चिराग से दूरी बना रहे हैं बीजेपी के नेता

क्या बीजेपी चिराग पासवान से किनारा कर सकती है:
पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर काफी दबाव डाला था,इस बार भी चिराग की चाहत है कि उनकी सिट बढ़ाई जाए,लेकिन भाजपा उनकी सीट बढ़ाने के ऑफर को स्वीकार नहीं कर रही है,बिहार विधानसभा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान,प्रदेश प्रभारी विनोद कापड़े चिराग पासवान के संपर्क में अब नहीं आ रहे हैं,उसके बाद जब गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री हुई,तब जाकर चिराग पासवान शांत नजर आए, हालांकि चिराग पासवान पहले भी कह चुके हैं कि उनकी पार्टी सम्मानजनक सिट चाहती है,जिन सीटों पर चिराग पासवान दावा कर रहे हैं उन्हीं सीटों पर जनता दल यूनाइटेड भी अड़ी हुई है,जिसके चलते लोक जनशक्ति पार्टी(पासवान) ने यह भी कह डाला कि उनकी पार्टी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश कर रही है,आपको बता दे की 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से बाहर रहकर नीतीश कुमार का खेल बिगाड़ दिया था, अब यही कारण है कि एनडीए गठबंधन यह सोच रही है कि 2020 जैसी गलती न दोहराई जाए और इस बार कोशिश है बीजेपी की की चिराग पासवान को मना कर पार्टी की अखंडता को बरकरार रखा जाए,क्योंकि बीजेपी को पता है कि चिराग पासवान का दलित वोट बैंक बहुत मजबूत है,आपको बता दें कि बिहार में दलितों की संख्या लगभग 21 करोड़ है ऐसे में दलित वोट बैंक बिहार के विधानसभा चुनाव का समीकरण बिगाड़ सकता है,अब क्या चिराग पासवान एनडीए गठबंधन से अलग होंगे?क्योंकि सीटों का बंटवारा अभी बहुत मुश्किल है
जैसा कि हम सबको पता है कि चिराग पासवान और एनडीए में अभी सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है,ऐसा कहा जा रहा है कि चिराग पासवान ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं,मैं आपको बता दूं कि अब चिराग पासवान की राजनीति केवल एनडीए गठबंधन तक सीमित नहीं है वह अब सड़कों पर,जनता के दिलों में राज करने की राजनीति कर रहे हैं,चिराग पासवान खुद को भविष्य में बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा भी देखना चाहते हैं,इसीलिए वह चाहते हैं कि उनकी पार्टी और मजबूत हो और हमेशा सुर्खियों में रहे,चिराग पासवान की पकड़ दलितों में बहुत अधिक है इसलिए एनडीए गठबंधन अभी कोई रिस्क लेना नहीं चाहता है अगर चिराग पासवान एनडीए से अलग होते हैं तो सबसे बड़ा विकल्प उनके सामने जन सुराज पार्टी है,क्योंकि चिराग पासवान प्रशांत किशोर की तारीफ लगातार कर रहे हैं,चिराग पासवान प्रशांत किशोर की नीतियों पर बहुत भरोसा कर रहे हैं और प्रशांत किशोर भी चिराग पासवान की तारीफ कर चुके हैं, ऐसे में कयास यह भी लगाया जा रहा है कि चिराग पासवान प्रशांत किशोर के साथ मिल सकते हैं,अगर एनडीए उन्हें सम्मानजनक सिट नहीं देती है तो
आपको बता दे की चिराग पासवान अब केवल एनडीए गठबंधन का हिस्सा नहीं है बल्कि वह पटना की सड़कों की राजनीति करना चालू कर चुके हैं,लोगों के दिलों में जगह बनाना शुरू कर चुके हैं और यहां तक की पटना में चिराग पासवान का पोस्टर भी लग चुका है जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जा रहा है अगले चुनाव में और चिराग पासवान भी खुद को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाहते हैं आने वाले भविष्य के चुनाव में, बिहार के लोग चिराग पासवान को एक युवा,तेजतर्रार नेता के तौर पर भी देखते हैं,चिराग पासवान अपने कई भाषणों में और साक्षात्कारों में यह दावा कर चुके हैं कि बिहार को पहले नम्बर का राज्य बनाना है जिसके लिए उन्हें राज्य का बागडोर संभालने का मौका मिलना चाहिए,चिराग पासवान हमेशा चाहते हैं कि उनकी पार्टी एक अलग पहचान के तौर पर बिहार में देखी जाए, इसलिए चिराग पासवान खुद को युवा विकासवादी नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने में लगे हुए हैं,आपको बता दे कि बिहार में दलितों की आबादी लगभग 16% है जिसमें से दुसाध समाज के लोग 5% है और इसी समाज के लोग चिराग पासवान के पिताजी स्वर्गीय रामविलास पासवान के मुख्य जनाधार हैं और दलितों के साथ-साथ चिराग पासवान हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हैं
अब देखना है की सीट बंटवारे के इस सफर में कौन सबसे पहले अपने गंतव्य पर पहुंचता है,अमित शाह के दखल देने के बाद क्या चिराग पासवान मान जाएंगे या फिर एनडीए से हटकर दूसरे दलों में शामिल होंगे,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल