बहुत अंतर है तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव में

जी हां दोस्तों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के औरस पुत्र कहे जाते हैं,तेज प्रताप यादव लालू यादव के बड़े बेटे हैं और तेजस्वी यादव लालू यादव के छोटे बेटे हैं लेकिन दोनों की सोच,स्वभाव,राजनीतिक समझ कार्य करने की शैली अलग-अलग है,दोनों ही नेता है,दोनों ही जनता के लिए काम करने के लिए उत्सुक रहते हैं लेकिन दोनों के व्यवहार में बहुत अंतर देखने को मिलता है,तेज प्रताप यादव फिलहाल अपने परिवार से अलग रह रहे हैं उनके पिता ने 6 साल के लिए पार्टी से भी उन्हें निकाल दिया है ऐसे में तेज प्रताप यादव ने एक अपनी नई पार्टी बनाई है जिसका नाम है जनशक्ति जनता दल और आपको पता दे की महुआ विधानसभा सीट से तेज प्रताप यादव चुनाव भी लड़ रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
आईए जानते हैं दोनों में क्या अंतर है:
1-तेज प्रताप यादव:तेज प्रताप यादव लालू यादव के बड़े बेटे हैं पहली बार राष्ट्रीय जनता दल से 2015 में महुआ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए,लेकिन वर्तमान में वह अपने पार्टी से,अपने परिवार से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिए गए हैं और अब उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है जिसका नाम है जनशक्ति जनता दल और महुआ विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ रहे है,आपको बता दे की तेज प्रताप यादव खुले दिल के इंसान है जो मन में आता है वह कह देने में हिचकते नहीं है,राजनीति के अलावा आध्यात्म,मंदिर,पूजा पाठ के काफी शौकीन माने जाते हैं तेज प्रताप यादव
2-तेजस्वी यादव:लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे है तेजस्वी यादव,2015 में पहली बार राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीते उसके बाद तुरंत उपमुख्यमंत्री भी बने,फिलहाल वह 2025 में भी राघोपुर विधानसभा सीट से नामांकन कर चुके हैं और इस बार तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित हो चुके हैं इंडिया गठबंधन की तरफ से,तेज प्रताप यादव कभी-कभी उग्र रूप में भी देखे जाते हैं,उनका व्यक्तित्व भी खुला और अप्रत्याशित माना जाता है
दोनों के स्वभाव में काफी अंतर है:
वैसे तो लालू यादव के दोनों लड़के अपने आप में एक बड़े नेता हैं परंतु दोनों के स्वभाव में काफी अंतर है,तेज प्रताप यादव एक नेता के साथ-साथ अध्यात्म,मंदिर भक्ति भाव को मानने वाले इंसान हैं तेज प्रताप यादव कभी-कभी विद्रोही व्यक्तित्व के भी हो जाते हैं ऐसा कहा जाता है कि तेज प्रताप बहुत खुले दिल के इंसान है जो दिमाग में आता है वह बोल देते हैं,छिपाने वाली कोई प्रवृत्ति नहीं है,हमने कई बार टीवी पर,सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव के अलग-अलग व्यक्तित्व को देखा है कभी कृष्ण बनकर,कभी राधा बनकर,कभी शिव बनकर,वहीं अगर बात करें तेजस्वी यादव की तो थोड़ा सा अलग तरीका का इनका व्यक्तित्व है परंतु यह भी कभी-कभी अपना उग्र रूप दिखा देते हैं,लोग इन्हें स्वभाव से शांत,समझदार और एक अच्छा राजनीतिज्ञ मानते हैं
दोनों की राजनैतिक समझ क्या कहती है:
तेज प्रताप यादव का व्यवहार राजनीति वाला कम है भावनात्मक और अध्यात्म वाला ज्यादा है,तेज प्रताप यादव खुद को राजद परिवार का अर्जुन कहते हैं और जनता से सीधा जुड़ना चाहते हैं,लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि वह राजनीति में उतने मर्मज्ञ नहीं है जितने तेजस्वी यादव हैं,तेजस्वी यादव हमेशा से युवाओं के रोजगार,शिक्षा,पलायन मतलब जो भी राजनीतिक मुद्दा है उन्हीं को लेकर चलते हैं,और ऐसा यह भी कहा जाता है कि लालू यादव की विरासत को तेजस्वी यादव ही आगे बढ़ाएंगे,अगर साधारण शब्दों में कहा जाए तो तेज प्रताप यादव की विचारधारा,धर्म,परंपरा और भावनाओं पर आधारित है वही तेजस्वी यादव की विचारधारा शिक्षा,रोजगार,विकास पर केंद्रित रहती है
हम सबको पता ही होगा की तेज प्रताप यादव फिलहाल अपने परिवार से,राष्ट्रीय जनता दल से 6 साल के लिए निष्कासित हो चुके हैं,आपने देखा होगा वह दृश्य जब महुआ विधानसभा सीट से तेज प्रताप यादव अपने हाथों में दादी की तस्वीर लिए हुए नामांकन करने जाते हैं कितना मार्मिक दृश्य है एक पिता के होते हुए जो पूर्ण रूप से राजनीति में सक्रिय था उसकी तस्वीर ना लेकर अपनी दादी की तस्वीर लेकर जाते हैं,एक पिता ने अपने बड़े बेटे को परिवार से अलग कर दिया वहीं छोटे बेटे के साथ विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हैं कारण यह है कि तेजस्वी यादव पूर्ण रूप से राजनीति में सक्रिय हैं शिक्षा, रोजगार,विकास की बात करते हैं परंतु तेजस्वी यादव राजनीति कम धर्म,परंपरा,अध्यात्म इन सब पर ज्यादा केंद्रित रहते हैं,और लालू यादव को यह सब पसंद नहीं है उन्हें तो राजनीति पसंद है,तेज प्रताप यादव को लोग इमानदार और दिल का साफ व्यक्ति वाला इंसान कहते हैं,एक लड़का जिसका पूरा परिवार साथ छोड़ दिया हो वह जनता में जाकर अपनी भावनाओं को प्रकट भी नहीं कर पा रहा है,आपको बता दे की तेज प्रताप यादव मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं आए हैं वह जनता से सीधे जुड़ना चाहते हैं विधायक बनने के लिए आए हैं परंतु वही तेजस्वी यादव को केवल बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी दिख रही है और अपने पिता का साथ,तेजस्वी यादव अगर चाहते तो अपने पिता से कहकर अपने बड़े भाई को साथ लेकर चल सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया यह बहुत बड़ा अपराध तेजस्वी यादव ने किया है वैसे भी कहा जाता है की राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता और यह लालू परिवार ने सिद्ध कर दिया,खैर अब देखते हैं आगे क्या होता है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
