मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का एससी-एसटी पर आया फैसला

हाल ही में देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत बने हैं, उन्होंने आते ही दिव्यांगों के लिए बने एससी एसटी जैसा कानून के निर्देश दे दिए, क्योंकि सोशल मीडिया पर दिव्यांगों का बहुत मजाक उड़ाया जा रहा था इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया है, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिव्यांग जानू के सम्मान के लिए कड़े कानून बनाने की वकालत की है सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिव्यांगजनों और अन्य बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के लिए एससी एसटी के तर्ज पर कानून बनाने का निर्देश दिया हैhttp://news24hourslatest.in
दिव्यांगों पर मजाक करना होगा भारी:
जो नियुक्त मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाला बागची ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि दिव्यांगजनों के लिए एससी एसटी एक्ट की तरह क़ानून बनाया जाए, दिव्यांगों पर मजाक करना होगा भारी 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ जातिवादी गली भेदभाव हिंसा को जुर्म मानता है और इन अपराधों में गैर जमानती वारंट बनाया जाए का
सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा:
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की पीठ ने कहा है कि मजाक किसी भी हद तक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा सूचना एवं प्रसारण मंत्री की ओर से भी कहा गया कि जो भी दिव्यांगजन है उनके खिलाफ अगर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी हो रहा है तो उसके लिए सख्त कानून बनाया जाए आपको बता दे कि इस मुद्दे पर सुनवाई कर सप्ताह बात करने का फैसला हुआ है
युटयुबर्स सावधान रहे:
एक फाउंडेशन है जिसका नाम है समा कर फाउंडेशन इसी की याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर रही है यह फाउंडेशन पीड़ित लोगों के कल्याण के लिए काम करती है, आपको बता दे कि जो भी इनफ्लुएंसर्स है जो मध्य-प्रदेश टिप्पणियां करते हैं जैसे इंडिया स्कोर टैलेंट के उसे समय रहना और दूसरे भी इनफ्लुएंसर्स जैसे विपिन गोयल सोनाली ठक्कर जगदीश तंवर इन सभी के अभद्र जोक्स को टारगेट किया है, कोर्ट में सट्टा देश बिहार की युटयुबर्स को भी सावधान रहने की जरूरत है ऐसी अवध टिप्पणियां ना की जाए, हम आए दिन देखते हैं कि कैसे यह मीडिया इनफ्लुएंसर गंदी-गंदी टिप्पणियां करते हैं जिससे समाज का वातावरण दूषित होता है और कोई रोकने वाला भी नहीं है लोग उठा के लगते हैं ऐसी गंदी टिप्पणियों पर
अश्लीलता से आगे का मुद्दा है:
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि यह मामला सिर्फ अश्लीलता तक ही सीमित नहीं है बल्कि यूजर जेनरेटेड कंटेंट में परवर्सिटी तक भी है, जिसे लोग अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करने में लगे हुए आपको बता दिए की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ऐसे कंटेंट क्रिएटरों के लिए सत्य निर्देश लाने का फैसला किया है उन्होंने ऐसे कंटेंट क्रिएटरों के लिए कोई रेगुलेशन ना होने की चिंता जताई है
कुछ दिशा निर्देश बनाए गए हैं:
ऐसा कहां जा रहा है कि कुछ दिशा निर्देश बनाए गए हैं तो मामले की सुनवाई के लिए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने कुछ नए-नए निर्देश प्रस्तावित किए हैं, ताकि ऐसे कंटेंट क्रिएटर भधे भधे कमेंट ना करें
आज का दौरा सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटरों का दौर है वैसे में जितने युटयुबर्स है जब का पैसा कमा रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे भी कंटेंट क्रिएटर है जो समाज को गंदा करने में लगे हुए हैं, आपने देखा कैसे समय रहना पर भी कैसे हुआ था उनका जो शो आता है उसमें अलग-अलग गेस्ट भी रहते हैं और ऐसी ऐसी भक्ति गली गंदे गंदे कमेंट पास करते हैं जिसे आप अपने परिवार के साथ सुन तक नहीं सकते, ऐसे लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि यह एक पूरी काम को बदनाम कर रहे हैं, आज के दौर में ऐसे कंटेंट क्रिएटर बिल्कुल संस्कार भूल चुके हैं और समाज को भी संस्कारहीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं सिर्फ चंद पैसों के लिए, पैसा कमाना बहुत अच्छी बात है लेकिन इस गंदे तरीके से अगर आप पैसा कमा रहे हैं तो यह पैसा आपको बर्बाद भी करेगा क्योंकि इसका पाप आपको जरूर भुगतना पड़ेगा, समाज आपको आपके चरित्र और शब्द से पहचानता है अगर आपकी वाणी में मधुरता है और आपका व्यक्तित्व सही है तो समझ में आपकी प्रतिष्ठा बरकरार रहेगी अन्यथा ऐसे लोगों से देश को इतना नुकसान झेलना पड़ेगा यह आने वाली कौन नहीं समझ पा रही है सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश एकदम सराहनीय है धन्यवाद
