वोट अधिकार रैली,कितना फायदा कितना नुकसान:Bihar Vidhansabha Sabha

बिहार में वोट अधिकार रैली अपने अंतिम पड़ाव पर है, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तमाम इंडिया गठबंधन के नेता SIR के मुद्दे पर पूरे बिहार में रैली किये,चुनाव आयोग और बीजेपी पर जमकर बरसे,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह भीड़ वोट में तब्दील होगी या नहींhttp://news24hourslatest.in
कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद होगा बिहार का चुनाव:
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दीनों बिहार में दिन रात एक करके बिहार की जनता में अपने मुद्दे को लेकर रैली कर रहे है,SIR के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी को घेरना कितना फायदेमंद होगा यह तो बिहार की जनता बाद में बताएगी फिलहाल जानते हैं कि इस रैली से क्या परिवर्तन होगा बिहार में,महागठबंधन की यात्रा 14 दिनों तक चली, जिसमें हजारों कार्यकर्ता के साथ जनता भी सड़क पर थी हर जगह कैंप लगाया गया रैली हुई भाषण हुए,20 शहरों से होकर यह यात्रा गुजरी टोटल 50 विधानसभा कवर किये,ये शहर हैं- रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, फारबिसगंज, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मोतिहारी, चंपारण, सीवान, छपरा, मुजफ्फरपुर और आरा,इस यात्रा के दौरान महागठबंधन ने हर वर्ग,हर जाति के लोगों को महिलाओं, को युवाओं को,जोड़ने की कोशिश की, बिहार में 15 प्रतिशत वोट यादव का है तो 17 से 18% मुसलमान का,और इंडिया गठबंधन के नेता इस रैली के जरिए हर लोग को, हर जाति को, हर वर्ग को परिवर्तन करने की कोशिश में लगे हुए हैं,क्या ये बिहार जो पहले कभी लूटमार, अत्याचार को झेलता हुआ आ रहा है उसे राहुल गांधी तेजस्वी यादव से कोई उम्मीद मिलेगी,
मेरा मानना है कि उनकी यह रैली का प्रभाव तो अवश्य पड़ेगा,वोट का कन्वर्जन तो होना संभव है,आब कितना वोट कन्वर्ट होगा यह तो चुनाव में पता चलेगा क्योंकि बिहार साक्षरता में अभी बहुत पीछे,वहां जाती आधारित राजनीति पर ज्यादा बल दिया जाता है,अब देखना होगा कि आगे इसका क्या और कैसे लाभ मिलेगा
क्या राहुल गांधी की सक्रियता काम आएगी?
क्या इस वोट अधिकार रैली के तहत राहुल गांधी बिहार को समझ पाएंगे या नहीं,यह तो विधानसभा चुनाव में पता चलेगा,क्योंकि जिस नजरिए से लोग नीतीश कुमार, लालू यादव को देखते हैं उस नजरिए से बिहार की जनता अभी राहुल गांधी को नहीं देख रही है,भले ही कांग्रेस सबसे पुरानी बड़ी पार्टी है लेकिन बिहार में कांग्रेस का वर्चस्व नहीं रहा है,हां आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी ही थी इसलिए अधिकतर मुख्यमंत्री राज्यों में कांग्रेस के ही थे चाहे वह बिहार क्यों ना हो,जैसे कांग्रेस के पहले मुख्यमंत्री बिहार के श्री कृष्ण सिंह थे,लेकिन कांग्रेस के जाने के बाद फिर कांग्रेस कभी दीखी ही नहीं हमेशा गठबंधन मे रही और आज भी वही हाल है
क्या राहुल गांधी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाह रहे हैं?
यह बात तो बिल्कुल साफ है कि तेजस्वी यादव खुद को मुख्यमंत्री के रूप में बिहार में देखना चाहते हैं और इसी हर्षोल्लास में उन्होंने राहुल गांधी को पीएम बनने तक का संबोधन कर दिया अपने रैली में,राजद कांग्रेस के साथ कितना फिट बैठेगी यह तो भविष्य ही बताएगा फिलहाल इस समय एकजुटता केवल SIR के मुद्दे पर है ना कि मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के कोई मुद्दे पर,राहुल गांधी भलीभांती समझ गए हैं अगर कोई अन्य मुद्दा कांग्रेस लेकर आयी तो इंडिया गठबंधन में एकजुटता नहीं रहेगी, और यही कारण है इस बार राहुल गांधी ने अलग मुद्दा बिहार में लेकर आये है, जिससे चुनाव आयोग और बीजेपी को घेरा जा सके,और यह मुद्दा सारी विपक्षी पार्टियों को एक किये हुए है, क्योंकि बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरना है
तीन-तीन सीएम भी पहुंचे बिहार में:
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की यह वोट अधिकार रैली अलग-अलग राज्यों के CM भी पहुंचे,जैसे तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,सब अपने-अपने तरीके से इस रैली का हिस्सा बने,यह एक बड़ा अवसर है इंडिया गठबंधन के नेताओं का भाजपा को घेरने का क्योंकि अन्य मुद्दों पर यह पार्टी एकजुट नहीं रह सकती क्योंकि SIR देश का मुद्दा है और इसमें एकजुटता सारी पार्टियों ने दिखायी
कांग्रेस ने बिहार में बहुत सक्रियता दिखायी:
ऐसा पहली बार हुआ है देखने मे जब बिहार में कांग्रेस पार्टी इतनी मजबूती के साथ खड़ी है वह भी राहुल गांधी के नेतृत्व में,बिहार के लोगों का भी कहना है जो प्रबुद्ध वर्ग है इस विधानसभा में फायदा मिल सकता है वही गांव के जो महिलाएं हैं उनकी सोच अभी भी वही है
बिहार में वोट अधिकार रैली समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है,अब देखना है इसका प्रभाव कितना पड़ता, एक बात स्पष्ट है अगर इस मुद्दे को लेकर भी इंडिया गठबंधन को वोट अगर नहीं मिली तो फिर भविष्य में इंडिया गठबंधन को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि यह जो मुद्दा है वह राष्ट्रीय मुद्दा है न किसी राज्य का व्यक्तिगत मुद्दा,खैर सब छोड़ते हैं बिहार की जनता पर,आगे के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल