हर साल किसी न किसी देश में कोई बड़ा आंदोलन होने का कारण क्या है?

हर साल किसी ने किसी देश में आंदोलन हो रहा है,और वह आंदोलन इतना उग्र रूप ले ले रहा है की वहां की सत्ता को भी पलट दे रहा है,हाल ही में आपने देखा कि नेपाल विद्रोह जहाँ पर कुछ युवाओं ने सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर किया और सोशल नेटवर्किंग साइट को बंद किया, उसके बाद युवाओं का आक्रामक रूप दिखा जो पूरे नेपाल मे एक अलग ही माहौल क्रिएट कर दिया और इस आंदोलन की वजह से नेपाल के प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ाhttp://news24hourslatest.in
आईये जानते हैं बड़े-बड़े आंदोलन कब हुए:
1-2021 में म्यांमार आन्दोलन :1 फरवरी 2021 को म्यांमार की सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया,और वहां की चुनी हुई सरकार को हटाकर,आँग सान सू की (Aung San Suu Kyi) और उनकी पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (NLD) को गिरफ्तार कर लिया,सेना का आरोप था कि 2020 की चुनाव में धांधली हुई थी
2- 2022 का श्रीलंका आंदोलन:ऐसा कहा जाता है कि श्रीलंका के आजादी के बाद 2022 में श्रीलंका सबसे भीषण आर्थिक संकट से गुजरा क्योंकि उसका विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो चुका था,पेट्रोल, डीजल गैस, खाने पीने और अन्य सामानों में भारी गिरावट देखने को मिली,और महंगाई भी 50% से भी ऊपर पहुंच गई,उसके बाद नाराज लोगों ने वहां के राष्ट्रपति वहां के प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया यहां तक की श्रीलंका को कर्ज में डूबाने का श्रेय भी वहां की जनता ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को दिया,और लोगों ने सड़कों पर आंदोलन करना शुरू कर दिया,और प्रधानमंत्री के घर को भी आग लगा दिया गया और यह आंदोलन इतना व्यापक हुआ कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और भगाना,और यही नहीं राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया और सिंगापुर भाग चले, उसके बाद श्रीलंका में बाद में रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री और फिर कार्यकारी राष्ट्रपति बनाया गया।
3- 2022 में पाकिस्तान में आंदोलन:इमरान खान 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने और पाकिस्तान की जनता को यह वादा किए थे कि भ्रष्टाचार कम करेंगे, महंगाई कम करेंगे,लेकिन उनसे ऐसा कुछ हुआ नहीं,ना तो वह महंगाई कम कर पाए और न तो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी इतनी बढ़ती चली गई की डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया भी गिरता चला गया,उसके बाद इमरान खान का पाकिस्तान कि सेना से भी टकराव हो गया था,और विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला कर लिया और अप्रैल 2022 में संसद में मतदान हुआ और इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव हार गए और अपने पद से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा उसके बाद विपक्षी नेता शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री घोषित हुए
4-2024 मे बांग्लादेश मे आंदोलन हुआ:
बांग्लादेश में जो आंदोलन हुआ इसकी शुरुआत वहां के छात्रों ने की थी,इस आंदोलन का मुख्य कारण था सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था,बांग्लादेश की सरकार ने आजादी के बाद एक व्यवस्था बनाई थी की सरकारी नौकरियों में कुछ आरक्षण उन पारिवार को मिले जिनके परिवार वाले स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे, 2018 में आंशिक आरक्षण को खत्म कर दिया गया यानी 30% आरक्षण को हटाया गया,लेकिन 2024 में वहां की हाईकोर्ट ने यह बयान दिया कि जो आरक्षण हटाया गया है वह संविधान विरोधी है और इस बहाल करना चाहिए,उसके बाद छात्रों ने आंदोलन करना शुरू कर दिया और परिणाम यह हुआ कि वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा,2025 में नेपाल का भी खेल समाप्त हो चुका है क्योंकि वहां के प्रधानमंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया है,यह लगातार कोशिश हो रही है कि भारत के पड़ोसी देशों में वहां के युवाओं से आंदोलन करवाना और वहां की सरकार को गिरा देना,इसके पीछे का कारण यह है कि जब भी किसी देश की सरकार को गिरानी हो तो सबसे पहले टारगेट किया जाता है युवाओं को,किसी एक नेगेटिव को पड़कर युवाओं के बीच में फैलाया जाता है चाहे वह भ्रष्टाचार हो, महंगायी हो,आरक्षण हो या कुछ भी हो और उस नॉरेटिव के जरिए आंदोलन करवाया जाता ताकि वहां की जनता भड़के और सड़कों पर आंदोलन करने के लिए निकल पड़े है और आंदोलन इतना व्यापक हो जाता है कि वहां की सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है
भारत में भी आंदोलन हो रहे हैं मुसलसल:
भारत में भी युवाओं को टारगेट किया जा रहा है आंदोलन के लिए आप मणिपुर की हिंसा को देख लीजिए इतना व्यापक रहा,उसके बाद किसान आंदोलन दिल्ली में,कभी बड़े हादसे करवा दिए जाते हैं ताकि जनता में आक्रोश पैदा हो,और आजकल ताजा आंदोलन जो चल रहा है देश में वह विपक्ष के द्वारा वोट चोरी का है,वोट चोरी के नाम पर भीड़ को इकट्ठा किया जा रहा है,इलेक्शन कमीशन को टारगेट किया जा रहा है और लोगों में आक्रोश पैदा किया जा रहा है,और खास बात यह है कि यह जो आंदोलन भारत में कराया जा रहे हैं वह बस अन्य देशों की आंदोलन को देखते हुए कराया जा रहा है ताकि भारत में भी सरकार गिर जाए,हमें यह सोचना चाहिए कि क्या जो आंदोलन हम लोग कर रहे हैं वह हमारा आंतरिक आंदोलन है या फिर अन्य देशों में जो षड्यंत्र रचे हैं उसका प्रभाव है,लेकिन हमारे देश का लोकतंत्र इतना मजबूत हो गया है कि यह बाहर की जो भी नफरत की बीज है वह भारत में नहीं पनप सकती, धन्यवाद