबिक कोई भी बाहरी बोर्ड का हिस्सा नहीं हो सकता,वक्फ प्रापर्टी है या नही,इसका फैसला अदालत को क्यों नहीं करने देते,केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है की कोर्ट चाहे रोज सुनवाई करे हम तैयार है,कोर्ट का केंद्र को कहना है की ,जो भी संपत्तियां न्यायालय द्वारा वक्फ घोषित की गई हैं, उन्हें गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा, चाहे वह वक्फ बाय यूजर हो या नहीं,बहुत सारे सवालों के जवाब में केंद्र की तरफ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कोई खास जवाब नही आया,तुषार मेहता दोनो सदनों यानी राज्यसभा और लोकसभा में इस बिल को पास करने की बात करने लगे
अब देखना है की 17 अप्रैल को फिर से सुनवाई ने सुप्रीम कोर्ट क्या कहती है
आज होने वाला है सुप्रीम कोर्ट का वक्फ कानून पर सुनवाई ,तीन जजों वाली पीठ सुनवाई करेगी
