Emergency:आपातकाल पर बवाल

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में संस्कृति मंत्रालय के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, अम्बेडकर इंटरनेश्लन सेंटर और बहुभाषी संवाद समिति ‘हिन्दुस्थान समाचार’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने अजीबो गरीब बयान दे डाला,उन्होंने कहा की आपातकाल के समय संविधान में “समाजवादी और धर्मनिरपेक्षता”जैसे शब्द जोड़े गए थे उन्हें संविधान की प्रस्तावना से हटाने की मांग की है,उन्होंने कहा की ये मूल प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे बल्कि बाद में जोड़े गए थे,उन्होंने आपातकाल को देश पर अब तक का सबसे बड़ा आघात बताया,कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा की 1975 में देश में आपातकाल लगाने वालों ने अब तक देश से माफी नहीं मांगीhttp://news24hourslatest.in
जब देश में आपातकाल लगाया गया तब लाखों लोगों को जेल में बंद कर दिया गया,उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ,प्रेस की स्वतंत्रता को भी ताड़ ताड़ कर दिया गया,लाखों लोगों को नसबंदी के लिए मजबूर किया गया
‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी कब संविधान में जोड़े गए थे:
“धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी और अखंडता जैसे शब्द संविधान के 42वे संशोधन के बाद जोड़ा गया था,आपको बता दे की ये शब्द 1976 में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी,इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा ये अधिनियमित किया गया था
आपातकाल को बीजेपी ने कैसे याद किया:
आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर देश भर में बीजेपी की सरकार ने एक काला अध्याय के रूप में मनाया और आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर एक प्रस्ताव पास किया गया।बीजेपी ने अपने मुख्यालय पर अलग अलग तरीके से इसे प्रदर्शित किया,इसके बाद आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि के रूप में दो मिनट का मौन रखा गया।बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने आपातकाल को एक पोस्टर प्रदर्शनी के जरिए प्रदर्शित किया,बीजेपी ने इस मौके पर कहा की ये तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तानाशाही का प्रतीक है आपातकाल.लोगों को उनसे उनकी आजादी भी छीन ली गई
पीएम मोदी के क्या लिखा आपातकाल पर:
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आपातकाल पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा की इस दिन लोकतंत्र को कैद किया गया,लोगों से उनकी आजादी छीन ली गई थी,प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया गया था,अदालतों को भी नही छोड़ा गया,पीएम मोदी ने आगे कहा की इस दिन को देश काला अध्याय के रूप में मनाता है,आगे पीएम मोदी ने आपातकाल के समय मैं आरएसएस का युवा प्रचारक था,जो आंदोलन आपातकाल के विरोध में थे उससे बहुत कुछ मैने सीखा
गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा:
नई दिल्ली स्थित स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने आपातकाल पर भाषण देते हुए कहा की ये संविधान का हत्या दिवस है,उन्होंने कहा की जिस परिवारवाद को जमाने के लिए इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था उसे मोदी जी 2014 में समाप्त कर दिया,आगे भाषण देते हुए उन्होंने कहा की आपातकाल लगाने का कारण इंदिरा जी ने कहा की देश को खतरा है इसलिए आपातकाल लगाया है,लेकिन कारण तो कुछ और ही था,दरअसल इंदिरा जी की कुर्सी खतरे में थी और विपक्षी दल उन पर हावी थे इसलिए कही उनकी कुर्सी चली न जाए इसलिए उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी,अमित शाह ने कहा की इस दिन को सभी को याद रखना चाहिए ताकि कोई भी अपनी तानाशाही सोच को भारत के संविधान पर थोप नही सकता,उन्होंने आगे कहा ये घटना इंदिरा गांधी की सोच और नजरिया को दर्शाता है
आपातकाल क्यों लगाया गया:
बात है सन 1969 की जब देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार थी,इंदिरा गांधी ने 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण कर डाला जिससे की ये बैंक सरकार के अधीन हो गई और प्राइवेट बैंको का वर्चस्व खत्म सा हो गया था और प्रिवी पर्स खत्म करने जैसे फैसलों से इंदिरा गांधी का वर्चस्व गरीबों में और बढ़ गया,उस समय इंदिरा गांधी ने नारा दिया था “गरीबी हटाओ”,और जब देश में 1971 ने चुनाव हुआ तो इंदिरा गांधी रायबरेली से एक लाख वोट से जीती और देश की प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित हूई,लेकिन उनके खिलाफ जो चुनाव लड़े थे राज नारायण जो की एक प्रखर समाजवादी नेता थे,वो इंदिरा गांधी के इस जीत के खिलाफ थे और कोर्ट चले गए,उन्होंने अपने याचिका में इंदिरा गांधी पर आरोप लगाया की इंदिरा गांधी ने सरकारी मशीनरी,सरकारी संसाधन का उपयोग किया है और भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया और उस समय इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा ने माना की इंदिरा गांधी ने सरकारी मशीनरी का दुर्पयोग किया है और इंदिरा गांधी के इस कृत्य के खिलाफ कोर्ट ने उन्हें आगामी ६ साल तक कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी,उसके बाद इंदिरा गांधी ने इस खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने चुनती दे दी और सुप्रीम ने उन्हें प्रधानमंत्री तो बने रहने दिया लेकिन मतदान से वंचित कर दिया,और इसी बीच बिहार के लाल जय प्रकाश नारायण ने छात्रों के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन करते हुए इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया,बस यब यही से सब कुछ बदल जाता है,इंदिरा गांधी ने इसी रैली के बाद देश में आपातकाल लगाने का निर्णय कर लिया था
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