प्रति व्यक्ति आय कम लेकिन अमीरों की संख्या ज्यादा

जी हां दोस्तों ये विडम्बना है कि भारत की प्रति व्यक्ति आय सालाना 3000 डॉलर भी नहीं है लेकिन हर 5 दिन में एक अरबपति दे रहा है भारत,जिस देश में 80 करोड लोग मुफ्त अनाज लेते हैं वही देश दुनिया के अरबपतियों की संख्या में तीसरे नंबर पर है,इसीलिए कहा जाता है कि एक भारत में कई भारत बसते हैं, ये भारत विकसित है या विकासशील है इस पर सोचने की जरूरत हैhttp://news24hourslatest.in
बढ़ती संख्या अरबपतियों की:
एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत के करोड़पति परिवारों की संख्या में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब भारत में 8,71,700 करोड़पति परिवार है जबकि 2021 में इसकी संख्या थी 4,58,000,निफ्टी 50 सूचकांक 2021 और 2025 के बीच 70% बड़ा है, विविधता में एकता यह भारत का आदर्श वाक्य रहा है लेकिन विभेद की एकता शायद इसके सामाजिक आर्थिक परिवेश की असलियत को उजागर करता है, यहां पर प्रति व्यक्ति आय सालाना $3000 भी नहीं है लेकिन शीर्ष एक प्रतिशत 116 खरब डालर की है जिसमें लगभग 60 फ़ीसदी भूमि अचल संपत्ति और सोने जैसी संपत्तियां हैं और अमीरों का बाकी धन शेयर बाजारों में और अन्य प्रकारों के निवेश में लगा हुआ रहता है
कितने परिवार हैं आमिर:
बर्नस्टीन ने भारत के जो एक प्रतिशत अति धनवान परिवार है उनको तीन श्रेणियां में बाटा है,पहली श्रेणी में सर्वोच्च आय वाले व्यक्ति हैं जिनकी औसत आय 48 लाख डॉलर है और औसतन संपत्ति(1.6 करोड़ रूपए) और शुद्ध संपत्ति 10 से 40 लाख डॉलर(8-25 करोड़ रूपए) और ऐसे लगभग 35000 परिवार है,दूसरी श्रेणी में वें आते हैं जिनकी वार्षिक आय 33 लाख डॉलर है और शुद्ध संपत्ति 2 लाख से 10 लाख डॉलर यानी कि डेढ़ से आठ करोड़ है ऐसे परिवारों की संख्या 60 लाख है और अंत में 97% ऐसे हैं जिनकी औसत वार्षिक आय केवल 5000 डॉलर है यानी की ₹4,00,000 और ऐसे करीब 32 करोड़ परिवार है
भारतीय आय छुपाने में माहिर:
आपको पता है कि चुनाव उम्मीदवार के हलफनामे में एक महत्वपूर्ण बात पता चली है कि जब उम्मीदवार सांसद परिवार की संपत्ति एक प्रतिशत की वृद्धि होती है तब रिपोर्ट की गई आए संपत्ति अनुपात में पॉइंट 6% से अधिक की कमी होती है मतलब की जो परिवार जितना अमीर होता है उसकी आय उतना ही घटाकर बताई जाती है,हारून इंडिया के अनुसार 334 अरबपति है 2023 में भारत में और फोर्स के अनुसार 205, 65% लोग भारत में अपने दम पर या अपने ही उद्योग से अरबपति, करोड़पति हो रहे हैं
सबसे ज्यादा अमीर कहां पर है:
भारत में देखा जाए तो सबसे ज्यादा अमीर मुंबई में है, महाराष्ट्र में 1,78,600 करोड़पति परिवार है जिसमें मुंबई में 1,42,000 परिवार सबसे आगे हैं, आपको बता दे की 2021 के बाद करोड़पति परिवारों में 194% की वृद्धि देखी गई थी वहीं नई दिल्ली में 6,82,00 परिवार हैं बेंगलुरु में 3,16,00 परिवार हैं और यह भी बता दे कि भारत के शीर्ष 10 राज्यों में देश के 80% करोड़पति रहते हैं पिछले दशक की बात करें तो करोड़पतियों में 120% की वृद्धि हुई थी जिसमें बेंगलुरु का नाम दुनिया में तीसरे नंबर पर था
अमीरों की आबादियों में तीसरे स्थान पर है भारत:
अमेरिका में 502 अरबपतियों की संख्या है और सबसे अमीर व्यक्ति हैं एलोन मस्क, चीन में 450 अरबपति है और सबसे अमीर व्यक्ति हैं झांग यिमिंग,उसके बाद आता है भारत जहां 205 अरबपतियों की संख्या है और भारत में सबसे अमीर व्यक्ति है मुकेश अंबानी और बात करें सबसे कम अरबपति संख्या वाले देश की तो वह है यूके जहां मात्र 55 अरबपति हैं जिसमें माइकल फ्लैट सबसे अधिक अमीर है
जिस देश में प्रति व्यक्ति आय $3000 भी नहीं है, जहां 80 करोड़ से अधिक आबादी मुफ्त अनाज पर जीती है वहां हर 5 दिन में एक अरबपति पैदा होते हैं,अब आप सोचिए जरा अरबपतियों की संख्या में वृद्धि दिन प्रतिदिन हो रही है लेकिन एक समाज ऐसा भी है जहां अमीरों का नामोनिशान भी नहीं है, ऐसे लोग हैं 80 करोड़,इसका सबसे बड़ा फैक्टर है देश की आबादी, भारत की आबादी लगभग 140 करोड़ है और सरकार इस पर कोई कानून नहीं लाती हैं जिसकी वजह से जनसंख्या बढ़ती जा रही है और यही कारण है कि महंगाई भी बढ़ती जा रही है और रोजगार के अवसर भी कम हो रहे है, इसीलिए गरीबी मिटने का नाम नहीं ले रही है,सरकार की लापरवाही के वजह से भारत का अमीरी गरीबी का संतुलन बिगड़ा हुआ है अगर सरकारी पैसा अच्छे से इंप्लीमेंट हो रोजगार का सृजन हो तो गरीबों को काम किया जा सकता है लेकिन सरकारों को क्या है वह अपना परिवार का, अपने रिश्तेदारों का बैंक बैलेंस मेंटेन करते हैं और नौकरी देते हैं, बाकी जो नौकरी लायक है वह भटकते रहते हैं,उदाहरण के तौर पर आप देखिए अगर किसी विभाग में 30,000 पद आने वाले हैं तो उसे पद के लिए लाखों लड़के आवेदन करते हैं और नतीजा यह निकलता है कि सिलेक्शन होने में दिक्कत होती है और लड़के दर-दर भटकते रहते हैं यह सारी व्यवस्थाएं सरकार को देखनी चाहिए,अगर सरकार पारदर्शिता से काम करेगी तो नौकरी भी दी जा सकती है और जहां तक हो सके गरीबों को भी काम दिया जा सकता है,धन्यवाद
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