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क्या विपक्ष को गंभीरता से नहीं ले रही है जनता:Taza Khabar 

क्या विपक्ष को गंभीरता से नहीं ले रही है जनता:Taza Khabar 

क्या विपक्ष को गंभीरता से नहीं ले रही है जनता:Taza Khabar 
क्या विपक्ष को गंभीरता से नहीं ले रही है जनता:Taza Khabar
                                                                                                                                                                                                                                                           भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि पक्ष हो या विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है,विपक्ष को हमेशा मजबूत रहना चाहिए क्योंकि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और लोकतंत्र को मजबूत रखना यह विपक्ष का काम है,जनता के प्रति सकारात्मक सुझाव पेश करना यह भी विपक्ष का काम है,क्योंकि विपक्ष अगर मजबूत नहीं होगा तो सरकार की नीतियों पर सवाल नहीं उठाएगा तो लोकतंत्र की नीव कमजोर पड़ जाएगी,सोचिए अगर विपक्ष का नेता ना हो, विपक्ष का दर्जा ना हो तो सरकार जो केंद्र में है वह कोई भी बिल पास कर लेगी बिना विरोध के,बिना बहस के चाहे इसका असर सकारात्मक हो या नकारात्मक होhttp://news24hourslatest.in
2014 में कोई विपक्ष नहीं था:
बात करें 2014 की तो भारतीय जनता पार्टी को बिना किसी गठबंधन के बात करें तो 282 सिट मिली थी जो पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से 11 सिट अधिक थी, मतलब कि अगर आपको पूर्ण बहुमत की सरकार बनानी है तो 272 सिट चाहिए,वहीं अगर एनडीए गठबंधन की बात करें तो यह आंकड़ा बढ़कर 336 हो गया था,लेकिन बात करें विपक्ष की तो विपक्ष उस समय न के बराबर था,उस समय कांग्रेस का प्रदर्शन इतना खराब था की मात्रा 44 सीटों में कांग्रेस सिमट गई,अगर साधारण शब्दों में कहे तो कांग्रेस अपने इतिहास में राहुल गांधी के नेतृत्व में सबसे कम सीटों का आंकड़ा लेकर आई थी,और भारत में विपक्ष के नेता के लिए कम से कम कुल सदस्यों की संख्या का 10% सेट होना अनिवार्य है,जोकि होता है 55 सीट लेकिन कांग्रेस वह भी आंकड़ा पार नहीं कर पाई इसलिए 2014 में विपक्ष का दर्जा खाली था
क्या-क्या दिक्कतें आई 2014 में विपक्ष के न होने से:
आपको बता दे कि कई संस्थानों में जैसे (CBI की निगरानी समिति, लोकपाल चयन समिति, मानवाधिकार आयोग आदि) विपक्ष का नेता होना जरूरी है लेकिन उस समय कोई नेता ही नहीं था,और चर्चा यह हो रही थी किसको इसमें शामिल किया जाए विपक्ष के नेता के तौर पर,सरकार कोई भी पॉलिसी लाती है या कोई संविधान में संशोधन होता था तो उसका विरोध करने वाला कोई नहीं था, उसकी नकारात्मक प्रभाव बताने वाला कोई नहीं था इसलिए वह आसानी से पास हो जाता था,जो कि लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है,और बीजेपी को आगे बढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं आई,भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब विपक्ष में कोई विपक्ष का नेता नहीं हुआ
2019 में क्या स्थिति पैदा हुई थी:
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने और प्रचंड बहुमत के साथ सिट हासिल की,बीजेपी ने अकेले ही 303 सिट जीती जो कि बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है,और अगर बात करें एनडीए की तो टोटल 353 सिट हो गई थी,और कांग्रेस को 2019 में 52 सिटे मिली,लेकिन विपक्ष के नेता के तौर पर 55 सीटों का होना अनिवार्य है लेकिन कांग्रेस उसे भी नहीं छु पाई, इसलिए 2019 में भी कोई विपक्ष नहीं था
2019 में विपक्ष ना होने से क्या दिक्कतें आई:
2019 में भी विपक्ष का कोई नेता नहीं था कांग्रेस को मात्र 53 सिट मिली थी जिसकी वजह से बीजेपी को और बढ़त मिल गया और कोई भी कानून पास करने में कोई अवरोध नहीं हुआ,अब आपको बताते हैं कि 2019 में बिना विपक्ष के कौन-कौन से कानून बने
1- अनुच्छेद 370 हटाना:कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करना और इसे लेकर विपक्ष विरोध करता रहा लेकिन संख्या बल में कमी होने के कारण कोई असर नहीं पड़ा
2- तीन तलाक क़ानून:मुस्लिम महिलाओं के संरक्षण के लिए तीन तलाक कानून लाया गया और वह आसानी से पास हो गया
3- नागरिक संशोधन कानून: पाकिस्तान, बांग्लादेश अफगानिस्तान से आए हुए गैर मुसलमान को भारत में शरण देना,और उनको नागरिकता प्रदान करना
4- राम मंदिर का मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आने के बाद बीजेपी सरकार ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया बिना किसी विरोध के क्योंकि विपक्ष था ही नहीं
5-कृषि कानून:किसानों से जुड़े तीन नए कृषि कानून आसानी से पारित किए गए
माहौल बदला 2024 में:
2024 में भारतीय जनता पार्टी की सिटे घटकर 240 हो गई जो बहुमत के आंकड़े से कम थी, लिहाजा गठबंधन के साथ भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनानी पड़ी, गठबंधन मिलाकर 293 सिटे केंद्र में आई,वही बात करें इस बार कांग्रेस की तो कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपने दम पर 99 सिट हासिल की और वही इंडिया गठबंधन की बात करें तो 293 सिटे मिली,कांग्रेस ने राहुल गांधी को विपक्ष का नेता स्वीकार किया
राहुल गांधी ने सरकार की किन-किन नीतियों का 2024 में विरोध किया:
2024 में कांग्रेस ने अकेले दम पर 99 सिटे लायी और एक अच्छा विपक्ष भारतीय लोकतंत्र को मिला और राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर चुने गए,और विपक्ष ने सरकार की किन-किन नीतियों का विरोध किया आईये जानते हैं
1-संविधान पर हमला: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 साल से कोई विपक्ष ना होने के कारण सरकार ने जो भी फैसले लिए इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है भारतीय लोकतंत्र पर,राहुल गांधी ने कहा कि अमीर आदमी और अमीर होता गया और गरीब आदमी और गरीब होता गया
2-NEET का विरोध:राहुल गांधी NEET जैसी परीक्षाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिस्टम गरीबों के लिए नहीं बल्कि अमीरों के लिए बनाया गया है
3- उद्योगपतियों पर हमला: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का कहना है कि केंद्र सरकार अपने फायदे के लिए देश के बड़े-बड़े उद्योगपति जैसे अंबानी अडानी को पैसे से लाभ पहुंचा रही है,आम जनता का पैसा चूस कर उद्योगपतियों को दे रही है,और यह मुद्दा काफी चर्चित रहा
4- वोट चोरी का आरोप:नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल फिलहाल में एक नया मुद्दा उठाया है जिसको वोट चोरी का नाम दिया गया है, राहुल गांधी का कहना है कि इलेक्शन कमीशन और बीजेपी ने मिलकर एक लाख वोटो की महाराष्ट्र में चोरी की जिसके वजह से आज केंद्र में भाजपा की सरकार है,जिसको लेकर राहुल गांधी ने जन आंदोलन भी किया
कुल मिलाजुला के 2024 में जब विपक्ष अपने दम पर आया तो काफी आलोचना हुई केंद्र सरकार की योजनाओं की जो लोकतंत्र को सशक्त बनाने की भूमिका रखता है,क्योंकि विपक्ष का ना होना इस देश के लिए हानिकारक है क्योंकि सरकार मनमानी कोई भी कानून जो उसे अच्छा लगे वह पास कर देगी भले ही उसका प्रभाव जनता पर नकारात्मक क्यों ना पड़े,इसलिए विपक्ष का होना बहुत जरूरी है,और भी अच्छे खबरे जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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