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Bihar Vidhansabha Chunav :इसलिए पप्पू यादव अलग हुए लालू यादव से

Bihar Vidhansabha Chunav :इसलिए पप्पू यादव अलग हुए लालू यादव से

Bihar Vidhansabha Chunav :इसलिए पप्पू यादव अलग हुए लालू यादव से
Bihar Vidhansabha Chunav :इसलिए पप्पू यादव अलग हुए लालू यादव से

आखिर ऐसा क्या हुआ कि 25-30 साल की दोस्ती में दरार पड़ गया,पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव जो कभी लालू यादव के करीबी हुआ करते थे,पप्पू यादव को लालू यादव का तीसरा बेटा कहा जाता था लेकिन अब वही पप्पू यादव लालू यादव का जमकर विरोध करते हैं, तेजस्वी यादव भी पप्पू यादव को कोई खास पसंद नहीं करते हैं उनका भी विरोध पप्पू यादव के खिलाफ हमेशा रहता हैhttp://news24hourslatest.in

आईए जानते हैं इसकी खास वजह:
बात है 1988 की, जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कपूरी ठाकुर का निधन हो गया था और निधन के बाद उनके लोक दल में 46 विधायक थे जिसमें लालू यादव से लेकर नीतीश कुमार और भी वरिष्ठ नेता थे, कपूरी ठाकुर के करीबी अनूप लाल यादव ऐसे विधायक थे जिनके घर में पप्पू यादव भी रहा करते थे, लेकिन पप्पू यादव भले अनूप लाल यादव के करीबी थे लेकिन लालू यादव के पक्ष में वह लोगों को लामबंद किया,उस समय ऐसा कहा भी जा रहा था कि जो भी नेता प्रतिपक्ष होगा वही आगे चलकर बिहार का मुख्यमंत्री होगा और लड़ाई नेता प्रतिपक्ष की थी, और नेता प्रतिपक्ष लालू यादव हो चुके थे और इसका श्रेय पप्पू यादव भी लेते हैं, अब उनका कितना हाथ था लालू यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाने में यह कहना मुश्किल है, लेकिन पप्पू यादव को एक अपराधी भी घोषित किया गया वह कांग्रेस के नेता की हत्या करने के लिए और वह कांग्रेस के नेता थे शिवचंद्र झा,लालू यादव पप्पू यादव के करीबी थे और लालू यादव नेता प्रतिपक्ष थे और ऐसा कहा गया कि पूर्णिया से पप्पू यादव पटना पहुंचे कांग्रेस के नेता की हत्या करने के लिए, फिर क्या था यह खबर सुनते ही पप्पू यादव फरार हो गए, लेकिन मीसा के तहत भागलपुर में पप्पू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया, साल आया 1990, होने वाले थे विधानसभा चुनाव, उसे समय देश के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह थे और पप्पू यादव लालू यादव को बहुत खास हो गए थे लेकिन लालू यादव ने उन्हें पहले ही सचेत कर दिया था कि तुम नेता मत बनो यादव के, क्योंकि पप्पू यादव पर एक अपराधी का टैग लग चुका था, फिर क्या था पप्पू यादव को लालू यादव ने टिकट देने से मना कर दिया लेकिन पप्पू यादव माने नहीं उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा मधेपुरा से और जीत भी दर्ज की, इसी बीच एक और नेता का बहुत बड़ा आगमन हुआ वो थे आनंद मोहन, लेकिन कहते हैं ना राजनीति में क्या दोस्ती और क्या दुश्मनी लालू यादव आनंद मोहन को हराने के लिए पप्पू यादव को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया, और इसी बीच आनंद मोहन के काफिले पर फायरिंग हो गई जिसका आरोप पप्पू यादव पर लगाया गया उसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव थे और लालू यादव ने पप्पू यादव को बचा लिया, इतना होने के बाद भी लालू यादव ने पप्पू यादव को टिकट नहीं दिया और पप्पू यादव फिर निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए डट गये वह भी पूर्णिया सीट से, पप्पू यादव जीत गए,

पप्पू यादव उसके बाद लालू से किनारा करते हुए समाजवादी पार्टी में विलय कर लिया, और फिर मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पुरनिया से टिकट दिया जीत गए और प्रदेश अध्यक्ष भी बन गए, उसके बाद लालू यादव मुलायम सिंह यादव के बीच समीकरण बना तो पप्पू यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी उस समय सरकार थी अटल बिहारी वाजपेई की और वह 13 दिन तक ही चली, और 1999 माध्यवधि चुनाव हुए, पप्पू यादव निर्दल लड़े और जीते गए, जब लालू यादव ने देखा की पप्पू यादव लगातार चुनाव जीत रहे हैं चाहे वह निर्दल लड़े या फिर समाजवादी पार्टी से लड़े तो लालू ने सोचा कि पप्पू यादव नजर अंदाज करना उनके लिए खतरे का सबब बन सकता है, कारण यह भी था कि उस समय चारा घोटाला भी उजागर हो चुका था लालू यादव जेल गए बाहर आए यह भी सोचकर उन्होंने पप्पू यादव को अपना साथी बना लिया,

अब बात आई 2004 की जब उसे समय शाइनिंग इंडिया का नारा चला था और लालू यादव दो सीटों से चुनाव लड़े मधेपुरा और छपरा दोनों सीटों से लालू यादव जीत गए, उसके बाद मधेपुरा सीट को उन्होंने छोड़ दिया और पप्पू यादव वहां से चुनाव लड़े,
अब आया 2008 जिसमें फिर एक हत्याकांड में पप्पू यादव को जेल हुआ 5 साल का, 2013 में पप्पू यादव को पटना हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया, 2014 में फिर लालू यादव ने पप्पू यादव को मधेपुरा सीट दे दी, और उसे समय मोदी लहर थी उसके बाद भी पप्पू यादव उस सीट से जीत दर्ज की, 2015 में पप्पू यादव को बेस्ट एमपी का खिताब मिला और और पप्पू यादव को यह लगा कि यही समय है कि लालू परिवार का उत्तराधिकारी वह धीरे-धीरे बने लेकिन यहीं से अनबन दोनों परिवारों में शुरू हो गई, लालू यादव चाहते थे कि अब उनकी पीढ़ी तेजस्वी यादव,तेज प्रताप,मीसा भारती यह भी चुनाव में एक्टिव हो, 2014 में मीसा भारती को टिकट दिया गया और वह चुनाव हार गई, लालू के बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यह दोनों ने पप्पू यादव के अरमानों के पानी फेर दिया कि वह लालू परिवार का हिस्सा बन सकते हैं और यहीं से पप्पू यादव ने अपनी नई पार्टी बनाई जन अधिकार पार्टी,

और 2015 में लालू यादव ने पप्पू यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया, और इसके बाद लालू यादव और पप्पू यादव में हमेशा हमेशा के लिए रिश्ता खत्म हो गया, पप्पू यादव 2015 के विधानसभा चुनाव ,2020 के विधानसभा चुनाव में कोई खास तीर नहीं मार पाए, उसके बाद क्या था 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने बिहार के कुल 243 सीटों पर प्रचार किया और पप्पू यादव के खिलाफ मधेपुरा सीट में कैंप लगाया, आपको बता दे कि पप्पू यादव मधेपुरा सीट से ही चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन पप्पू यादव ने मना कर दिया मधेपुरा से चुनाव लड़ने के लिए,

पप्पू यादव उसके बाद भी लालू यादव से संपर्क सझना चाहा लेकिन लालू यादव ने उन्हें कोई सीट नहीं दी उसके बाद पप्पू यादव ने कांग्रेस में अपना विलय कर लिया और अभी तक वह कांग्रेस के नेता है, और पप्पू यादव को यह लगा कि गठबंधन में ही उनको चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिल जाए लेकिन वह भी नहीं हुआ और वह सीट चली गई आरजेडी को, बीमा भारती वहां से उम्मीदवार घोषित हुई और तेजस्वी यादव ने उनका जाकर प्रचार भी किया, नतीजा यह हुआ कि पप्पू यादव को पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा, और हार का सामना करना पड़ा लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया से निर्दलीय लड़े और जीते,

यह कहानी थी लाल यादव और पप्पू यादव के दोस्ती और दुश्मनी की जिसमें काफी उतार चढ़ा हुआ और देखना है अब आगे क्या होता है, ताजा खबरों के लिए मेरे न्यूज़ चैनल को पढ़ते रहिए

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