प्रशांत किशोर के आत्ममंथन के पीछे क्या छिपा है

बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली वहीं एनडीए गठबंधन को 202 सिट मिली और इंडिया गठबंधन को मात्र 35 सिट पर सिमटना पड़ा,सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी बनकर उभरी, बिहार में नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले चुके हैं लेकिन प्रशांत किशोर को यह अंदाजा भी नहीं था कि उनकी एक भी सीट नहीं निकलेगी बिहार में,पार्टी के सभी कार्यकर्ता,सभी प्रत्याशी मायूस है,ऐसे में प्रशांत किशोर का रणनीति बिहार में पूर्ण रूप से फेल हो गया,प्रशांत किशोर मौन उपवास पर चले गए हैं,वह पश्चिमी चंपारण में गांधी आश्रम में आत्ममंथन कर रहे हैंhttp://news24hourslatest.in
प्रशांत किशोर क्यों कर रहे हैं आत्ममंथन:
बिहार विधानसभा में बुरी तरीके से परास्त होने के बाद प्रशांत किशोर अब मौन व्रत धारण कर लिए हैं पश्चिमी चंपारण के गांधी आश्रम में,प्रशांत किशोर और उनके अन्य कार्यकर्ता आत्ममंथन करने बैठ गए हैं,आपको बता दे कि पिछले 24 घंटे से प्रशांत किशोर मौन उपवास धारण किए हुए हैं,महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद अपने अन्य कार्यकर्ताओं के साथ आत्ममंथन करने गांधी आश्रम में बैठे हैं,प्रशांत किशोर के साथ उनके हजारों कार्यकर्ता गांधी आश्रम में आत्म मंथन कर रहे हैं,प्रशांत किशोर ने इस मौन उपवास को राजनीति से ना जोड़कर बल्कि आत्मा की प्रायश्चित करना बताया,सारे कार्यकर्ता पार्टी के मुखिया यह बैठकर सोच रहे हैं कि उनकी बातें जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाई,आखिर क्या कमी रह गई थी कि उनकी बातें जनता तक पहुंचने में देरी हो गई
कैसे मिली पूर्ण बहुमत एनडीए को:
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को जनता ने खूब वोट दिया,बढ़-चढ़कर मतदान किया,एनडीए गठबंधन को जनता ने 202 सिट दिए वहीं इंडिया गठबंधन को मात्र 35 सीट,तेजस्वी यादव अपनी राघोपुर की सीट बचा पाए,लेकिन जनसुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई,150 सीटों पर जनसुराज ने अपने प्रत्याशी खड़ा किए थे,प्रशांत किशोर ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, जनता से ₹20 लेकर एटीएम कार्ड बनवाए थे और यह दावा किया था कि सरकार बनने के बाद ₹20,000 हर घर को मिलेगा,रोजगार की गारंटी दिए थे,जो युवा बिहार से पलायन कर चुके हैं उनको वापस बुलाएंगे और बिहार में ही फैक्ट्री लगाएंगे और उन्हें नौकरी देंगे ताकि वह अपने परिवार के साथ भी रह सके,लेकिन प्रशांत किशोर के सारे वादे जनता ने क्यों ठुकरा दिए,इसी के आत्म मंथन के लिए प्रशांत किशोर और उनके हजारों कार्यकर्ता पश्चिमी चंपारण के गांधी आश्रम में आज मंथन कर रहे हैं,मौन उपवास के साथ,प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि जितने भी नए विधायक हुए हैं उनको बधाई,नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई आगे उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि एनडीए सरकार बिहार की जनता के सारे वादों को पूरा करेगी,और जो हमसे और हमारे पार्टी के कार्यकर्ताओं से गलती हुई है उसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं,प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि हम एक दिन का मौन उपवास तो रख रहे हैं,हम हार तो गए बेशक लेकिन हमने कोई गुनाह तो नहीं किया है,हम फिर लड़ेंगे फिर 5 साल मेहनत करेंगे जनता के दिलों में जगह बनाएंगे,उन्होंने एक बड़ा बयान दिया कि जहां जाति की राजनीति और धर्म की राजनीति चलती है वहां पर हमने जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीती की और लोगों के बीच गए हमने कोई गुनाह नहीं किया है भले ही हमार हार गए
क्या कांग्रेस को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है:
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी बुरी तरीके से हार हुई है,61 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और मात्र 6 सिट जीती,कांग्रेस का ग्राफ 2010 से गिरता चला रहा है और कांग्रेस वोट चोरी का आरोप लगा रही है,कांग्रेस के कार्यकर्ता और राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता को मंथन करना चाहिए कि आखिर उनसे कौन सी गलती हो गई कि उनकी सिट इतनी कम आई,कांग्रेस ने वोट चोरी का मुद्दा जमकर उठाया था बिहार में और अभी भी अन्य राज्यों में उठा रहे हैं लेकिन जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है आखिर क्यों, इसके कई कारण हो सकते हैं एक कारण राहुल गांधी अक्सर चुनाव प्रचार को बीच में छोड़कर चले जाते हैं, ज्यादा दिखावा भी करते हैं,गलत गलत बयान बाजी भी उनके मुंह से निकलती है,तेजस्वी यादव को पहले ही लग गया था कि कांग्रेस के साथ उनका बेड़ागड़क होने वाला है लेकिन करते भी तो क्या करते महागठबंधन में तो रहना था,अब तेजस्वी यादव को भी समझ में आ गया होगा कि कांग्रेस के साथ उनका तालमेल नहीं बैठ पाएगा क्योंकि जिन मुद्दों को कांग्रेस लेकर चलती है वह मुद्दा बिहार के लोगों ने खारिज कर दिया,तेजस्वी ने जो मुद्दा उठाया था वह मुद्दा बिहार के लोगों के लिए बहुत जरूरी था लेकिन कांग्रेस से गठबंधन करने का नतीजा यह हुआ कि तेजस्वी यादव को भी बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा,हालांकि जो भी पार्टियां बुरी तरीके से हारी है उनको सबको आत्म मंथन करना चाहिए कि आखिर गलती कहां रह गई,खैर अब देखते हैं आगे इन पार्टियों का कैसा प्रदर्शन रहता है,जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरा न्यूज़ चैनल
ये भी पढ़े:36 में से 27 मंत्री ही क्यों बनाये नितीश
