Bihar News :आखिर बिहार अब तक तरक्की क्यों नहीं कर पाया?

हर चुनाव में अलग-अलग दावे किए जाते हैं जनता को लुभाने के लिए, कोई रोजगार के दावे करता है कि वह रोजगार देंगे,कोई भ्रष्टाचार मिटाने की दावे करता है,कोई सड़क बिजली पानी का दावा करता है लेकिन होता कुछ नहीं है धरातल पर सब शून्य है,आखिर कारण क्या है कि बिहार अभी भी पिछड़े राज्यों में गिना जाता है,आखिर बिहार की तरक्की अब तक क्यों नहीं हुई?http://news24hourslatest.in
बिहार: आपको बता दे कि बिहार राज्य की स्थापना 22 मार्च 1912 को हुई थी और 22 मार्च को ही बिहार दिवस के रूप में मनाया जाता है,आजादी के बाद अखंड बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे श्री कृष्णा सिंह जी जिन्हें “बिहार केसरी” के नाम से भी जाना जाता है जो कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के थे, उनके 10 वर्षों के शासनकाल में बिहार में उद्योग,कृषि,शिक्षा,स्वास्थ्य,सामाजिक क्षेत्र में कई सारे काम हुए, उनके कार्यकाल में तेल रिफाइनरी,खाद कारखाना यह सब बड़े स्तरों पर था, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट,बोकारो एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड (गड़हरा) उस समय बिहार अखंड बिहार कहा जाता था, उसके बाद बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के थे फिर विनोद आनंद झा कृष्ण बल्लभ सहाय और सब ने मिलकर बिहार पर राज किया उसके बाद आए लालू प्रसाद यादव 1990 में जनता दल की तरफ से, ऐसा कहा जाता है कि लालू के राज में गुंडागर्दी बहुत बढ़ गई थी शहाबुद्दीन जो सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर था वह भी इस समय था चोरी,डकैती,अपहरण,लूट,भ्रष्टाचार यह सब चरम सीमा पर था, जबकि लालू प्रसाद यादव का दावा है कि उन्होंने बिहार को बिहार बना दिया, उसके बाद आई लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी 1997 में, लोग कहते हैं कि उनके शासनकाल में भी कोई खास बदलाव बिहार में नहीं आया, उसके बाद आए बिहार में नीतीश कुमार जो अभी तक मुख्यमंत्री पद पर विराजित है, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू पिछले चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के साथ थी अब नीतीश कुमार की पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में है
सवाल क्या है:
2023 और 24 में बिहार का कुल बजट 2 ,38 , 327 करोड रुपए अनुमानित था, और नए वर्ष 2025 -26 के लिए 3,17 ,000 करोड रुपए का बजट अनुमानित किया गया है, इतना पैसा होने के बावजूद भी आखिर बिहार को सबसे पिछड़ा राज्य क्यों कहा जाता है, नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बिहार को 100 में से महेज 52 नंबर मिले हैं जो देश के राज्यों में सबसे कम है शिक्षा के मामले में, इसमें दोष सारी पार्टियों का है केवल एक पार्टी को हम आरोपित नहीं कर सकते क्योंकि सारी पार्टियों ने बिहार पर राज किया है, अभी तक बिहार में शिक्षा नेटवर्क गरीबी बेरोजगारी यह सब चरम सीमा पर है, बिहार में कुल 45000 से ऊपर गांव है, और रोजगार के नाम पर बिहार के युवा पलायन करते हैं, बिहार में अभी भी 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे लगभग 42% कुपोषण के शिकार है, बिहार की कुल साक्षरता दर 61% है, जिसमें पुरुष का 71% और महिलाओं का 51%
नेता सब भूल जाते हैं:
बिहार में अक्टूबर नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं बिहार प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने एनडीए के काम पर जमकर हमला बोला है, उन्होंने कहा है कि बेरोजगारी चरम सीमा पर है गरीबी चरम सीमा पर है भुखमरी चरम सीमा पर है लेकिन वह भूल गए कि उनके पिताजी भी और उनकी माता जी भी एक वक्त था जब बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं तब का आंकड़ा तेजस्वी यादव को नहीं पता आखिर ऐसा क्यों,उन्हें अपने आंकड़े भी याद रखना चाहिए कि उस समय क्या हाल था बिहार का, बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी लालू के साथ पार्टी में थे और आज एनडीए के साथ हैं,तेजस्वी यादव का कहना है कि नितीश कुमार पलटू चाचा है, नीतीश कुमार को खुद यह सोचना चाहिए कि उन्होंने बिहार के लिए क्या किया, आखिर बिहार पिछड़े राज्यों में क्यों आ रहा है और सबसे बड़ी बात होती है शिक्षा की, युवा शिक्षा के लिए बाहर क्यों जा रहे हैं,रोजगार के लिए बाहर क्यों जा रहे हैं,इस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है चाहे वह वर्तमान की सरकार हो चाहे वह लालू की सरकार थी, क्या केवल सत्ता मिलने से ही विकास होता है इस बात को जनता को समझना चाहिए, आखिर वह किस मुद्दे पर वोट दे रहे हैं क्यों नेताओं के लोक लुभावन वादे पर फिसल जाते हैं या फिर उसके बारे में सोचते क्यों नहीं है,खासकर यह बात में युवाओं को कह रहा हूं, आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं जहां लोग मंगल पर जा रहे हैं, जमाना कितना आगे पहुंच गया है, फिर भी बिहार के लोग अभी बहुत पीछे हैं कारण सिर्फ राजनीति, चुनाव आते ही लोक लुभावन वादे किए जाते हैं और जनता उसी वादों में फिसल जाती है जैसे पानी में नमक घूल जाता है वैसे जनता भी खुल जाती है जनता को यह सोचना चाहिए कि पिछली सरकारों ने या वर्तमान सरकारों ने जो जो वादे किए अपनी मेनिफेस्टो में क्या वह पूरा किया या नहीं अगर नहीं किया तो उसे अपदस्थ करें और और दूसरा विकल्प चुने, अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि अगर फिर भी आप सोच समझ कर निर्णय नहीं लेते हैं तो आने वाला भविष्य भी आपका अंधकार पूर्ण होगा
