बांग्लादेश से रिश्ता तोड़ेगा भारत

जब से बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरी है तब से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में कोई सुधार हो दिख नहीं रहा दोनों देशों में एक दूसरे के
प्रति द्वेष बढ़ता ही जा रहा है जो भी कृत्य आज बांग्लादेश में हुआ है इससे स्पष्ट है कि भारत में भी विरोधाभास बांग्लादेश के प्रति बढ़ता जा रहा है,भारत बांग्लादेश के प्रति अपना रवैया बदलना चाह रहा है,लगातार बांग्लादेश के अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से पूरा माहौल बिगड़ चुका है,बांग्लादेश के बदलते परिदृश्य से राजनीतिक भावनात्मक दृष्टिकोण के बजाय व्यावहारिक और समस्या के समाधान वाली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति अपनानी चाहिएhttp://news24hourslatest.in
क्या बांग्लादेश से रिश्ता तोड़ेगा भारत:
हमनें देखा कि कैसे एक मामूली सामान्य इंसान जिसका नाम है दीपू चंद्र दास उसे कुछ बेरहम लोगों ने मारा और उसके परिवार के सामने जला दिया,उस आग की चिंगारी कई देशों तक पहुंची,सब ने इसका विरोध किया अल्पसंख्यक होना भारत से कोई सीखे जहां हर एक कौम की उतनी ही इज्जत है जितनी बहुसंख्यक की है लेकिन वही बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक होना एक बदनामी है,लोग घरों में घुसकर हिंदुओं को मार रहे है, आखिर ऐसे देश में अल्पसंख्यक कैसे सुरक्षित रहेंगे क्या वे अपना देश छोड़कर दूसरे देश चले जाए या फिर उन्हें कोई खास जगह शिफ्ट किया जाए ऐसी स्थिति आन पड़ी है बांग्लादेश में की हर हिंदू अब वहां से भागना चाह रहा है
17 करोड़ की जनसंख्या में फंसा हिंदू:
आपको बता दे कि बांग्लादेश की जनसंख्या लगभग 16 करोड़ है जिसमें से एक करोड़ लगभग हिंदू है मतलब की हर 10 लोगों में केवल एक हिंदू है और नौ मुसलमान,और यही कारण है कि हिंदू ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है अगर वही हिंदुओं की भी संख्या मुसलमान के बराबर होती तो आज माहौल कुछ अलग होता आखिर इतनी नफरत मुसलमान को हिंदुओं के प्रति कैसे हो गई,जिस देश को हमने राष्ट्र गान दिया,जिस देश को हमने मुसीबत में साथ दिया आज उस देश के लोग आपस में एकजुट होकर अल्पसंख्यक समुदाय को मार रहे हैं और कारण कुछ नहीं है सिर्फ गुस्सा,नफरत, आक्रोश एक समुदाय के प्रति वहीं भारत एक ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यक लोग जैसे मुसलमान खुलकर जीते हैं और बहुसंख्यक की भांति रहते हैं जिन्हें कोई कुछ नहीं बोल सकता,आप देख लीजिए वेस्ट बंगाल को जहां ममता बनर्जी की सरकार एवं मुसलमान को कितनी आजादी है,वहां भी हिंदुओं को मारने की घटना आए दिन आती रहती है भारत एक ऐसा देश है जहां हर समुदाय के लोगों की इज्जत है केवल मुसलमान की नहीं यहां जैन,सिख,पारसी हर समुदाय के लोग इस आजादी से रहते हैं जितनी आजादी से हिंदू लेकिन वही आप बांग्लादेश और पाकिस्तान को देख लीजिए वहां हिंदुओं को हमेशा प्रताड़ित किया जाता है और बिना किसी कारण मार दिया जाता है
क्या शेख हसीना को बांग्लादेश भेज देना चाहिए:
क्या अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस उसके मुल्क बांग्लादेश को भेजने के लिए विचार करना चाहिए, हमें पता है कि भारत अगर शेख हसीना को बांग्लादेश भेज देगा तो वहां उनकी मृत्यु निश्चित है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें दिल्ली रखना चाहिए लेकिन कोई ऐसा रास्ता जरुर निकालना चाहिए जिससे कि भारत की हित हो,आपको बता दे की शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बहुत प्रभाव पड़ा है,बांग्लादेश के प्रति भारत का रवैया हमेशा से अच्छा रहा है एक हिंदू की हत्या के बाद भारत के लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि बांग्लादेश से अब कोई रिश्ता नहीं रखना चाहिए,जिस तरह बांग्लादेश आज नफरत की आग में जल रहा है वह दिन दूर नहीं जब बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या नाम मात्र रह जाएगी क्योंकि अब यह आग बहुत दूर तक फैल रही है,केवल दीप चंद्र दास ही नहीं उसके बाद गोपाल दास को भी मारा गया गोपाल दास की गलती यह थी कि उन्होंने हाथ में कलावा बाधा हुआ था उसके बाद लगातार हिंदुओं के घर फोड़े गए
सेकुलर के सूरमा चुप क्यों है:
बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर भारत के सेकुलर लोग चुप हैं जबकि वहीं फिलिस्तीन पर जमकर बोलते हैं, फिलिस्तीन का जमकर सपोर्ट करते हैं तब यह तमाम सेकुलर लोग चुप हो जाते हैं इनके मुख से हिंदुओं के लिए कोई संवेदना निकलते ही नहीं है वही जब अगर किसी दूसरे धर्म के लोग मारे जाते तो यह सारे सेकुलर नेता आगे आ जाते हैं,फिलिस्तीन का बैग लेकर सदन में जाने वाली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी चुप है,राहुल गांधी भी चुप है,ममता बनर्जी,अखिलेश यादव सब के सब नेता इस घिनौने कृत्य पर कुछ नहीं बोल रहे हैं
भारत में भले ही मुसलमान,सिख,इसाई,अल्पसंख्यक माने जाते हैं लेकिन यह रहते हैं बहुसंख्यक की भाती, इन्हें किसी बात का कोई डर नहीं है,आपने देखा कैसे फरीदाबाद के अलफलाह यूनिवर्सिटी में 6 मुसलमान डॉक्टर भारत के लोगों को मारने की साजिश किये और देश चुप है किसी को कोई परवाह नहीं,धन्यवाद
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