200 साल धर्म संस्कृति हिंदू बरकरार

पिछले कुछ दिनों से एक 19 साल लड़के का वीडियो बहुत वायरल हुआ,ये लड़का महाराष्ट्र का है जिनका नाम है देवव्रत महेश रेखे,प्रकांड पंडित देवव्रत जी ने वेदों का दण्डक्रम मे शुक्ल यजुर्वेद के 2000 श्लोको का उच्चारण किया है वह भी बिना देखे लगातार 55 दिनों तक सीधे आसन पर बैठकर विधि विधान के साथ बिना गलती किये,200 साल के इतिहास को इस प्रकांड पंडित ने अपनी बुद्धिमत्ता से तोड़ दिया,महाराष्ट्र के यह प्रकांड पंडित ने शुक्ल यजुर्वेद के 2000 श्लोक को बिना देख 55 दिनों में पूर्ण कर लिया है,यह एक तरह से भारत का गौरव हो चुके हैं और होना भी चाहिए क्योंकि 200 साल के इतिहास में अब तक ऐसा नहीं हुआ है प्रधानमंत्री मोदी से लेकर योगी आदित्यनाथ तक इनको सम्मानित कर चुके हैंhttp://news24hourslatest.in
पहले व्यक्ति कौन थे जिन्होंने यह कारनामा किया:
1800 के दशक में नारायण शास्त्री हुए थे जिन्होंने इस पराक्रम को अंजाम दिया था उसके बाद महाराष्ट्र के 19 साल के देवव्रत में इस पराक्रम को अपने कौशल से पूरी दुनिया को दिखाया,55 दिनों की निरंतर मेहनत के बाद इनको यह सम्मान मिला है जिससे भारत को बहुत गर्व है
कितना कठिन होता है इस पराक्रम को करना:
50 दीनों का यह पराक्रम पूरी दुनिया ने देखा लेकिन सबके दिमाग में यह सवाल आया होगा कि आखिर यह 50 दिन का जीवन इनका कैसा था तो आपको मैं बता दूं इस साधना के दौरान 50 दिनों तक इन्होंने कोई पूर्ण निद्रा नहीं ली है,उसके बाद अपने शरीर को सीधा रखते हुए पूरे विधि विधान के साथ श्लोको का उच्चारण करना पड़ता है बिना किसी हस्तक्षेप के,याद रहे कोई भी गलती किए बिना इस श्लोक को निरंतर पढ़ना पड़ता है
गर्व है भारत को देवव्रत जैसे प्रकांड पंडित पर:
ऐसी कठिन विद्या जिसे कर पाना लगभग असंभव ही था वह महाराष्ट्र के देवव्रत जी ने कर दिखाया,200 साल में यह दूसरे पुरुष हुए हैं जिन्होंने इस दंडक्रम को पूर्ण किया है,लगातार 55 दिनों की साधना के बाद यानी की 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक इनका यह पाठ्यक्रम चला, सोचिए इस 2000 शोक में करोड़ों शब्द होते हैं,लाखों तरीके के उच्चारण होते हैं जिनको बिना गलती किए पढ़ना पड़ता है,सोचने वाली बात है कि सरस्वती की कितनी अहेतुक कृपा देवव्रत पर होगी
प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी:
आपको बता दे की देवव्रत जी के इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके उनको बधाई दी और वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीआदित्य ने उन्हें मंच से सम्मानित किया,उसके बाद देश के तमाम बड़े नेता बधाई देते हुए नजर आ रहे थे कोई मिलने की चाह कर रहा था तो कोई ट्वीट कर रहा था,ऐसे में देश को भी गर्व है ऐसे प्रकांड पंडित पर जिन्होंने 19 साल के उम्र में इतिहास राच दिया,इस अल्प आयु में बच्चों को यह नहीं पता होता है कि आगे करना क्या है और इसी अवस्था में बच्चे पढ़ते तो हैं,संस्कृत का श्लोक छोड़िए गणित का एक सामान्य सूत्र तक याद नहीं हो पाता है,ऐसी स्थिति में देवव्रत जी को वेद का ज्ञान प्राप्त हो गया यह मेहज एक आश्चर्य है
वेदमूर्ति के उपाधि से विभूषित हुए:
19 साल के प्रकांड पंडित महाराष्ट्र के देवव्रत महेश रेखे नें इतिहास रचा है,वह अतुल्य है,अकल्पनीय है,अद्भुत है ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि 19 साल के इस प्रकांड पंडित ने 200 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया, इसलिए इन्हें वेदमूर्ति की उपाधि से विभूषित किया गया है,वेदमूर्ति की उपाधि उन्हें मिलती है जिन्हे समस्त वेदों का ज्ञान हो,महाराष्ट्र से नासिक में रहकर सारे वेदों का ज्ञान हासिल किया उसके बाद यह काशी मे उपलब्धि हासिल कर ली जो शायद ही कोई कर पाता है,लगभग असंभव के बराबर यह उपलब्धि है
विलुप्त होती हुई संस्कृति को जिंदा किया:
19 साल के प्रकांड पंडित देवव्रत महेश रेखे ने यह साबित कर दिया कि अभी भी सनातन की परंपरा जिंदा है,उसकी संस्कृति जिंदा है क्योंकि 200 साल पहले नासिक के नारायण शास्त्री ने यह इतिहास रचा था उसके बाद ऐसा लगा कि वेद पुराण केवल 10 सेकंड और 15 सेकंड के रील्स में ही सीमित रह जाएंगे लेकिन देवव्रत जी ने यह दिखा दिया कि अभी भी कुछ लोग जिंदा है करने के लिए लालाहित है,देवव्रत जी ने छुटी हुई संस्कृति को जो आजकल के बच्चे मोबाइल में रील्स देखकर अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे है, देवव्रत नें दुनिया को यह संदेश दिया है की अपने में महान पुरानी शहर काशी भोलेनाथ की प्यारी है जहां वेद,पुराण और हमारे अन्य ग्रन्थ का सम्मान होता है,सोचने वाली बात है कि जो पीढ़ी अपने किताबों का पहला अध्याय याद नहीं कर पाती इीसी पीढ़ी के एक 19 साल के प्रकांड पंडित ने यह साबित कर दिया की सच्ची आस्था के साथ कोई काम किया जाए,पूरे लगन के साथ कोई काम किया जाए तो वह सफल जरूर होता है
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