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रग रग हिंदू मेरा परिचय

रग रग हिंदू मेरा परिचय

रग रग हिंदू मेरा परिचय

25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाया जाता है,ये पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती के उपलक्ष में मनाया जाता है,किसी भी देश समाज में अपने विचार या फिर आचरण की छाप छोड़ने वाले बहुत ही दुर्लभ लोग होते हैं जिनमें से एक थे भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी ने भारतीय जनता पार्टी की नींव भी कहा जाता है आजाद भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेई का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, अटल जी भले ही राजनीति में थे,भारत के प्रधानमंत्री रहे भारतीय जनता पार्टी को चरमोत्कर्ष पर पहुंचाया लेकिन वह राजनीति से कहीं ऊपर थे एक धुरंधर कवि थे जिनकी कविता आपकी धमनियों में जोश पैदा करती हैhttp://news24hourslatest.in
अटल जी की अद्भुत राजनीति:
समान तरीके से देखने वाले,अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेई का हर कोई दीवाना था उनके बोलने के तरीकों को आज बहुत लोग आत्मसात करते हैं,यहां तक की अटल जी की उपस्थिति मात्र से सार्वजनिक जीवन में गरिमा,संतुलन,सेहजता स्थापित होता था,जनता का कहना था कि वह एक प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि राष्ट्रनायक थे,उनकी यह लाइन जो संसद में बोली गई थी कि सरकारे आएंगी,जाएगी लेकिन देश रहना चाहिए यह आज इतनी प्रासंगिक है कि हर जुबान पर होती है,यह लाइन केवल एक वाक्य ही नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन का सार था अटल बिहारी वाजपेई का,अटल जी के लिए शासन का अर्थ केवल फाइलों में पड़ी योजनाएं नहीं थी,बल्कि आम नागरिक को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाना और उनका विकास करना और यही उनका राष्ट्रीय संकल्प बना
क्या आज सुशासन है:
वर्ष 2014 से हर वर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाया जाता है जो की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती के उपलक्ष में मनाया जाता है,यह सुशासन दिवस की शुरुआत इसलिए की गई थी की सरकार में आम जनता के प्रति उनकी जवाबदेही बने और लेकिन क्या यह सुशासन दिवस प्रासंगिक हो रहा है,क्या हमारे अधिकारी उतने ही जवाबदेही है जितनी जनता जानती है,यह देश की कड़वी सच्चाई है जिसको ख़त्म करने का काफी प्रयास हुआ है लेकिन जनता इसे भली-भांति समझ रही है,सरकार हमेशा कहती है कि हम हर प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह धरातल पर दिखता ही नहीं,भ्रष्टाचार हमारे देश को धीरे-धीरे दीमक की तरह खा रहा है और हमारे नेता कह रहे हैं कि सब सही है, और यह भ्रष्टाचार सिर्फ सरकारी तंत्र को ही नहीं बल्कि निजी क्षेत्र को भी अपने गिरफ्त में ले चुका है ऐसी स्थिति में भला सुशासन कैसे आएगा सोचने वाली बात है?
भ्रष्टाचार दीमक की तरफ खा रहा है देश को:
भले ही 25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाया जाता है लेकिन सुशासन के नाम पर धरातल पर कुछ दिखता नहीं है,भ्रष्टाचार हमारे देश को दीमक की तरह खा रहा है आज भ्रष्टाचार की जड़ इतनी गहरी हो चुकी है कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते जब तक नेताओं नौकरशाह और अन्य अधिकारी में देशसहित और जनहित की भावना विकसित नहीं होगी तब तक यह देश तरक्की नहीं कर सकता है,भ्रष्टाचार पर किसी सरकार ने कोई ठोस कानून बनाया ही नहीं ना तो कांग्रेस की सरकार ना तो भाजपा की वर्तमान सरकार और ना ही राज्य की सरकार
प्रधानमंत्री मोदी अटल जी के कदमों पर चलते हैं:
2014 के बाद से जब से प्रधानमंत्री मोदी भारत के शीर्ष पर विराजमान है तब से भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की जयंती पर सुशासन दिवस मनाया जाता है,आजातशत्रु के रूप में जाने जाते हैं अटल जी,चाहे पक्ष हो विपक्ष हो सब उनसे प्रेम करते थे,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अटल जी की व्यवहार को, उनके सरलता को,उनके कहने के तरीकों को आत्मसात करते हैं और उनके कदमों पर चलने की कोशिश करते हैं,आज पूरा देश अटल जी की जयंती मना रहा है इसमें कुछ विपक्ष भी शामिल है,अटल जी हमेशा कहा करते थे मतभेद पार्टियों में होता है लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए
अटल जी का एक यादगार किस्सा:
1977 में जब स्वर्गीय मुरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री थे तब अटल जी विदेश मंत्री थे उस समय जब वह अपने संसद के गालियारों से गुजर रहे थे तो नेहरू जी की फोटो हटा दी गई थी,और जब अटल जी की नजर उस दीवाल पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि नेहरू जी की फोटो यहां तुरंत लगाई जाए और तब से लेकर अभी तक वहां नेहरू जी की फोटो है,ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे अटल जी अपने विरोधियों से भी इस तरह मिलनसार रहते थे जैसे सब अपने हो,आज के परिपेक्ष में देखा जाए तो अटल जी जैसा नेता मिलना दुर्लभ है और यही कारण है कि उनकी कविताएं,उनका व्यवहा,उनकी सरलता आज हर भारतीय के दिलों में बसती हैं

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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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