अंबेडकर की मूर्ति पर भिड़े ग्रामीण और पुलिस
अंबेडकर की मूर्ति पर भिड़े ग्रामीण और पुलिस

लखनऊ का ग्रामीण इलाका है महिगंवा थाना क्षेत्र का खातरी गांव,बताया जा रहा है कि गांव वालों ने आपसी सहयोग से,ग्राम प्रधान के सहयोग से ,ग्राम समाज की जमीन पर दो तीन दिन पहले यानि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती से पहले संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगवाई थी, दो-तीन दिन बाद जब पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना मिलती है तो वह अपने दल बल के साथ मूर्ति को हटाने के लिए उस इलाके में पहुंच जाते हैं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि मूर्ति लगवाने के लिए किसी ग्रामीण ने कोई परमिशन नहीं ली ,जबकि वहां के ग्रामीण लोगों का कहना है कि पिछले तीन सालों से पुलिस प्रशासन को सरकार को अपनी तरफ से चिट्ठी लिख के कितनी बार हम लोगों ने सौंपा है कि यहां बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगानी है, इसी विवाद को लेकर पुलिस वाले और ग्रामीणों में बीच झड़प हो गया,बताए जा रहा है कि पुलिस वाले भी इसमें जख्मी हो गए और ग्रामीणों को भी चोट आई, गांव वालों का कहना है शासन ने उनके कपड़े फाड़ दिए, गांव वालों का कहना जब मूर्ति लगी तब कोई पुलिस प्रशासन यहां नहीं आया था किसी ने कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई थी,
वहां के एक ग्रामीण का कहना है SDM साहब के कहने पर ही मूर्ति रखी गयी है। ग्रामीण का कहना है की SDM साहब ने कहा है मै अनुमति लिखित तौर पर नहीं दे सकता हूँ क्योंकि मेरा प्रमोशन होने वाला है वो रुक जायेगा,मै बस मौखिक रूप से अनुमति देता हूँ की आप लोग मूर्ति इस्थापित करो
पुलिस वालों का क्या कहना है
पुलिस वालों का कहना है कि यह विवाद गांव के दो पक्षों का मामला है, यह दो पक्षों के बीच मूर्ति लगाने के लिए विवाद हो रहा है,गांव के एक पक्ष में ग्राम समाज की जमीन पर प्राथमिक स्कूल के सामने 3 दिन पहले अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी इसको लेकर गांव के दूसरे पक्ष ने विरोध करना शुरु कर दिया जब बात आगे बढ़ी तो किसी ने पुलिस को सूचना दे दी मौके पर पुलिस पहुंची तब गांव वालों और पुलिस वालों के बीच झड़प हो गई, विवाद बढ़ता गया,इस झड़प में महिला इंस्पेक्टर मेनका सिंह के अलावा और भी दरोगा है कॉन्स्टेबल के साथ-साथ वह के ग्रामीण दोनो घायल हुए,मामला बढ़ता दिख वहां के DM सतीश चंद्र त्रिपाठी ,थानों की पुलिस और PAC वालों को तैनात किया गया, वहां की एक ग्रामीण मुन्नी देवी का कहना है कि पुलिस ने जमकर उसे पीटा ,सबके कपड़े फाड़े और यहाँ तक कि ग्राम प्रधान को भी अगवा करके ले गए, समाजिक कार्यकर्ता राजकुमार बौद्ध ने कहा कि जब बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाई जा रही थी तो सबकी मौजूदगी वहां थी,तब किसी ने कुछ नहीं कहा, उसने ये भी आस्वस्त किया की SDM को भी इस संबंध में पूर्व सूचना दी गई थी और मूर्ति लगाने के समय किसी ने कोई विरोध नहीं किया, उनका कहना है कि 12 अप्रैल की दोपहर में अचानक पुलिस के दो कर्मचारी आए और उन्होंने कहा कि अंबेडकर की प्रतिमा बिना अनुमति के लगाई गई इसलिए इसे यहां से हटाया जाए ,इस पर हम लोगों ने जमकर विरोध किया, आपको बता दें कि अनुसूची जाति बहुल गांव में गांव के प्रधान जो गांव के प्रतिनिधि है उनके सहयोग से मूर्ति की स्थापना की जा रही थी जब किसी ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई तो किस आधार पर पुलिस गांव में आयी,ये वहां के लोगों का कहना है,
अखिलेश यादव का शासन प्रशासन पर हमला
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्र और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा है,”लखनऊ में बाबासाहेब की मूर्ति को हटाने का जो दुस्साहस प्रशासन कर रहा है, उसके पीछे शासन का जो दबाओ है ,उसे पीडीए समाज अच्छी तरह समझ रहा है, किसी के जाति वर्चस्व का अहंकार कभी गोरखपुर मूर्ति चबूतरा हटाने का काम करवाता है,तो कभी लखनऊ में अपने राजनीतिक प्रभुत्व के दंभ को साबित करने के लिए महापुरुषों की मूर्ति हटाने का कुकृत्य करवाता है, जनाकांक्षा जन आक्रोश को जन्म देती है, PDA कहे आज का ,नहीं चाहिए भाजपा
लखनऊ मे हुए इस घटना के बाद स्थानीय bjp विधायक योगेश शुक्ला ने जल्द बाबा साहब की मूर्ति के लिए परमिशन दिलवाने का दावा किया है, विधायक के इस बयान के बाद ग्रामीणों में आक्रोश थोड़ा कम हुआ, गांव वालों का कहना है कि जब तक परमिशन नहीं मिली जाता तब तक बाबा साहब की मूर्ति को कपड़े से ढक्कर रखा जाएगा
मायावती के भतीजे आकाश आनंद का बसपा में घर वापसी
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुक्यमंत्री अखिलेश यादव ने विनय शंकर तिवारी बड़े भाई भीष्म शंकर से मुलाकात की,
