उ.प्र में भाजपा के साथ,बिहार में अकेले चुनाव लड़ेंगे राजभर

बिहार विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP / सुहासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एनडीए का दामन छोड़ अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में लगे हैं,भाजपा से बगावत करने के बाद बिहार में करीब 153 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है,यह वही राजभर हैं जो उत्तर प्रदेश में जब अखिलेश यादव के साथ थे तो कहते थे कि बीजेपी की एक भी सीट नहीं आएगी और जब बीजेपी के साथ है तो कहते हैं समाजवादी पार्टी की एक भी सीट नहीं आएगी,यहां तक की वो जिले के नाम भी गिनवा देते थे कि कौन से जिलों में समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुलेगा और अब बिहार में अपने दम पर चुनाव लड़ने जा रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
बिहार में प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं राजभर:
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP / सुहासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का कहना है की बिहार विधानसभा चुनाव को मध्य नजर रखते हुए उनकी मुलाकात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से हुई लेकिन सीट शेयरिंग के मुद्दे को लेकर उन्होंने नजरअंदाज कर दिया यानी कि बीजेपी नहीं चाहती है कि राजभर को कोई भी टिकट मिले कि वह चुनाव लड़ सके बिहार में इसलिए ओमप्रकाश राजभर ने निर्णय किया कि वह एनडीए गठबंधन से अलग होकर बिहार में चुनाव लड़ेंगे और यह दावा भी कर दिया कि 153 सीटों पर उनकी पार्टी उम्मीदवार उतारेगी,और यही नहीं राजभर ने 47 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान भी कर दिया है
क्यों अकेले लड़ रहे हैं बिहार में चुनाव:
राजभर ने साफ-साफ कह दिया है कि अब वह एनडीए से अलग होकर बिहार में चुनाव लड़ेंगे इसके लिए उन्होंने 153 सीटों का चयन भी कर दिया है जहां उनकी पार्टी प्रत्याशी उतारेगी लिए,जानते हैं मुख्य कारण की क्यों बिहार में अकेले चुनाव लड़ रहे हैं
1-ओमप्रकाश राजभर की पार्टी बीजेपी से यह अपेक्षा की थी कि उन्हें कुछ सीट बिहार में दी जाए चुनाव लड़ने के लिए लेकिन बीजेपी ने उन्हें नजर अंदाज कर दिया, एसबीएसपी को कोई सीट नहीं मिली,राजभर का कहना था कि उनकी मांग 4 से 5 सिट की थी लेकिन वह भी सीट भाजपा ने उन्हें नहीं दिया
2-एक इंटरव्यू में राजभर ने कहा कि अगर उन्हें चार या पांच सिट नहीं दी जाएगी तो वह स्वतः ही चुनाव लड़ेंगे, आपको बता दे कि राजभर का फोकस पूर्वी बिहार के जिलों पर है जहां राजभर समुदाय के लोग ज्यादा हैं, बिहार में राजभर समुदाय की आबादी करीब 30 से 40 लाख के बिच है और 20 से 30 सीटों पर उनका असर दिखता है
3-ओमप्रकाश राजभर ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनको मेरी जरूरत पड़ती है तो मुझे बुलाते हैं और जरूरत खत्म हो जाती है तो भूल जाते हैं,आगे उन्होंने कहा कि जब मुझे उनकी आज जरूरत पड़ी है तो मुझे दरकिनार कर दिया गया,उन्होंने आगे यह भी कहा कि बीजेपी चुनाव की स्थिति को अच्छे से समझती है,जब जरूरत होगा तो आपको पूछेगी जब जरूरत खत्म तो आपको पूछना बंद
4-ओम प्रकाश राजभर के इस फैसले का मतलब यह है की छोटे दलों को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए अगर आप उसे नजर अंदाज करेंगे तो वह अकेले चुनाव लड़ेंगे और फिर बड़ी पार्टियों को नुकसान पहुंचाएंगे
5- ओमप्रकाश राजभर अगर अकेले चुनाव लड़ते हैं और कुछ सिट जीत जाते हैं तो इसका नुकसान एनडीए गठबंधन को झेलना पड़ेगा क्योंकि वह महागठबंधन का भी हिस्सा हो सकते हैं,ओम प्रकाश राजभर की पकड़ ओबीसी,राजभर समाज के लोग,निषाद,मल्लाह,केवट लोहार,कुम्हार,नाई,धोबी,तेली,लोहार इन सब पर अच्छी खासी पकड़ है
बीजेपी अच्छे से जानती है कि ओमप्रकाश राजभर को बिहार में सीट क्यों नहीं देना है क्योंकि उनकी पकड़ जिन जातियों पर है उससे कहीं अधिक पड़ बिहार के अन्य पार्टी कि उन जातियों पर है इसलिए ओम प्रकाश राजभर की जो पकड़ है बिहार में वह उतनी नहीं है जितनी उत्तर प्रदेश में में है इसलिए बीजेपी उनको सीट देने में आनाकानी करती है,वैसे भी एनडीए गठबंधन में ऐसे कई दल हैं जो इन जातियों पर अच्छी खासी पकड़ रखते हैं बिहार में जिनको कुछ सिट दे दी गई है लेकिन ओमप्रकाश राजभर इस बात को नहीं समझ रहे हैं उन्होंने बीजेपी से बगावत करके बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी 153 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 47 सीटों पर उन्होंने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए थे,लोगों का कहना है कि ओमप्रकाश राजभर सीधे तौर पर एनडीए गठबंधन को नुकसान पहुंचाना चाह रहे हैं क्योंकि वह महागठबंधन में भी जा सकते है,फिलहाल यह राजनीति है किसके साथ क्या होगा कोई नहीं जानता आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
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