अगर गरीब हो तो न्याय से दूर रहो

इस देश में गरीबों को ताकतवर लोग के सामने न्याय मिलना बहुत दूर की बात हो गई है,जब मामला ताकतवर लोगों के बीच में हो तो गरीबों को न्याय मिल ही नहीं सकता ऐसा ही केस देखने को मिला है उन्नाव रेप केस के आरोपी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में,दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर के उम्र कैद की सजा को जमानत देते हुए टाल दिया, कुलदीप सिंह सेंगर का मामला 2017 का है जब एक उन्नाव की बच्ची का रेप किया गया और उसके बाद उसे मारने की धमकी दी गई और जब पीड़िता कोर्ट में गई तो उसके परिवार जान से मार दिया गयाhttp://news24hourslatest.in
कोर्ट के चक्कर लगाते लगाते एड़िया घुस गई:
उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दे दि,इस पर जो पीड़िता है वह दिल्ली के लाल किले के पास धरने पर बैठ गई,लेकिन हुआ कुछ नहीं पीड़िता के पिता को विधायक के गुंडो ने खूब मारा,उसके घर परिवार को मारा,कितने लोगों की मौत हो गई,सबूत मिटा दिए गए,गवाह मिटा दिए गए और अंततः आरोपी को जमानत मिल गई,बेचारी पीड़िता दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चक्कर पर चक्कर काट रही थी,पैरों की एड़ियां घीस गई लेकिन न्याय नहीं मिला,लगभग 6 साल बाद उसे अचानक जमानत क्यों दे दी गई,कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्र कैद की सजा को डालते हुए जमानत कर दे दि
सीबीआई का बड़ा हाथ है कुलदीप सेंगर के पीछे:
सवाल यह है कि आखिर रेप पीड़िता ने सीबीआई अफसर के खिलाफ तहरीर क्यों दी है आखिर कुलदीप सिंह सिंगर की रिहाई के पीछे सीबीआई का कौन सा षड्यंत्र है,सोचिए 17 साल की एक मासूम बच्ची जिसने अभी अपने जीवन की मखमली शुरुआत कर रही थी उसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि वह पूरे अपने जीवन काल तक उसे भूला नहीं पाएगी,बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उस समय उस लड़की को अपने घर बुलाया नौकरी का लालच दिया और उसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया,दिल पर पत्थर रखकर पिता ने हिम्मत जुटाई परंतु पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया,हर बार पीड़िता ने शिकायत की और हर बार उसके दरवाजे बंद कर दिए गए लेकिन आखिरकार 2018 में लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की तब यह मामला पूरी तरीके से खुल गया,इतना मामला होने के बाद भी बीजेपी ने आरोपी को अपने पार्टी में रखा निकाला तक नहीं,मामला खुलने के बाद विधायक के भाई और उनके गुंडो ने पीड़िता को धमकाना शुरू किया,जान से मारने की धमकी लगातार देनी शुरू हो गई यहां तक की पीड़िता के पिता को भी फर्जी केस में जेल में डाल दिया गया,पीटने के बाद बेचारा पिता की भी मौत हो गई
महिला सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ करती भाजपा:
बीजेपी का शुरू से नारा रहा है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में नारी सम्मान की बात करते हैं,महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, और यह वादा भी करते हैं कि कोई भी महिलाओं को हमारी सरकार से कष्ट नहीं होगा लेकिन सबके सामने 2017 का जो कांड हुआ वह पूरी महिला जाति को झकझोर कर रख दिया और बीजेपी पर एक धब्बा लग गया कि वह महिलाओं के लिए कुछ नहीं कर सकती और जबकि यह कांड भाजपा के विधायक ने ही किया उसके बाद यह हाल है,सिर्फ महिला सशक्तिकरण के नारे लगाने से महिला सशक्तिकरण नहीं होगा उसके लिए धरातल पर उतरना पड़ेगा
सीबीआई की जांच में क्या पता चला:
जब कोर्ट ने इस मामले को सीबीआई को सौपा तो सीबीआई ने जांच पड़ताल की जिसमें यह पाया गया कि पीड़िता को परिवार को कुलदीप सेंगर और उनके भाई गुंडो ने धमकाया है,वह जान से मारने की धमकी भी दी है,लेकिन 2019 में एक नया मोड़ देखने को मिला जब पीडिता अपने मौसी और वकील के साथ जा रहे थे तब अचानक एक ट्रक वाले ने उनकी गाड़ी को टक्कर मारा जिसमें वकील घायल हो गए और मौसी की मौके पर मौत हो गई,ये एक्सीडेंट नहीं सोची समझी साजिश थी सबूत मिटाने की लेकिन कहा जाता है ना जाको राखे साइयां मार सके ना कोई,उसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले की गंभीरता को समझा और न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा कीया, उसके बाद जांच हुई और उसके बाद कुलदीप सिंह सिंगर को जेल हुई उसके बाद उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई,लेकिन अब उसे जमानत दे दी गई है और कोर्ट ने कहा है की सीबीआई की जांच में कुछ कमियां पाई गई,कोर्ट का कहना है कि सीबीआई ने इस मामले को ठीक से जांच पड़ताल नहीं किया हम सबको पता है कि सीबीआई केंद्र सरकार के अधीन है और केंद्र में बीजेपी की गवर्नमेंट है तो क्या यह बीजेपी का दबाव है कि कुलदीप सेंगर को रिहा कर दिया गया या फिर कोई और चाल है धन्यवाद
ये भी पढ़े:ममता बनर्जी और बीजेपी की अलग-अलग चाल
