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आखिर पहली बार CWC की मीटिंग बिहार में होने का क्या मतलब

आखिर पहली बार CWC की मीटिंग बिहार में होने का क्या मतलब

आखिर पहली बार CWC की मीटिंग बिहार में होने का क्या मतलब
आखिर पहली बार CWC की मीटिंग बिहार में होने का क्या मतलब
                                                                                                                                                                                                                                                          लगभग 84 साल बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग बिहार में होने जा रही है,इस मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,सोनिया गांधी,प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल होंगे,अभी तक बिहार में कांग्रेस की कोई मीटिंग नहीं हुई थी,वाेटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बिहार की जनता में एक माहौल बनाया और उसके बाद यह मीटिंग की शुरुआत की,इस मीटिंग का मात्र उद्देश्य यही है कि बिहार में कांग्रेस और मजबूत करनाhttp://news24hourslatest.in
CWC मीटिंग का उद्देश्य क्या है:
पटना में कांग्रेस कमेटी की जो बैठक हुई है वो आजादी के बाद बिहार में होने वाली पहली CWC कि बैठक कहा गया है,आईए जानते हैं इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है
1-कांग्रेस का कहना है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वोट चोरी है,राहुल गांधी ने वोट चोरी का आरोप लगातार इलेक्शन कमीशन और भाजपा पर लगाया और वोट अधिकार यात्रा बिहार में शुरू की,अब इस बैठक के जरिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह लोकतंत्र के रखवाले हैं, लोकतंत्र के खिलाफ कोई भी अन्याय होगा कांग्रेस अब बर्दाश्त नहीं करेगी
2-यह बैठक आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है,कांग्रेस की तरफ से सीट बंटवारे को लेकर,मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी अहम बैठक साबित हो सकता है
3-बिहार के कई कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि इस बैठक से कांग्रेस की सक्रियता बिहार में और बढ़ेगी
4-सीडब्ल्यूसी की इस बैठक से कांग्रेस यह साबित करने में लगी है की बिहार को कांग्रेस तरक्की की राह पर ले जाना चाहती है क्योंकि सबको पता है कि बिहार में दो ही पार्टियों इस समय सबसे महत्वपूर्ण है राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड,कांग्रेस का तो नामोनिशान भी नहीं था लेकिन राहुल गांधी के वोट अधिकार यात्रा से कांग्रेस को थोड़ी फुर्ती मिली है बिहार में
5-कांग्रेस के नेताओं का कहना है की स्वतंत्रता के बाद पहली बार यह CWC की बैठक बिहार में हुई है इसलिए यह विशेष महत्व रखता है
6-सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन में जो द्वेष है उसको दूर करना,किसको कितनी सिट मिले उस पर विचार करना,कांग्रेस को पता है कि यह जो वोट चोरी का मुद्दा है यह जनता को छू गया है
7-कांग्रेस हर वर्ग को अपनी तरफ आकर्षित करने में लगी है ताकि हर जाति के लोग उसे वोट दे सके
कांग्रेस मजबूती के साथ खड़ा होना चाहती है बिहार में:
अभी तक बिहार में कांग्रेस का कोई नामोनिशान भी नहीं था,बिहार की जनता कांग्रेस को बिहार का मानती नहीं थी,बिहार में दो ही पार्टी सक्रिय हैं लालु यादव की राष्ट्रीय जनता दल और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड इन्हीं दोनों पार्टी का वर्चस्व बिहार में अभी तक कायम है, लालु यादव मुख्यमंत्री रहे, उनकी पत्नी मुख्यमंत्री रही,लालु यादव के बेटे तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री रहे, उसके बाद नीतीश कुमार अब तक मुख्यमंत्री है बिहार के,भले ही यह दोनों पार्टियों किसी के साथ गठबंधन में रही हो लेकिन मुख्यमंत्री या तो लालू यादव के परिवार से कोई बनता है या नीतीश कुमार,लेकिन पिछले कुछ सालों से राहुल गांधी लगातार भारत भ्रमण कर रहे हैं, कभी खाट सभा किया, कभी भारत जोड़ो यात्रा की तो अब वोट अधिकार यात्रा बिहार में किया है, जिसके वजह से कांग्रेस को थोड़ी जान मिलती दिख रही है
राहुल गांधी को पता है कि बिहार में कांग्रेस को लाना मतलब बहुत बड़ा काम करना है इसलिए वह कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं बिहार की जनता को लुभाने का, हमने देखा कि कैसे वोट अधिकार यात्रा के दौरान हजारों लाखों की भीड़ लेकर राहुल गांधी निकले थे और अब आजादी के बाद पहली बार जो बैठक हुई है सीडब्ल्यूसी की वह भी बिहार के पटना में हुई
दो पार्टियों से है मुकाबला कांग्रेस का:
कांग्रेस अगर बिहार में अपना गढ़ मजबूत करना चाहती है तो उसे राजद और जेडीयू से लड़ना होगा,इंडिया महागठबंधन में कांग्रेस आरजेडी एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन तेजस्वी यादव का चेहरा राहुल गांधी के चेहरे से कहीं बड़ा दिखता नजर आता है,बिहार में सीट बंटवारे को लेकर इन दोनों पार्टियों में काफी घमासान हो रहा है यही कारण है कि तेजस्वी यादव ने एक बयान में कहा है कि वह सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेंगे,लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं चाहती कांग्रेस का कहना है कि 100 से 110 सिट कांग्रेस को मिले और तेजस्वी यादव यह रिस्क नहीं लेना चाहते हैं क्योंकि उनके मन में यह भी है कि अगर कांग्रेस को सिट ना मिली तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रहेगा,अब आगे देखते हैं कि इस महागठबंधन में क्या निर्णय निकलता है, क्या राहुल गांधी अपने बयान में ये कब कहेंगे कि तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं,फिलहाल अभी तक कांग्रेस पार्टी ने यह कहीं नहीं कहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव होंगे,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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  • नमस्कार मेरा नाम दिव्य प्रकाश दिव्य है मैं Blogger और Youtuber हूं मैं अपनी वेबसाइट पर देश दुनिया की ताजा खबरें दिखाता हूं यहीं मेरी वेबसाइट है @news24hourslatest.in

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