26/11 और 10/11 दोनों का एक ही मकसद था

10 नवंबर को दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट से पूरे देश में खौफ का माहौल पैदा कर दिया था हर जगह जबरदस्त चेकिंग हो रही थी,उत्तर प्रदेश,हरियाणा,मध्य प्रदेश दिल्ली सब के सब राज्य रेड अलर्ट घोषित हो चुके थे दिल्ली के ब्लास्ट से पहले फरीदाबाद में 3000 किलो के लगभग विस्फोटक सामग्री पकड़ी गई थी सोचिए कितना बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में थे वो भी पढ़े लिखे आतंकवादी,सरकार चाहे किसी की भी हो आतंकवादी हमला हर सरकार में हुआ है अगर इसे कोई डिफरेंट करना चाहे तो गलत है क्योंकि यह आतंकी सरकार देखकर नहीं अपनी समय अनुसार टाइमिंग के साथ हमला करने की फिराक में रहते हैं यानी कि जब उन्हें मौका मिले तब वह हमला कर देंगेhttp://news24hourslatest.in
26/11 और 10 11 दोनों में क्या अंतर है:
10 नवंबर को जो दिल्ली में ब्लास्ट हुआ उसमें भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी,i20 कार में यह बम ब्लास्ट हुआ था, आपको बता दे कि लगभग 32 कारों के बराबर विस्फोटक सामग्री इकट्ठा की जा रही थी और भारत के अलग-अलग राज्यों में विस्फोट करने का प्लान था इन आतंकवादियों का और यह आतंकवादी पाकिस्तान से नहीं आए थे बल्कि भारत के ही मुस्लिम डॉक्टर थे फरीदाबाद के अलफलाह यूनिवर्सिटी में छात्र को डाक्टरी की पढ़ाई कराते है,सोचिए इस घटना की प्रमुख जो थी वह एक महिला थी जिसका नाम था डॉक्टर शाहीन जिसने पूरा चक्रव्यूह रचा की कैसे हमला करना है और उसका कनेक्शन पाकिस्तान से,यह लेडी डॉक्टर हरपल,हर सेकंड का खबर पाकिस्तान पहुंचाती थी यह सारी बात एनआईए के जांच में पता चली है,और जितने भी लोग इस घटना में शामिल थे सब के सब मुसलमान डॉक्टर थे,वही जब बात करते हैं 26/11 की तो वह और भी भयानक दृश्य था एक जिंदा आतंकवादी पकड़ा गया जिसका नाम था कसाब उसके हाथ में रक्षा सूत्र बाधा गया था जिससे लगे कि वह हिंदू है अगर वह जिंदा पकड़ा नहीं जाता तो शायद ही आज हिंदू कौम बदनाम हो जाती,मुंबई अटैक के सारे आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे समुद्र के रास्ते अलग-अलग जगह रुके और उसके बाद इस घटना को अंजाम दिए इसमें लगभग 200 से ऊपर लोग मारे गए थे
नाम अलग काम एक:
26/11 का मास्टरमाइंड था कसाब,जिसे जिंदा पकड़ा गया था उसने कबूल किया कि हम पाकिस्तान से आए थे और मुख्य मकसद था लोगों को मारना वही दिल्ली में जो ब्लास्ट हुआ उसका मास्टरमाइंड था डॉक्टर उमर इसका भी यही मकसद था लोगों को मारना,अंतर यह था कि वोे पाकिस्तान से आया था और यह फरीदाबाद के अलफलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर था,सोचिए एक पढ़ा लिखा इंसान वह भी एक डॉक्टर जिसको जान बचाना चाहिए वह खुद जान लेने के लिए आतुर हो गया था, आरडीएक्स नहीं मिला तो थोड़ा-थोड़ा करके अमोनियम नाइट्रेट को विस्फोटक सामग्री बना लिया और भारत के अलग-अलग हिस्सों में अंजाम देने की कोशिश में था लेकिन पुलिस ने इसे पकड़ लिया अब यह सलाखों के पीछे हैं,पूछताछ जारी है
आखिर क्या मिलता है ऐसा काम करने से:
आतंकवादी हमला करने के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं,जितने भी आतंकवादी हमले हुए है,कुछ न कुछ नया तरीका अपनाया गया,26 नवंबर को जो मुंबई में अटैक हुआ वहां पानी के रास्ते पाकिस्तान से आतंकवादी आए थे वहीं जो दिल्ली में ब्लास्ट हुआ तो यह भारत के ही डॉक्टर आतंकवादी बनाकर ब्लास्ट किया फिर पहलगाम में जो हमला हुआ वहां धर्म पूछ कर लोगों को मार रहे थे जिसमें केवल पुरुषों को ही मारा गया महिलाओं को छोड़ दिया गया आखिर इनका मकसद क्या है इन्हें पता है कि अगर हम पकड़े गए तो मारे जाएंगे फिर भी यह लोगों को मारने में थोड़ा सा भी सोचते नहीं है,हमें और आपको सोचना चाहिए कि किस तरीके का इनका ब्रेन वाश किया जा रहा है,अनपढ़ को तो छोड़िए पढ़े लिखे लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं आखिर पाकिस्तान इन सारे लोगों को किस प्रकार ब्रेनवाश कर रहा है कि यह अपने ही देश के लोगों को मारने के लिए बेचैन हो रहे हैं, भारत कभी भी हमले का पक्षधर नहीं रहा है आपने कहीं नहीं सुना होगा कि भारत के लोगों ने कहीं जाकर आतंकवादी हमला किया यह पाकिस्तान है जो अपने यहां आतंकवादियों को शै देता है और उनका ब्रेनवाश करता है और भारत में हमले की साजिश निरंतर करता रहता है,इन आतंकवादियों के वजह से ही भारत में हिंदू मुस्लिम एकता में दरार पैदा हुई है क्योंकि ऐसा कहा जाता था की देशभक्ति की कोई जाति नहीं होती,गद्दार का कोई धर्म नहीं होता लेकिन हर हमले में एक ही धर्म के लोग निकल कर सामने आते हैं जो कि मुसलमान होते हैं और वह भी पढ़े लिखे मुसलमान जिनका ब्रेन वॉश करना बहुत मुश्किल होता है ऐसे लोग इस काम को अंजाम दे रहे हैं,सोचिए फिर देश का क्या होगा धन्यवाद