अब ईरान का क्या होगा

आपको बता दे की अमेरिका ने वेनेजुएला पर जैसे ही हमला किया वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को और उनकी पत्नी को अपने गिरफ्त में लिया उसके ठीक बाद अब ईरान का भी वही हाल होने वाला है,ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई अब ईरान छोड़कर भागने वाले हैं ऐसा खबरों के माध्यम से पता चल रहा है,करीब 10 दिनों से ईरान में आंदोलन शीर्ष पर है लोग खामनेई के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं,और ऐसा कहां जा रहा है कि खामनेई अब ईरान छोड़कर रसिया भागने की तैयारी में और उनके लिए रास्ता भी सुनिश्चित कर दिया गया है कि किस रास्ते को रसिया जाएंगेhttp://news24hourslatest.in
ह्यूमन राईट एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी ने क्या दावा किया:
आपको बता दे की ह्यूमन राईट एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी में दावा किया है कि अब तक 36 लोगों की जान चली गई जिनमें से 34 प्रदर्शनकारी थे और तो सुरक्षा बल के जवान थे और इस प्रदर्शन के बाद ईरान की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है,आपको बता दे कि ईरानी मुद्रा यानी की रियल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी जबकि पिछले साल के इसी समय की तुलना में महंगाई दर बढ़कर 42 फ़ीसदी से अधिक हो गई थी जिसमें खाने,पीने की वस्तु काफी महंगी हो गई थी और यही कारण है कि वहां की जनता बहुत परेशान है खासकर व्यापारी वर्ग इस आंदोलन में सबसे पहले जो सड़कों पर उतरे वह व्यापारी वर्ग थे जिनके साथ वहां के छात्रों ने भी दिया और आपको बता दे कि तेहरान से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब ईरान के 27 प्रांतो में फैल गया है
अमेरिका ईरान का संबंध:
वैसे देखा जाए तो अमेरिका और ईरान के रिश्ते काफी अच्छे नहीं रहे हैं अमेरिका और ईरान के रिश्ते इस्लामी क्रांति के बाद ही ध्वस्त हुए थे और इसका कारण बताया जा रहा है 1979 का ईरान बंधक कांड जिसमें तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर ईरान के छात्रों ने कब्जा कर लिया था और अमेरिका के कई अधिकारियों को बंधक बना लिया था और यह संकट तकरीबन 1 साल तक खत्म नहीं हुआ जिसका प्रभाव यह पद की तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को मुंह की खानी पड़ी यानी कि उनकी सरकार गिर गई और 1981 में रोनाल्डो सत्ता संभाले यह ऐसी घटना है जिसे अमेरिका आज भी याद करता है
आयतुल्लाह खामनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन:
आपको बता दे की 1979 से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई ही है और उनके फैसले के इजाजत के बगैर वहां एक पत्ता भी नहीं हिलता है, 2024 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद जिस तरह देश छोड़कर भागे थे शायद उसकी पुनरावृत्ति ईरान में देखने को मिल रही है और अब ईरान की सत्ता कौन संभालेगा,यह बहुत बड़ा प्रश्न है लेकिन खामनेई के दो उत्तराधिकारी दिख रहे हैं एक उनके बड़े बेटे मोजतबा खामनेई और दूसरा पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी के पोते हसन खुमैनी,अब देखना है कि ईरान की विरासत किसके हाथों लगती है बहुत बड़ा चुनौती पूर्ण काम है यह और ईरान के लोगों के लिए बहुत संघर्ष का विषय है ये,जिस तरह ईरान को खामनेई संभाल रहे थे ऐसा लग नहीं रहा था कि वहां के लोग उनका विरोध करेंगे लेकिन पिछले कुछ सालों में कई देशों का तख्तापलट हुआ है क्या वह बांग्लादेश हो नेपाल हो पाकिस्तान हो सबकी सत्ता चरमरा गई है
क्या असर रहेगा भारत पर:
अमेरिका और ईरान के संबंध इस समय बेहद ही तनावपूर्ण हो चुके हैं लेकिन भारत का संबंध इन दोनों देशों से रहा है क्योंकि भारत दोनों देशों से व्यापार करता है,भारत की नजर दोनों देशों पर है भारत और ईरान दोनों के रिश्ते पुराने हैं लेकिन ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत के आर्थिक संबंध ज्यादा मजबूत नहीं हो सका,भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध को लेकर अमेरिका ने कई बार टोका है आपको बता दे कि अमेरिका इसी चक्कर में भारत पर अत्यधिक टैरिफ लगाया जा रहा है लेकिन भारत अभी खुलकर अमेरिका की किसी बातों का जवाब नहीं दिया है
प्रश्न यह उठता है कि क्या अमेरिका अब तानाशाही कर रहा है क्योंकि जिस तरह वह हर देश पर अपनी हुकूमत जमाना चाहता है जिससे कि कई देश उससे खफा है,लेकिन उसके खिलाफ कोई कुछ बोल नहीं रहा है,ना ही अमेरिका का जमकर विरोध हो रहा है आपको बता दे की जितनी भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हैं वह भी अभी कुछ नहीं बोल रही है सब के सब चुप है और अमेरिका यह सब केवल तेल के चक्कर में कर रहा है क्योंकि अमेरिका चाहता है की दुनिया अमेरिका से व्यापार अधिक करें और यही कारण है कि अमेरिका हर देश पर हावी होना चाहता है हर देश को अपनी मुट्ठी में रखना चाहता है,वेनेजुएला के हमले के बाद अमेरिका की नजर अब ईरान पर है क्योंकि ईरान में भी कच्चे तेल की काफी खदानें हैं,अब देखते हैं कि भारत का समाज इस घटना को कैसे देखता है