कौन है छठी मैया जिनकी आराधना सब करते हैं

जी हां दोस्तों बिहार झारखंड और उत्तर प्रदेश से प्रचलित एक त्यौहार जो विश्व भर में मनाया जाता है जिसका नाम है छठ,औरतें,बच्चे,जवान सभी इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं,घाटों पर साफ सफाई देखने को मिलता है और जो शाम का,सुबह का दृश्य होता है वह अलौकिक होता है,अद्भुत होता है,अतुल्य होता है,सांस्कृतिक दृष्टि से यह पर बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है ऐसा कहा जाता है की मां अपने बेटों की लंबी आयु के लिए छठी मैया से प्रार्थना करती हैं निर्जला उपवास,कठोर परिश्रम के साथ यह पर्व मनाया जाता है, इसका असर इतना व्यापक है कि विदेश में भी चाहे वह लंदन हो,अमेरिका हो घाटों पर महिलाएं छठ का पर्व मनाती हैंhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं क्यों मनाया जाता है छठ:
आपको बता दे की सनातन परंपरा में भगवान सूर्य और षष्ठी देवी की पूजा के लिए समर्पित छठ महापर्व का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है,हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम सूर्यवंशी थे,प्रभु श्री राम जब रावण का वध कर अयोध्या वापस लौटे,तो उन्होंने माता सीता के साथ भगवान सूर्य को समर्पित व्रत किया था जिसे छठ कहा गया,इस छठ को महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है ऐसा कहा जाता है जब पांडव हुए में अपना सारा राज पाट हर कर वन वन में रह रहे थे तब उन्हें तमाम विसंगतियों का सामना करना पड़ा और इन सारे कासन के निवारण करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को सूर्य भगवान से जुड़ा हुआ छठ व्रत करने को कहा था
छठ व्रत का महत्व:
छठ पूजा आस्था शुद्धता और आत्म संयम का पर्व है इसमें पूरे परिवार की पवित्रता का महत्व पता चलता है, इस पर्व में महिलाएं चार दिनों तक व्रत रखती हैं और छठी मैया से यह प्रार्थना करती है कि उनके परिवार उनके पुत्र सुखी हो समृद्ध हो दीर्घायु हो
छठ पूजा के चार दिन कौन से हैं:
1-नहाय खाय:इस दिन महिलाएं स्नान कर शुद्ध रूप से पवित्रता के साथ भोजन बनाती हैं,इस भोजन में कद्दू, चने का दाल,चावल का प्रयोग होता है जिससे महिलाएं व्रत की शुरुआत करती है
2-खरना:इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जल उपवास रखती हैं,शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर रोटी और केले का प्रसाद ग्रहण करती हैं,और आपको पता थी कि प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात उनके निर्जला उपवास शुरू हो जाता है
3-संध्या अर्घ्य:इस दिन महिलाएं नदी तालाब पर जाकर अस्त होते सूर्य को अरग देती हैं,आपको बता दे कि यह दृश्य बहुत ही अलौकिक लगता है,चारों तरफ घाटों पर भोजपुरी में छठी मैया का गीत कानों को तरल करता है
4-उषा अर्घ्य:छठ पर्व का यह अंतिम दिन होता है जिसमें महिलाएं सुबह-सुबह घाट पर जाकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देती है और अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना करती हैं,इसी के साथ व्रत का पारायण भी किया जाता है
सच में हम लोग का सौभाग्य है कि हमने भारत में जन्म लिया है जहां हर पर्व इतनी धूमधाम से मनाया जाता है कि दुनिया देखती है चाहे वह दीपावली हो,चाहे वह दशहरा हो,चाहे वो कृष्ण जन्माष्टमी हो,चाहे वह छठ पर्व हो, छठ की बात ही कुछ अलग है महिलाओं के साथ-साथ बच्चे बुजुर्ग सब इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं जैसे ही यह पर्व नजदीक आता है ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है लोग ट्रेन में,बसों में भर भर के अपने शहर,अपने गांव,अपने घर आते हैं इस पर्व का आनंद उठाने के लिए और यकीन मानिए जब तीसरे दिन शाम के समय घाट पर जाकर पूजा अर्चना किया जाता है वह दृश्य मनमोहक दृश्य होता है सारा शहर एक जगह इकट्ठा हो जाता है जिसमें महिलाएं बच्चे बुजुर्ग ईश्वर से अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं ठीक वैसे अगले सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है वह भी दृश्य अलौकिक होता है ऐसा लगता है की सारी कायनात यहीं आकर रुक जाती है,दिवाली पर्व खत्म होते ही जो घर के छोटे बच्चे हैं वह तालाब नदी पोखर पर चले जाते हैं अपना बेदी बनाने के लिए, कोई घाट पर अपना नाम लिख देता है,कोई घाट को किसी विशेष रंग से रंग देता है ताकि पहचाना जा सके,इस पर्व का विशेष ही महत्व है,छठ हमें संयम,कृतज्ञ,सत्यता का संदेश देता है,आपको बता दे की लोग गायिका दिवंगत शारदा सिन्हा जिन्हे भोजपुरी का लता मंगेशकर भी कहा जाता है उनका जो गाना है छठ पर्व पर गाया हुआ वह हर घाट पर बजाया जाता है,उस गाने में छठी मैया से निवेदन करती है कि उनको सुख समृद्धि दे,पुत्र की प्राप्ति हो, दोस्तों पूरी दुनिया उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देती है लेकिन भारत ही एक ऐसा देश है जो उगते हुए सूर्य के साथ अस्त होते हुए सूर्य को भी अर्घ्य देता है,यह नजारा विश्व में कहीं देखने को नहीं मिलता है इसलिए आप गर्व करिए कि आप भारत में पैदा हुए धन्यवाद
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