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क्या हाथी किसी के ऊपर सावर होगी या अकेले रेस में दौड़ेगी:Bihar Vidhansabha Sabha

क्या हाथी किसी के ऊपर सावर होगी या अकेले रेस में दौड़ेगी:Bihar Vidhansabha Sabha

क्या हाथी किसी के ऊपर सावर होगी या अकेले रेस में दौड़ेगी:Bihar Vidhansabha Sabha
क्या हाथी किसी के ऊपर सावर होगी या अकेले रेस में दौड़ेगी:Bihar Vidhansabha Sabha
बिहार के विधानसभा चुनाव में देश की तमाम पार्टिया अपनी अपनी ताकत झोंक रही है,ऐसे मेरा एंट्री हो चुका है बहुजन समाज पार्टी,जी हां दोस्तों बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो बिहार में अकेले दम पर चुनाव लड़ेंगी,जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद के ऊपर सौंप दिया,फिलहाल चर्चा तो एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन की सबसे अधिक है बिहार में लेकिन अन्य दल भी इसमें अपनी ताकत आजमाने की कोशिश कर रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
क्या कहा बसपा प्रमुख मायावती ने:
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है कि बिहार के विधानसभा चुनाव में अब वह उनकी पार्टी उतर चुकी है,मायावती का कहना है कि उनकी पार्टी पूरे 243 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे और अकेले दम पर चुनाव लड़ेंगे,मायावती ने कहा है की बिहार चुनाव की तैयारी के लिए सारी समीक्षा की जा चुकी है
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बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को कितनी सिटे मिली थी:
आपको बता दे की 2020 के बिहार के विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी ने ओवैसी के साथ, उपेंद्र कुशवाहा के साथ और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था,और सिर्फ एक सीट बसपा को मिली थी और एआइएमआइएम के ओवैसी को 5 सिटे मिली थी,लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार मे मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि वह अब अकेले चुनाव लड़ेंगी,हां लेकिन एक बात स्पष्ट है कि पिछले विधानसभा में बिहार के तीसरे मोर्चे के रूप में ये सारी गठबंधन में थी,लेकिन 2025 के बिहार के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के साथ मिल गए हैं ओवैसी किसी के साथ गठबंधन नहीं कर रहे हैं और ना ही मायावती किसी के साथ गठबंधन कर रही है
क्या मायावती को बिहार के दलित का वोट मिलेगा:
बिहार में दलितों की बात करें तो कई जातियां आती है, दलितों में भी ऊंची जाति हैं जो ज्यादा प्रभावशाली है जैसे पासवान जाति,चमार,रविदास जाति है,बिहार में इन जातियों का वोट प्रतिशत लगभग 16 से 18% है,और यह दलित वर्ग जो है यह मायावती के प्रभाव में शुरू से रहा है,क्योंकि मायावती खुद इसी समाज से आती है इसलिए इनका वोट बैंक फिक्स है,और एक बात स्पष्ट कर दूं कि जो दलित जाती है बिहार की जैसे रविदास, चमार, जाटव,पासवान यह सब अलग-अलग उम्मीदवार को अपने तरीके से वोट देते हैं सारे दलित समाज के लोग बिहार में मायावती को वोट नहीं देते हैं
क्या मायावती का असर चिराग पासवान पर भी पड़ सकता है:
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान दोनों दलित समाज से आते हैं,मायावती जाटव,चमार समाज से आती है जिसका वोट प्रतिशत बिहार में 4% है,परंतु चिराग पासवान पासवान और दुसाध समाज के बड़े नेता हैं इनका भी वोट प्रतिशत लगभग चार से पांच है,लेकिन पासवानों का वोट अधिकतर चिराग पासवान को ही जाएगा क्योंकि वह बिहार के हैं और दूसरा उनकी अच्छी पकड़ है पासवान समाज पर और मायावती इतनी सक्रिय दिखती नहीं है, बिहार के विधानसभा चुनाव में,मायावती का वोट बैंक फिक्स है,कहने का तात्पर्य यह है की कुछ ऐसे उम्मीदवार हैं मायावती के पार्टी के जिनको दलित समाज वोट देता है लेकिन उनको जीत और हार से कोई मतलब नहीं है,मायावती सीधे तौर पर चिराग पासवान को कोई बड़ा नुकसान तो नहीं पहुंचा सकती है लेकिन हां कुछ वोटो की हेरा फेरी हो सकती है,ऐसा विशेषज्ञों का भी कहना है
उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा में मायावती का खराब प्रदर्शन रहा:
हालांकि उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती का बहुत ही खराब प्रदर्शन रहा,मायावती ने कुल 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिसमे में से मात्र एक ही सीट मायावती की पार्टी जीत पाई,402 सिट हार गई,मायावती के अभी तक का सबसे खराब प्रदर्शन,वही 2007 में उत्तर प्रदेश में मायावती ने अकेले दम पर चुनाव लड़ी जीती और मुख्यमंत्री बनी,और उसके बाद इनका ग्राफ ऐसे गिरता गया और वह राजनीति में निष्क्रिय होती गई,उसके बाद ना तो ज्यादा प्रचार प्रसार, ना ज्यादा रैली जिसका असर यह हुआ की उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी बिल्कुल धरातल पर है,हालांकि उत्तर प्रदेश में मायावती का वोट बैंक काफी अच्छा है,आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश में लगभग 22 से 23 प्रतिशत दलित है,जिनमें मुख्य रूप से चमार,रविदास का वोट प्रतिशत 10 से 15 है जो मायावती का फिक्स वोट बैंक है
अब देखना यह है कि बिहार में जो 38 सिटे आरक्षित है दलित समाज के लिए क्या मायावती की पार्टी का उन पर प्रभाव पड़ेगा?क्या मायावती इस बार दलित को आकर्षित करने में सफल रहेगी,और आपको एक खास बात और बता दू की इस बार सारी जिम्मेदारी आकाश आनंद पर है कि वह किस रणनीति के तहत उम्मीदवार को उतारेंगे और कैसे दलितों में अपना भरोसा हासिल करेंगे,क्योंकि मायावती ने आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी दी है,अब देखना है कि आगे बिहार के विधानसभा चुनाव में कौन सा रंग सबसे अधिक खिलता है क्या मायावती की हाथी किसी और के ऊपर चलेगी या अकेले रेस में दौड़ेगी,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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