
ए आर रहमान विवाद के पीछे का कारण
क्या अब बॉलीवुड में भी हिंदू मुसलमान होने लगा है जब से एआर रहमान ने बयान दिया है अपने काम को लेकर तब से पुराने जितने भी मुस्लिम कलाकार हैं उनके बयान सुर्खियों में है,आपको बता दे की एआर रहमान ने पिछले दिनों जो बयान दिया वह काम न मिलने के कारण दिया गया है उनका कहना है कि मैं मुसलमान हूं इसलिए मुझे काम नहीं दिया जा रहा है,उन्होंने कहा कि इसके पीछे सांप्रदायिक कारण हो सकता है जब मामला उनका बिगड़ता दिखा तो उन्होंने अपनी सफाई दी लेकिन बात पूरे भारत में फैल चुके थे अब उस पर सफाई देने से क्या फायदा एआर रहमान भूल चुके हैं कि यह वही म्यूजिक डायरेक्टर हैं जिन्हें ऑस्कर अवार्ड भी मिला है आखिर ए आर रहमान ऐसा क्यों कह रहे हैं इसके पीछे का कारण है कि उनको अब काम मिलना बंद हो गया है इसलिए वह हिंदू मुस्लिम की बातें कर रहे हैं
ऑस्कर विजेता का ऐसा बयान गलत है:
आपको बता दे की ए आर रहमान को ऑस्कर अवार्ड भी मिले हैं और न जाने कितने अवार्ड मिले हैं,उनको अपनी म्यूजिक के लिए भारत में रहकर पैसा कमाया, भारत में रहकर इज्जत कमाई,भारत में रहकर ऑस्कर मिला फिर आखिर क्यों भारत की बुराई हो रही है,एक समय होता है जब सबका सिक्का बोलता है वक्त हमेशा बदलता रहता है,ए आर रहमान का वक्त नहीं रहा उन्हें काम नहीं मिल रहा है इसका मतलब यह नहीं की हर चीज सांप्रदायिक हो जाए भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जहां कला और शिक्षा को पूरा महत्व दिया जाता है सोचिए अगर सांप्रदायिकता की बात होती तो क्या भारत के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम में होते क्या राष्ट्रपति अब्दुल कलाम होते हैं क्या भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान अजहरुद्दीन होते,भारत में हर धर्म का स्वागत है, हर मजहब का स्वागत है
असली कारण काम नहीं मिलना है:आपको बता दे की ए आर रहमान का यह बयान से पूरे भारत की बेइज्जती होती है उन्होंने जो बयान दिया है वह फिल्म इंडस्ट्री को कटघरे में खड़ा कर दिया है,ए आर रहमान के संगीत अभी भी हमारे कानों में गुजते हैं,उनके संगीत अजर अमर है जितना सम्मान उन्हें मिलता है भारत में वह किसी देश में नहीं मिल सकता है वह देश दुनिया में चर्चित इंसान है और उनको इस तरह की बातें करना शोभा नहीं देता है
ए आर रहमान के बयान से भारत की बेज्जती:
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अल्लाह राखा रहमान अब भारत में घुट घुट कर जी रहे हैं,उन्होंने काम नहीं मिलने का कारण सांप्रदायिकता को बता दिया,आज जैसे ए आर रहमान ने अपना बयान दिया ठीक वैसे ही कभी आमिर खान ने भी बयान दिया था नसरुद्दीन शाह ने भी बयान दिया था,भारत में रहकर करोड़ोे अरबों की संपत्ति बनाने वाले यह एक्टर भारत की ही निंदा करने में लगे हैं सोचिए अगर यह दूसरे देशों में होते तो इनकी इतनी इज्जत नहीं होती जितनी आज है,नसरुद्दीन शाह एक बहुत अच्छे एक्टर माने जाते हैं जिनको बड़े-बड़े अवॉर्ड मिले हैं भारत उनका सम्मान दिया है भारत के लोग उनका सम्मान दिए हैं वह भी एक वक्त में भारत को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़े आमिर खान जिनकी फिल्म भारत का हर बच्चा देखना चाहता है चाहे वह हिंदू हो मुसलमान हो या फिर कोई अन्य जाति का हो और इन्हें भारत में रहने में डर लगता है और अभी भी वह भारत में ही रह रहे हैं और खुलकर जी रहे हैं
जावेद अख्तर ने खारिज की ए आर रहमान की बात:
आपको बता दे कि जिस तरीके से ए आर रहमान बयान दिया है इससे पूरे विश्व स्तर पर भारत की भेजती हो रही है,आपको बता दे की गीतकार वाले लेखक जावेद अख्तर ने ए आर रहमान के आरोपी को खारिज कर दिया उनके इस बयान पर जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जब जावेद अख्तर बॉलीवुड में बढ़ती हुई सांप्रदायिकता को लेकर ए आर रहमान के बयान को खारिज कर सकते हैं तब वह वास्तव में भारतीय मुसलमान की हकीकत कभी खंडन कर सकते हैं आपको बता दे की शबाना आजमी ने कभी कहा था कि मुंबई जैसे महानगर में सिर्फ मुसलमान होने की वजह से उन्हें घर देने से इनकार किया गया था
क्या सचमुच सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है:
जैसी जैसी बातें सुनने और देखने को मिल रही है भारत में यह बेहद ही शर्मनाक बात है क्या तथ्य यह बताते हैं कि पिछले एक दशक में भारत में सांप्रदायिकता का तनाव बढ़ा है,क्या ऐसे ऐसे बयान जो आ रहे हैं उससे सांप्रदायिक शक्तियों को बल मिलेगा,आखिर ए आर रहमान को ऐसा क्या महसूस हुआ कि उन्होंने ऐसी बात की यह सोचने वाली बात है ना कि लड़ने वाली बात है धन्यवाद
