क्या अदानी को ₹1 में 1000 एकड़ जमीन बिहार सरकार ने दी है

बिहार के भागलपुर में गौतम अडानी को 1050 एकड़ की जमीन मात्र ₹1 हर साल के हिसाब से दिया गया है,लाखो कि ज़मीन कि किम्मत मात्र एक रूपए,ये सुनकर सभी को आश्चर्य होगा,यह सुनते ही बिहार सरकार पर प्रश्न उठना तो बनता है कि आखिर ऐसा क्या है कि गौतम अडानी को मात्र एक रुपए में 1000 एकड़ जमीन सौप दी गई है, क्या इससे बिहार को नुकसान नहीं होगा?http://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं पूरा मामला:
यह जो बिहार सरकार ने गौतम अडानी को ₹1 की कीमत पर 1000 एकड़ की जमीन दी है यह अभी अर्ध सत्य है आपको बता दे की कीमत उसकी ₹1 ही है लेकिन जानकारी अभी और भी है,आपको बता दे कि बड़े-बड़े उद्योगपतियों को सरकार जमीन देती है जिससे कि वह फैक्ट्री लगा सके,रोजगार के अवसर पैदा हो और सरकार को इससे लाभ मिले, यह हर सरकार करती है, और ऐसा कई जगह खुलासा हुआ है कि सरकार बिना किसी कीमत पर उद्योगपतियों को जमीन देती है आखिर ऐसा क्या कारण है की सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों को जमीन पर सस्ते दाम पर देती है
क्यों सरकार सस्ते दामों पर जमीन देती है:
सरकार बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट को सस्ते दामों पर जमीन देती हैं ताकि वहां पर बड़े उद्योग स्थापित किया जा सके और रोजगार के अवसर पैदा किया जा सके इससे क्या होता है कि भारत की जीडीपी सुधरती है,और यह काम केवल सेंट्रल गवर्नमेंट ही नहीं बल्कि स्टेट गवर्नमेंट भी करती है, आप किसी राज्य को उठाकर देख लीजिए हर राज्य में स्टेट गवर्नमेंट बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट से संपर्क साधती हैं ताकि वह बड़े-बड़े फैक्ट्रियां लगा सके जिसका उत्पादन भारत में हो और भारत के लोगों को रोजगार मिले,बड़े-बड़े फैक्ट्री डेवलपमेंट के अलावा छोटे-छोटे सेक्टर भी डेवलप होते हैं,जो एमएसएमई सेक्टर में आते हैं जिससे कि आसपास के लोगों को भी रोजगार मिलता है
आइये बात करते हैं अलग-अलग राज्यों की:
ऐसे बहुत लोग हैं जिनकाे रोजगार की आवश्यकता पड़ती है,जो चाहते हैं कि हमारे राज्य में बड़ी-बड़ी कंपनियां सेटअप हो और हमें रोजगार मिले, ऐसे में स्टेट गवर्नमेंट बड़े-बड़े उद्योगपतियों से कॉन्ट्रैक्ट साइन करके फैक्ट्री लगाती हैं और आसपास के लोगों को भी रोजगार का अवसर मिलता है,आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक कंपनी है कॉग्निजेंट को कुछ एकड़ जमीन मात्र 99 पैसे में राज्य सरकार ने दिया है,ऐसी डील्स टीसीएस कंपनी के साथ भी हुई है,फार्मा कंपनी के साथ भी स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट की डील कई एकड़ जमीन को लेकर हुई है,ऐसे हर गवर्नमेंट बड़े-बड़े उद्योगपतियों के साथ करती हैं ताकि भारत की जीडीपी भी बनी रहे और लोकल लोग को छोटे सेक्टर में रोजगार मिले और बड़े सेक्टरों में जो कॉलेज के स्टूडेंट है उनका रोजगार मिले
क्या यह स्कैम है या फिर कुछ और:
अक्सर ऐसा देखा गया है की स्टेट गवर्नमेंट या सेंट्रल गवर्नमेंट जब कोई जमीन किसी बड़े-बड़े उद्योगपतियों को देती हैं ₹1 में, 50पैसे में तो उसे एक स्कैम के तौर पर देखा जाता है लेकिन ऐसा नहीं है,इंडस्ट्रियलिस्ट को जमीन देना कोई स्कैम नहीं है बल्कि यह भारत के डेवलपमेंट का एक हिस्सा है,अगर कोई इसे स्कैम कहता है तो वह गलत है, क्योंकि भारत में बेरोजगारी का स्तर बहुत अधिक है लोग पढ़ाई करके बेरोजगार घूम रहे हैं ऐसे में अगर गवर्नमेंट बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट से टाइ अप करके डेवलपमेंट करती है, रोजगार देती है तो यह कोई बुरी बात नहीं है,इससे भारत का ही विकास होगा
एक प्रश्न उठता है कि जब सरकार को हम पैसा देते हैं तो सरकार खुद क्यों नहीं इंडस्ट्री डेवलप कराती है, क्यों बड़े-बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट से टाइ अप करती है,ऐसा इसलिए करती है सरकार क्योंकि बड़े-बड़े इंडस्ट्रियल सेटअप करके बड़े-बड़े उद्योग पैदा होते हैं, काम और तेजी से होता है जिससे कम समय में ज्यादा डेवलपमेंट देखने को मिलता है और रोजगार के अवसर ज्यादा पैदा होते हैं,कोई भी सरकारी काम में बहुत समय लगता है लापरवाही होती है इसलिए वह प्राइवेट सेक्टर में जाकर काम को और तेजी से करते हैं और इसमें हाई स्कूल, इंटर पास लोगों को भी रोजगार मिल जाता है,जिससे बेरोजगारी का स्तर कम होता है,और वैसे भी अब भारत के जो भी टॉप कंपनियों है जैसे टीसीएस,फार्मा कंपनी, यह सारी कंपनियां अब अपने भारत में ही रोजगार के अवसर पैदा करेंगे क्योंकि अमेरिका ने H1 वीजा का शुल्क बढ़ा दिया है इससे क्या होगा कि भारत से अमेरिका जाने वाले स्टूडेंट की संख्या कम हो जाएगी और उनको भारत में ही नौकरी करना पड़ सकता है, धन्यवाद