कौन जाति है तुम्हारी?केंद्र सरकार कराएगी जातिगत जनगणना

कौन जाति है तुम्हारी?केंद्र सरकार कराएगी जातिगत जनगणना
पहलगाम हमले के बाद अब केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है,केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया है की सरकार अब जातिगत जनगणना कराएगी,तमाम विपक्षी दल ने भी इसका समर्थन किया है ,साल के अंत में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की देखते हुए केंद्र सरकार ने ये फैसला लिया है,लंबे समय से अटका ये फैसला अब केंद्र सरकार पूरा करेगी वही विपक्ष का कहना है की लंबे समय से विपक्ष केंद्र सरकार पर दबाव बना रही थी की जातिगत जनगणना कराया जाए,ये एक तरीके से विपक्ष की जीत है की ही केंद्र सरकार ने ये फैसला किया है,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है की सरकार इसकी समय सीमा बताए,राहुल गांधी का कहना है की हम जातिगत जनगणना के माध्यम से नया भारत में नया डेवलपमेंट लाना चाहते है,उन्होंने कहा कि सिर्फ आरक्षण ही नही,जातिगत जनगणना से ये तो पता लग जायेगा की ओबीसी,दलित,आदिवासी इन सबकी भागीदारी देश में कितनी है,हमारे इंस्टीट्यूशन ने ,संस्थाओं में इनकी कहा कहा भागीदारी हैं सब पता करना होगा,
जबकि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है की कांग्रेस ने हमेशा जातिगत जनगणना का विरोध किया है,2010 में मनमोहन सिंह ने कहा था कि जातिगत जनगणना पर विचार करना चाहिए,उसके बाद फिर ये मामला ठंडा हो गया,http://news24hourslatest.in
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस फैसले का खुलकर स्वागत किया,नीतीश ने कहा है कि इससे जाति के आधार पर लोगों की संख्या का पता लगेगा और उनके लिए योजनाएं बनाने में सरकार को मदद मिलेगी,हालाकि आपको बता दे की बिहार में बीजेपी ने जातिगत जनगणना की सिफारिश की थी जिससे 2023 में जातिगत जनगणना हुआ और पता चला कि किसकी कितनी हिस्सेदारी है,बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36 फीसदी है और वहीं पिछड़ा वर्ग 27 फीसदी है जबकि अनुसूचित जाति के 19 फीसदी हैं,और इस तरह बिहार जातिगत जनगणना करने वाला पहला राज्य बन गया उसके बाद आंध्र प्रदेश दूसरा राज्य बना जातिगत जनगणना कराने वाला,कहा जाता है की बीजेपी भी जातिगत जनगणना को लेकर अलग अलग बयान देती रही है,कहा ये भी जाता है की बीजेपी शुरू से ही ऊंची जाति की है,ब्राह्मण और बनिया वर्ग बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहता है,जब केंद्र में मोदी सरकार आई तब आर्थिक रूप से पिछड़ी ऊंची जातियों की लिए सरकार ने 10% आरक्षण की व्यवस्था की तब जाकर बीजेपी को ओबीसी का वोट भी मिलने लगा और पार्टी को मजबूत किया
आइए जानते है जातिगत जनगणना का इतिहास जातिगत जनगणना की शुरुआत आंग्रेजों के समय सन 1931 में हुई थी,उस समय जनसंख्या भी कम थी,उसके बाद देश आज़ाद हुआ और फिर 1951 में जातिगत जनगणना कराई गई,लेकिन इसमें फेरबदल ये हुए की इस बार केवल अनुसूचित जाति और जनजाति को ही रखा गया,ओ बी सी वर्ग इससे बाहर था,अब अगर मोदी सरकार जातिगत जनगणना कराती है तो इसमें ओबीसी में कितनी प्रतिशत जातियां है इसका पता आराम से चल जाएगा,
1951 से 2011 तक 7 बबार जातिगत जनगणना हुआ है जिसमे सिर्फ सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के ही जाति आधारित आंकड़े जारी किए। अन्य जातियों के जातिवार आंकड़े 1931 के बाद कभी प्रकाशित नहीं किए गए।1990 में वी पी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन लागू करके पिछड़ों को आरक्षण दिया,और ये कहा गया की देश ओबीसी वर्ग की आबादी देश में 52% है,ओबीसी को आबादी जाहिर तौर पर बढ़ गई होगी ही,इससे कितना माना जाए ये कहना गलत होगा,ये तो जातिगत जनगणना कराने के बाद से ही पता चलेगा,सरकार को ये उम्मीद है की जातिगत जनगणना से ये पता चल जायेगा की पिछड़े ,अति पिछड़े वर्ग की आर्थिक,सामाजिक,राजनीतिक स्तिथि का पता चल जायेगा,
जातिगत जनगणना से लाभ क्या होगा
जातिगत जनगणना से लाभ ये होगा की देश को ये पता चल जाएगा की किस किस जाति के कितने लोग है,खासकर ओबीसी के जाति की,क्योकि ओबीसी को जातिगत जनगणना में शामिल नहीं किया गया था,जिससे ये पता नही चल पाया की ओबीसी की प्रतिशत कितनी है देश,जातिगत जनगणना अगर हुआ तो जातियों की आर्थिक,सामाजिक स्थिति का भी पता चल जाएगा,सरकार फिर अपनी योजनाएं में फेरबदल भी कर सकती है और इससे जातियों को लाभ भी मिल सकेगा।
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