अशोक स्तंभ से परेशानी,और नोटों से लगाव:हजरतबल दरगाह मामला

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में हजरतबल दरगाह मे ईद-ए- मिलाद के मौके पर अशोक स्तंभ जड़ित एक शिलापट्ट थी जिसे कुछ लोगों ने पत्थरों से तोड़ दिया,और वक़्फ़ बोर्ड के खिलाफ खूब नारेबाजी की,माना जा रहा है कि यह दरगाह मुसलमान के लिए बेहद पवित्र है,और यहां मोहम्मद पैगंबर की निशानियां भी रखी हुई हैhttp://news24hourslatest.in
वक़्फ़ बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन:
हजरतबल दरगाह को वक़्फ़ बोर्ड ने करोड़ों रुपए लगाकर पुनः निर्माण कराया,और उद्घाटन पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ बनाया गया था,ईद- ए- मिलाद के मौके पर कुछ लोगों ने अशोक स्तंभ को पत्थर से तोड़ दिया,यह कहकर की धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह नहीं होने चाहिए,और उसके बाद वक़्फ़ बोर्ड के खिलाफ खूब नारेबाजी और प्रदर्शन भी किया, और बात यहां तक नहीं रुकी पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी पत्थर फेका और अशोक स्तंभ को तोड़ा
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जम्मू कश्मीर के वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन ने क्या कहा:
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि यह संविधान पर चोट पहुंचाने वाला काम है, आगे उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुआ तो वह भूख हड़ताल भी कर सकती हैं,उन्होंने आगे कहा कि अगर अशोक स्तंभ से इतनी ही परेशानी है तो नोट को भी जेब में रखकर ना घूमें,नोट का इस्तेमाल न करें क्योंकि उसमें भी अशोक स्तंभ छपा हुआ है,आगे उन्होंने कहा कि जब भी कोई विधायक दरगाह जाए तो उनकी तलाशी ली जाए ताकि जेब में कोई नोट ना पकड़ा जाए,जिन लोगों को राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ से समस्या है तो दरगाह जाते वक़्फ़ राष्ट्रीय प्रतीक वाले नोट ना ले जाएं
हजरतबल में रखा है मोहम्मद पैगंबर का बाल:
ऐसा माना जाता है की हजरतबल में मोहम्मद पैगंबर का बाल सुरक्षित रखा गया है,इस बाल को मुई-ए-मुकद्दस कहा जाता है। यहां यह 1699 ईसवीं में लाया गया था। इसे विशेष अवसरों (जैसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) पर आम जनता को दिखाया जाता है,ऐसा कहा जाता है कि 1634 मे मुगल शहंशाह शाहजहां के बेटे दाराशिकोह ने इसको मस्जिद के रूप में बनवाया था,और लोग इसको पवित्र स्थल के रूप में मानते हैं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा:
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैं कभी धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल होते नहीं देखा है,आगे उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उस दरगाह पर वक़्फ़ द्वारा राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी
विपक्ष के नेताओं का क्या कहना है:
इस मामले को नेशनल कांफ्रेंस और विपक्षी दलों ने धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया,PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर उकसाया जा रहा है,अन्य कई नेताओं और पार्टियों ने घटना की घोर निंदा की है और कड़ी कार्रवाई की वकालत की है।
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने क्या कहा:
मामले को देखते हुए नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर वहां अशोक चिन्ह वाली पत्रिका नहीं लगाई होती तो इतना बवाल ही नहीं हुआ रहता,उन्होंने कहा कि हजरतबल दरगाह का निर्माण लोगों के सौजन्य से हुआ है किसी के विशेष अनुग्रह पर नहीं,तोड़फोड़ पर उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि जो उन्होंने किया गलत किया,कोई भी काम सावधानी से करना चाहिए बिना लड़ाई झगड़े के
राष्ट्रीय प्रतीक स्तंभ का अपमान करने की सजा भी है:
भारत में अगर कोई भी व्यक्ति हमारे राष्ट्रीय प्रतिको का अपमान करता है तो उसपर 3 साल तक की सजा का प्रावधान भी है और जुर्माना भी हो सकता है
अक्सर ऐसा देखा गया है कि भारत विवादों से घिरा हुआ देश है आए दिन कोई न कोई विवाद होते रहते हैं,अब हमने देखा कि जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में हजरतबल दरगाह के पुनः निर्माण के बाद जो पट्टी का लगाई गई थी उसमें अशोक स्तंभ था और लोगों ने तोड़ दिया,यह कह गए की धार्मिक भावनाओं की आहट होती है,अगर किसी धार्मिक स्थल पर राष्ट्रीय चिन्ह लग जाता है तो उसे तोड़ना कहां तक सत्य है,अगर आपको उसमें कोई समस्या है तो आप वहां के नेताओं से कहिए,पुलिस प्रशासन से कहिए और यह जो मामला है वह तो वक़्फ़ बोर्ड का है तो वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष से आपको शिकायत करनी चाहिए,अपनी बात रखनी चाहिए तो उसे वक़्फ़ बोर्ड अपने नजरिए से सॉल्व करता ताकि अपने राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह का अपमान ना हो, आप लोगों ने तो पत्थर ही मारना शुरू कर दिया जिस पर सजा का भी प्रावधान है और इस मामले में 26 लोग गिरफ्तार भी किए गए हैं,आखिर कब तक ऐसे चलेगा हम एक देश में रहते हैं जहां हिंदू,मुस्लिम, सिख,ईसाई बौद्ध,जैन सभी धर्म के लोग आपस में प्रेम करके रहते हैं और सब अपने-अपने धर्म का और अपने लोकतंत्र का, अपने भारत का, अपने राष्ट्रीय चिन्हो का सम्मान करते हैं,ऐसा दुष्कर्म करना अपराध की श्रेणी में आता है तो आगे से सभी भारतवासियों से मेरा निवेदन है कि अगर आपको ऐसा लगे कि आपकी धार्मिक भावना किसी चीज से आहत होती है तो आप सरकार से शिकायत करिए सरकार मत बनिए,अब देखते हैं आगे की कार्रवाई में क्या होता है और भी खबरों के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
