
क्या यूजीसी का पुराना नियम भी बदलेगा
यूजीसी की जो नई गाइडलाइन जारी हुई थी उस पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि इस नए नियम से जाति में भेदभाव घटेंगे नहीं बल्कि और बढ़ेंगे और खासकर ब्राह्मण समाज के लिए और मुसीबत का कारण है,यह नया कानून सवर्ण समाज के लिए भी बहुत बड़ा अवरोध बनने वाला कानून है ये,इसका विरोध उत्तर प्रदेश में बढ़ चढ़कर हो रहा है खासकर लखनऊ में देवरिया में गोरखपुर में लोग सड़कों पर भी उतरे हैं,हजारों हजार की संख्या में लोग आंदोलन कर रहे हैं जिसमें से ज्यादातर ब्राह्मण समाज के लोग हैं जो सरकार के इन नीतियों से नाराज हैं
भेदभाव समाप्त करने के लिए भेदभाव का कानून:
ऐसा माना जा रहा है कि भेदभाव समाप्त करने के लिए यह भेदभाव का कानून लाया जा रहा है जिससे कुछ विशेष वर्ग को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है, आपको बता दे की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि नऐ कानून से किसी को कोई दिक्कत नहीं होने वाली है ना ही किसी के साथ भेदभाव किया जाएगा,इस कानून के गलत इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जाएगी इसका दायित्व यूजीसी,राज्य सरकार और भारत सरकार पर होगा और यह सारा संविधान के अनुकूल होगा,आपको बता दे कि जो जाँच कमेटी बनी है उसमें अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग के सभी लोग शामिल होंगे लेकिन इसमें सवर्ण लोग की कोई भागीदारी नहीं है यानी जनरल केटेगरी वाले लोग इस नियम कानून से बाहर रहेंगे,लोगों का कहना है कि भेदभाव को बचाने के लिए जो नियम कानून तैयार किए गए हैं वह भेदभाव से ही शुरू हो रहे हैं,इस कानून में अगर कोई झूठी शिकायत करता है जनरल कैटेगरी वाले बच्चों के खिलाफ तो उस पर 15 दिन में कार्रवाई सुनिश्चित है लेकिन शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी,यानी की सीधा-सीधा जनरल वालों के लिए खतरे का सबब है यह यूजीसी का नया कानून
क्या धर्मेंद्र प्रधान का कहना सही है:
आपको बता दे की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा है कि यह जो यूजीसी का नया नियम है यह भेदभाव को समाप्त करने वाला है किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा यह जिम्मेदारी यूजीसी,भारत सरकार और राज्य सरकार की है लेकिन कुछ लोगों का कहना है की चलिए मान लें कि धर्मेंद्र प्रधान जब तक है तब तक कोई कार्यवाही नहीं होगी लेकिन उनके जाने के बाद क्या बच्चे प्रताड़ित नहीं किए जाएंगे,क्या उन पर झूठे आरोप नहीं लगाए जाएंगे, यह कानून भेदभाव को कम करने वाला नहीं बल्कि भेदभाव को बढ़ाने वाला है,कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यूजीसी के इस नए नियम के कारण अगड़े और पिछड़े एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं,आपको बता दे कि रोहित बेमौला के मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी के लिए गाइडलाइन जारी करने को कहा था लेकिन उसमें सरकार ने ओबीसी को भी जोड़ दिया था
सरकार को जवाबदेही देनी होगी:
सरकार ने जो यूजीसी का नया बिल पारित किया है उसमें हर प्रकार से सवर्ण ही दोषी पाए जाएंगे,लेकिन धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इस बिल से किसी के प्रति कोई भेदभाव नहीं होगा,किसी के प्रति कोई अत्याचार नहीं होगा यह बिल भारतीय सरकार,यूजीसी और राज्य सरकार के देखरेख में रहेगी लेकिन इस बिल से काफी आक्रोश है सवर्ण जाती के लोगों में,पर आपको बता दे कि यह जो नया बिल लागू हुआ है यह केवल छात्रों पर नहीं बल्कि अध्यापक पर,कर्मचारियों पर सभी पर यह बिल लागू है और खास बात यह है कि शिकायतकर्ता पर कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा अगर शिकायत झूठी भी हो
आखिर विपक्ष क्यों इतना नरम है:
यूजीसी के नए बिल का विरोध भारत के हर कोने में हो रहा है खासकर उत्तर प्रदेश में तो ज्यादा हो रहा है सवर्ण जाति के लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं लेकिन विपक्ष खामोश है,विपक्ष की आवाज उतनी बुलंद नहीं है इस बिल को लेकर क्योंकि अगर कांग्रेस या फिर अन्य पार्टिया इस बिल का जमकर विरोध करेंगे तो अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोग नाराज हो जाएंगे और उनका वोट बैंक समाप्त हो जाएगा,इसीलिए विपक्ष ना तो समर्थन में है और ना ही विरोध में है क्योंकि यहां मामला हर जातियों का है,हर पार्टी को हर जातियों का वोट चाहिए इसीलिए किसी खास जाति का पक्ष एक पार्टी नहीं रख सकती है,इससे उनका वोट बैंक प्रभावित हो सकता है,लेकिन विपक्ष भले शांत हो सवर्ण जाती के लोग इसका जमकर विरोध कर रहे हैं और मामले का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी अंतरिम रोग लगा दी है,अब देखते हैं कि 19 मार्च की सुनवाई में क्या निर्णय निकल कर आता है
