गांधी को गाली देने वाले यह पढ़ ले

गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ,दुबला पतला संवाले रंग वाला यह इंसान ऐसी विचारधारा के साथ पैदा हुआ जिसे ना आज की पीढ़ी भूला सकती है और ना आने वाली पीढ़ी,इस देश की आत्मा है गांधी क्योंकि जी अहिंसा और सत्य की राह पर चलते हुए उन्होंने अंग्रेजों से लड़ाई की ऐसा इस युग में किसी के लिए संभव नहीं है,एक अंग्रेज ऐसा नहीं था जो गांधी को गोली मार सके अंग्रेजों मे वह ताकत ही नहीं थी कि वह गांधी को गोली मार सके, अंग्रेज कहते थे गाँधी वन मैन आर्मी हैhttp://news24hourslatest.in
आइंस्टीन ने क्या कहा था:
महात्मा गांधी के बारे में आइंस्टीन ने कहा था हमारे समय में जितने भी पॉलीटिशियंस हुए उनमें से सबसे उच्च विचार,सबसे अच्छे पॉलीटिशियन गांधी है और शायद ही आने वाली पीढ़ियां इस बात पर बिलीव ना करें कि ऐसा भी कोई इंसान था,जिससे अंग्रेज डरते थे, लेकिन आइंस्टीन की कही हुई बात आज प्रासंगिक हो रही है क्योंकि आज के युवा गांधी को केवल व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के जरिए जानते हैं,उनको पढ़ने की कोशिश नहीं की इसलिए वह उन्हें गाली देते हैं
आपको बता दे कि जितने महापुरुष गांधी के बाद हुए या फिर गांधी के समय हुए सब गांधी की विचारधाराओं को नमन करते हैं और उनके राह पर चलने की कोशिश करते हैं लेकिन चल नहीं पाते,आपको बता दे कि लगभग 80 से 90 देश में गांधी के बूत लगे हुए हैं,आज के इस दौर में ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसकी प्रतिमा 80 से 90 देश में लगी हुई है एकमात्र गांधी है जिनकी प्रतिमा 80 से 90 देश में लगी है,आपने देखा कि G20 में दुनिया के टॉप 20 देश के राष्ट्रीय अध्यक्ष एकत्रित हुए और नंगे पैर गांधी की समाधि के सामने नतमस्तक हुए, सोचिए आप उस आदमी की ताकत कितनी होगी और वह आदमी इस युग में जिंदा भी नहीं है,गांधी ने कभी नहीं कहा कि मेरे प्रतिमा के आगे नतमस्तक हो यह ताकत है उस दुबले पतले इंसान की की दुनिया के बड़े से बड़े नेता भी इस इंसान के आगे झुकते हैं,एक समय था की अंग्रेजों ने उन्हें ट्रेन से नीचे फेंक दिया था आज वही अंग्रेज उनके प्रतिमा के आगे नतमस्तक होते हैं यह गांधी की ताकत
बड़ी अजीब विडम्बना है की आज के इस दौर में की जिस देश ने गांधी जैसा महापुरुष पैदा किया उसी देश के युवा उसे स्वीकार नहीं रहे हैं,गांधी को पढ़ भी नहीं गए हैं और यही अज्ञानता है आज के युवाओं में की बंटवारे का शाश्वत कारण गांधी को माना जाता है और गांधी के उपर मुस्लिम परस्त का ठप्पा लगाया जाता है,लेकिन आज आपको मैं बताता हूं कि गांधी से बड़ा कोई हिंदू नहीं था गाँधी हे राम को ऐसे जपते थे कि हिंदू मुसलमान नहीं होता था,धर्मनिरपेक्षता का प्रतिक गांधी ही थे और यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है इस देश का की आज के समय में अहिंसा और सत्य को कायरता की श्रेणी में ले जाया जा रहा है और यही कारण है कि देश में आपसी विद्रोह फैल रहा है अगर हम गांधी को पढ़े रहते,समझे रहते तो आपसी भाईचारा कई गुना अभी तक बढ़ गया होता
लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि विश्व की सबसे बड़ी सेना से यह आदमी एक लाठी और धोती पर लड़ गया, सोचिए जिन अंग्रेजो के पास बंदूके थी,राइफल थी उनसे गांधी ने अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर लड़ाई की कितनी बड़ी ताकत है गांधी,आज जो हम विदेशी यात्रा करते हैं यें गाँधी की ही देन है, गांधी उस समय जब देश गुलाम था अंग्रेजों का तब गांधी साउथ अफ्रीका मे पढ़ाई किया और वहां के लोगों को इंसाफ दिलाया,गांधी को मारा नाथूराम गोडसे ने, गोडसे में इतनी औकात नहीं थी कि किसी अंग्रेज को गोली मार सके और अंग्रेजों की इतनी औकात नहीं थी कि गांधी को गोली मार सके
खान सर ने क्या कहा:
खान सर ने कहा कि जिसकी औकात अपने गांव की मुखिया से लड़ने की नहीं है, अपने शहर के विधायक से लड़ने की नहीं है वह युवा गांधी को गाली दे रहा है, वह सवाल पूछ रहा है कि गांधी ने किया क्या था? व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ज्ञान अर्जित करने वाले लोग कभी गांधी को समझ नहीं पाएंगे,गांधी को समझना है तो गांधी की किताबें पढ़ो, गांधी के सत्य और अहिंसा के प्रयोग को पढ़ो,सोच कर देखिए की एक समय ऐसा था जब हम अंग्रेजों के नौकर हुआ करते थे उस दौर में गांधी अंग्रेजों के खिलाफ जाकर लड़े,गांधी कोई गरीब इंसान नहीं थे उनके पिताजी पोरबंदर रियासत के दीवान थे उस स्थिति में भी गांधी अर्धनग्न होकर,एक धोती पहनकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े,गुलामी में गांधी ने जाकर ब्रिटेन में पढ़ाई की आज के युवा ब्रिटेन नहीं पढ़ पाते हैं,मेरे कहने का मतलब है की हैसियत देखी गांधी की कितनी थी लेकिन जीवन उन्होंने कैसे बिताया एक धोती पहन कर, 30 करोड़ युवाओं की आवाज बनकर,आंदोलन कर के उनके हाथ में कभी बंदूक नहीं आया फिर भी अंग्रेजों को भगाने में सबसे अहम योगदान गांधी का रहा,आज के दौर में अगर लड़ाई हो जाती है तो बात-बात पर बंदूक निकल जाता है और वो गांधी थे जो धोती और एक डंडे में अंग्रेजों को भगा दिया और आज की कुछ कम मानसिकता वाले युवा उनको गाली दे रहे है, लानत है ऐसे युवाओं पर इससे अच्छे तो विदेश के युवा हैं जो गांधी को अपना आदर्श मानकर उनकी राह पर चलने की कोशिश करते हैं और हमारे देश की युवा गांधी को गाली देते हैं अभी भी वक्त है समझ जाइए,गांधी को पढ़िए तभी जान पाएंगे कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है
