क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है ?

बीजेपी के झारखंड के गोड्डा सीट से सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर ही बयान दे डाला
भारत में अक्सर ऐसा देखा गया है की सुप्रीम कोर्ट को लेकर मुसलसल बयान आते रहते है,सुप्रीम कोर्ट ने अभी वक्फ पर कोई आदेश जारी नही किया है कोई झारखंड के बीजेपी सांसद ने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठा दिए,उनका कहना है यदि कानून सुप्रीम कोर्ट बनाएगा तो संसद बंद कर देना चाहिए,निशिकांत दुबे के इस बयान से पहले अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री किरेन रिजिजू का कहना था की उन्हें पूरा भरोसा है की सुप्रीम कोर्ट विधाई मामले में दखल नहीं देगा,हमे एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए अगर कल सरकार न्यायपालिका में दखल देती है तो अच्छा नहीं होगा. शक्तियों का बंटवारा अच्छी तरह से परिभाषित है. किरण रिजिजू का कहना है वक्फ अधिनियम को लागू करने से इनकार करना असंवैधानिक और अस्वीकार्य है,क्या इनके बयानों से सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा भंग नहीं होती,इनके बयानों से यही लगता हैं की जो सरकार चाहेगी वो ही सुप्रीम कोर्ट करेगा,भारत का सुप्रीम कोर्ट भारत के संविधान के तहत एक सर्वोच्च न्यायिक निकाय है,इसकी अपनी मर्यादा है,सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होता है ,सुप्रीम कोर्ट का वक्फ कानून के बयान पर भाजपा के नेता इतने बौखलाए हुए क्यों हैं,इसका पता नही ,किरण रिजिजू का कहना है की व्यक्ति संवैधानिक पद पर रहते हुए अगर असंवैधानिक बाते करता है जैसे की भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम का पालन नहीं करना,इसी बिलकुल स्वीकार्य नहीं करना चाहिए,उन्होंने कहा कि यदि कोई उनका उल्लंघन करता है, तो “उन चुनौतियों से निपटने के उपाय मौजूद हैं,राज्य सरकारों को इस कानून को लागू करना चाहिए,क्योंकि ये राज्य का मसला भी है,जो मुख्यमंत्री इसका विरोध। कर रहे है वो संविधान का उलंघन कर रहे हैं
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने कहा, “कानून पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है.”उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए कहा है की हमने सरोच्च न्यायालय से सात दिन का समय अपना जवाब देने के लिएhttp://news24hourslatest.in
भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने क्या कहा था,जानिए पूरा मामला
दरअसल ये मामला तमिलनाडु सरकार बनाम तमिलनाडु राज्यपाल का है ,8 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा की राज्यपाल की तरफ से भेजे गए बिल को राष्ट्रपति की तरफ से तीन महीने में फैसला देना होगा ,राज्यपाल के पास राज्यविधानसभा की तरफ से भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति के पास,वीटो का अधिकार नहीं है,उनकी बिल की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है ,वे किसी बिल को अनिश्चितकाल के लिए रोक नहीं सकते,अदालत ने कहा है कि विधेयक को पारित करने के लिए एक महीने का समय पर्याप्त है, भारत के उप राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय पर अपनी नाराजगी जाहिर की है,दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने देश के राष्ट्रपति और राज्यपालों को बिलों की समय सीमा तय होनी चाहिए और उसकी मंजूरी भी होनी चाहिए नही तो उनको बताना पड़ेगा की क्यों अधिक बिलों की क्यों अटकाया जा रहा है ,सुप्रीम कोर्ट के इस बयान पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है की अब देश की अदालतें तय करेंगी की राष्ट्रपति को क्या करना चाहिए क्या नही करना चाहिए और कोर्ट सुपर संसद की तरह काम कर रही है, उपराष्ट्रपति ने कहा है की अनुच्छेद 142 (अगर संसद ने अभी तक कोई नियम नहीं बनाया है तो ये राष्ट्रपति को तय करना होता है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश या फ़ैसला कैसा लागू होगा) के तहत मिला अधिकार अब न्यूक्लियर मिसाइल बन चुका है जो चौबीस घंटे सातों दिन उपलब्ध है,उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी का कहना है कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार है की कोई भी संवैधानिक पदाधिकारी अपनी सीमाएं पार करता है तो उसे रोका जाए
भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी जिसमे न्यायाधीश कानून बनाएंगे ,कार्यपालिका का काम स्वयं संभालेंगे और एक सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे
उपराष्ट्रपति का ये बयान ऐसा लग रहा है जैसे धनखड़ खुद बीजेपी के प्रवक्ता है, उपराष्ट्पति एक संवैधानिक पद है इसकी अपनी मर्याद है,उपराष्ट्रपति का ये बयान उनको शोभा नही देता,सोशल मीडिया पर लोग उपराष्टपति के बयान पर जमकर आलोचना हो रही है,लोगों का कहना है कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है?
आपको बता दे की अभी सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर कोई आदेश जारी नही किया फिर बाजी इन बीजेपी के नेताओं का बयान लगातार आ रहा है,और इस कोई एक्शन भी नही लिया जा रहा है,वही बात करे की कोई और अगर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाता तो वो अब तक उस पर एक्शन ले लिया जाता ,
सुप्रीम कोर्ट की आलोचना पर भारत की मीडिया भी चुप है,क्या कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नही किया सकता,क्या सुप्रीम कोर्ट सरकार से ऊपर है,ऐसा बहुत बार देखा गया है की सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बीजेपी के नेता हास्यास्पद कहते है
