क्या अब अमेरिका में भी गिरेगी ट्रंप की सरकार

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ 70 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया है,अमेरिका में 2700 शहरों और कश्बों में लाखों लोग राष्ट्रव्यापी नो किंग विरोध प्रदर्शन में सड़कों पर उतर आए,ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है,ट्रंप जिस तरह कुछ महीनो में हर देश के साथ दुश्मनी मोल रहे हैं ऐसा लग रहा है कि अमेरिका की जनता उनसे अब परेशान हो चुकी है और सत्ता परिवर्तन की सोच रही है, आपको बता दे कि यह जो आंदोलन जो हुआ है वह ट्रंप के तानाशाही रवैया के खिलाफ हुआ है,वहां की जनता का कहना है की डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के लोकतंत्र में राजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो असंवैधानिक हैhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं पूरा मामला क्या है:
अमेरिका में इस वक्त हालात ट्रंप के खिलाफ चल रहा है, 50 लाख लोग ट्रंप के विरोध पर सड़कों पर उतर आए हैं न्यूयॉर्क शहर में एक लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी टाइम स्क्वायर पर जमा हुए थे जो खुलकर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध कर रहे थे और कह रहे थे कि ट्रंप लोकतंत्र में एक राजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं,उन्होंने हाथ में पोस्ट लिए थे जिस पर लिखा था हमारे संविधान की रक्षा करो, लोकतंत्र राजतंत्र नहीं,संविधान वैकल्पिक नहीं है,लॉस एंजेलिस में सिटी हॉल के बाहर भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का जमकर विरोध हुआ, आपको बता दे कि नो किंग आंदोलन का ये दूसरा प्रदर्शन था इससे पहले इसी साल जून में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मदिन के पहले यह आयोजन हुआ था जिसमें 50 राज्यों से लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे
आईए जानते हैं कितनी गिरफ्तारी हुई:
अमेरिका के पुलिस विभाग ने एक एक्स यह सूचना दी कि प्रदर्शन से संबंधित कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई है यह प्रदर्शन बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से हुआ है,अमेरिकी सीनेट के नेता चक शूमर इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे जबकि सीनेट के जो अध्यक्ष हैं माइक जॉनसन उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को अमेरिका से नफरत करने वाली रैली बताकर खारिज कर दिया,उनका कहना है कि यह रैली सिर्फ नफरत फैलाने वाली रैली है और कुछ नहीं है
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने क्या कहा:
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी जनता खासकर सहस्त्र बालों के लिए संघर्ष करना कभी नहीं छोड़ेगा उन्होंने यह भाषण देश के मरिन जवानों को संबोधित करते हुए कहा,उपराष्ट्रपति ने कहा कि चक शूमर और डेमोक्रेट्स भले ही शटडाउन कर दिए हो लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप हमारे मरीन जवानों को उनका वेतन दिलाने के लिए लगातार प्राप्त कर रहे हैं और दिल कर रहेंगे,हम अमेरिकी जनता के लिए कभी लड़ना नहीं छोड़ेंगे
ये नो किंग्स आंदोलन क्या है:
ट्रंप की बढ़ती सत्तावादी नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ है लोगों का आरोप है कि ट्रंप लोकतांत्रिक राष्ट्रपति की तरह नहीं बल्कि एक राजा की तरह शासन कर रहे हैं नो किंग्स का मतलब है अमेरिका में कोई राजा नहीं होगा, इस आंदोलन की पहली लहर जून 2025 में आई थी जिसमें करीब 50 लाख लोग शामिल हुए थे अब अक्टूबर में दूसरी लहर और बड़ी साबित हुई है अब एक बात जानते हैं कि अमेरिका में कहां-कहां नोे किंग प्रोटेस्ट हुआ है 18 अक्टूबर को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में प्रदर्शन हुए वॉशिंगटन,डीसी,न्यूयॉर्क,लॉस,एं जेलिस शिकागो,बोस्टन और अटलांटा में बड़ी भीड़ जुटी,प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे लेकिन माहौल बेहद ऊर्जा से भरा था,लोगों ने कहा कि विरोध करना भी देशभक्ती है और फासीवाद का विरोध करो जैसे नारे लगे,विरोध के मुख्य कारण आपको अगर बताएं तो कठोर नीतियां,ट्रंप प्रशासन ने प्रवासियों के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाए हैं,सैनिको द्वारा बड़े पैमाने पर छापेमारी और हिरासत जारी है जुलाई 2025 में पारित one बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट ने प्रवासी हिरासत बजट को चार गुना बढ़ा दिया इसमें बच्चों को लंबे समय तक हिरासत में रखने की अनुमति दी गई है इसे मानवाधिकार संगठन मानसिक उत्पीड़न बताया जा रहा है,दूसरा सरकारी शटडाउन 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में संघीय सरकार का शटडाउन चल रहा है यानी सरकार के कई विभाग बंद है यह ट्रंप के कार्यकाल का तीसरा शटडाउन है करीब 7.50 लाख सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के घर बैठने को मजबूर है ट्रम्प प्रशासन ने इसे अपनी नीतियों को आगे बढ़ने का तरीका बताया जबकि इसे विपक्ष सत्ता का दुरुपयोग मान रहा है,लोकतंत्र पर खतरा और सत्तावादी रवैया लोगों का आरोप है और कई विद्वानों ने चेतावनी भी दिया कि ट्रंप अमेरिका को सत्तावादी शासन की ओर ले जा रहे हैं,नेशनल गार्ड के तैनाती कई शहरों में की गई है ट्रंप प्रशासन ने कई अदालतों के आदेशों की अवहेलना भी की है और लोगों में जो गुस्सा है जो प्रोटेस्ट है जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं उसमें भी यह बात कही जा रही है प्रोजेक्ट 2025 के तहत हजारों सरकारी कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा खत्म कर उन्हें राजनीतिक नियुक्तियों से बदला जा रहा है
