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एक तरफ जहां रावण को मारा जाता है तो दूसरी तरफ रावण की आरती भी होती है

एक तरफ जहां रावण को मारा जाता है तो दूसरी तरफ रावण की आरती भी होती है

एक तरफ जहां रावण को मारा जाता है तो दूसरी तरफ रावण की आरती भी होती है

आमतौर पर देखा गया है कि दशहरा के समय जब रामलीला होती है तो अंतिम दिन भगवान राम रावण का वध करते हैं,रावण को अहंकार और बुराई का प्रतीक मानते हैं और उसका पुतला भी जलाते हैं,यह नजारा आपको लगभग हर राज्य में देखने को मिलता है,लेकिन भारत में ही ऐसे कई राज्य हैं जहां रावण की पूजा होती है और रावण की आरती भी होती हैhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं रावण की आरती और पूजा कहां होती है:
1-मध्य प्रदेश के विदिशा जिला:
 “जय लंकेश ज्ञान गुण सागर,असुर राज सब लोक उजागर”
यह चालीसा रावण के ऊपर लिखी गई है और भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में यह चालीसा पढ़ी जाती है,यहां के लोग रावण चालीसा का पाठ करते हैं, रावण को भगवान की तरह पूजते हैं ना की राक्षस की तरह, आपको बता दें कि 2 अक्टूबर को पूरे देश में दशहरा मनाया जाएगा, कई जगह रामलीला होती है उसके बाद रावण का वध होता है,रावण का पुतला भी जलाया जाता है लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा में ठीक उसी समय रावण की पूजा की जाती है और रावण चालीसा भी पढ़ी जाती है,रावण की पूजा यह कोई नई परंपरा नहीं है बल्कि सदियों से चली आ रही है जहां लोग अपने हाथों पर रावण का टैटू लगवाते हैं,गाड़ियों पर रावण का पोस्टर चिपको आते हैं,12 फुट की लेटी हुई रावण की प्रतिमा भी है,मंदिर के पुरोहित का कहना है कि कोई भी धार्मिक कार्यक्रम होता है या फिर सामाजिक कार्यक्रम होता है तो सबसे पहले लोग यहां रावण की पूजा करते हैं और पूजा भी अलग विधि से की जाती है ऐसा कहा जाता है कि रावण की लेटी हुई प्रतिमा के नाभि में तेल डाला जाता है और पूजा की जाती है और दशहरे पर यहां कोई रावण दहन नहीं होता है,वहां के लोगों का कहना है कि हम जिसे अपना भगवान मानते हैं उनका दहन हम नहीं देख सकते हैं
2-मध्य प्रदेश का मंदसौर जिला:
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में भी रावण की विशेष रूप से पूजा हुई होती है यहां रावण को “जामाता” भी कहा जाता है,वहां के लोगों का कहना है कि मंदसौर को रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका भी कहा जाता है, इसलिए यहां भी रावण का दहन नहीं होता बल्कि पूजा होती है
3-मध्य प्रदेश के भोपाल के बैरागढ़ जिला:
 मध्य प्रदेश के भोपाल के आसपास ऐसे कई जिले हैं जहां रावण की विशेष रूप से पूजा की जाती है जिसमें से एक जिला बैरागढ़ भी है,यहां के लोग रावण को प्रकांड पंडित और शिव भक्त मानकर पूजा करते हैं,यहां भी लोग रावण का दहन नहीं करते बल्कि उसकी बुद्धि, उसकी शक्ति का सम्मान करते हैं और पूजा करते हैं
4- कर्नाटक में:
कर्नाटक के कई हिस्सों में रावण की पूजा होती है क्योंकि वहां के लोग मानते हैं की रावण बहुत बड़ा शिव भक्त और ज्योतिषाचार्य भी था
5- तमिल नाडु:
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में रावण की पूजा होती है जिसमें तमिलनाडु में रावण को शिव भक्त और एक विद्वान योद्धा के रूप में पूजा जाता है,यहां लोग रावण को अपने इष्ट देव में भी शामिल करते हैं
रावण की भक्ति का कारण:
1-रावण की भक्ति का कारण यह है कि रावण जैसा कोई प्रकांड पंडित नहीं था, कोई वीर योद्धा नहीं था और उसके जैसा कोई बलशाली भी नहीं था, आपको बता दे कि भगवान शिव के अधिकांश श्लोक रावण द्वारा रचित है
2- रावण वेद पुराण आयुर्वेद का ज्ञाता था और एक महान ज्योतिषाचार्य भी था,उसे दशानन इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसके पास 10 दिशाओं का ज्ञान था
3-भगवान शिव का अनन्य भक्त और एक श्लोक में रावण ने भगवान शिव के लिए की
“मुजसा पंडित,मुजसा योद्धा और कोई न दूजा है
 अपने शीश को काट काट शंकर को मैंने पूजा है”
 यह तो बात सत्य है की तीनों लोकों में भगवान शिव का अनन्य भक्त रावण के सिवा कोई नहीं था,रावण जैसा प्रकांड पंडित, रावण जैसा योद्धा कोई नहीं हुआ,रावण के लिए कहा गया है कि
“चलत दशानन डोलत अवनी” यानी कि जब रावण चला था तो धरती आकाश डोला करते थे,नवग्रह उसके अधीन थे, शनि के ऊपर पैर रख कर बैठा करता था और ऐसा कहा गया है कि जब माता सीता का अपहरण कर रावण उसे लंका के अशोक वाटिका में रखा था,रामायण के अनुसार माता सीता लंका में 400 दिन रहे और ऐसा कहा जाता है कि इन 400 दिनों में रावण सीता जी को स्पर्श तक नहीं किया यही सारी खूबियां है रावण में जिसकी वजह से उसकी पूजा की जाती है धन्यवाद

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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