मजबूरी थी सेंगर को वापस जेल भेजना

2017 के उन्नाव दुष्कर मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा को डालते हुए जमानत दे दी थी,सूचना मिलने पर पीड़िता ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया पीड़िता के साथ कई लोग भी विरोध में शामिल थे,पीड़िता को जबरन हटाया गया ताकि मामले को दबा दिया जाए लेकिन मामला इतना बढ़ता गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया,सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने के बाद आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को फिर जेल जाना पड़ा,हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज करते हुए हाईकोर्ट की फैसले पर रोक लगा दी और सेंगर को वापस जेल भेज दिया गयाhttp://news24hourslatest.in
उन्नाव का पूरा मामला क्या था:
2017 का उन्नाव का यह मामला भाजपा के पूर्व एवं निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का,16,17 साल की बच्ची को नौकरी के बहाने बुलाया गया और फिर उससे दुष्कर्म किया गया और जब पीड़िता ने कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ बोलना शुरू किया तो उसे धमकी दी गई,उसके परिवार को मारा गया,उसके पिताजी की हत्या की गई,यहां तक की पीड़िता का FIR तक पुलिस लिख नहीं रही थी और जब पीड़िता मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करने गई तो मामला और प्रासंगिक हो गया मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और कुलदीप सिंह सेंगर को उम्र कैद की सजा हुई,उसके बाद 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर की उम्र कैद की सजा को टालते हुए जमानत दे दी थी और जब मामला बढ़ता गया तो पीड़िता ने फिर गुहार लगाइए,फिर विरोध प्रदर्शन किया और जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी अब जेल में ही रहेगा सेंगर: हाई कोर्ट के फैसले के बाद कुलदीप सिंह सेंगर रिहा कर दिया गया,उसके बाद जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और जमानत पर रोक लग गई,अब कुलदीप सिंह सेंगर जेल में ही रहेंगे,आपको बता दे कि पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप सिंह 10 साल की सजा काट रहे हैं और उस मामले में उन्हें जमानत नहीं मिली है दुष्कर्म का मामला और इससे जुड़े अन्य मामले अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यूपी की निचली अदालत में इसे दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था, उसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया और उम्र कैद की सजा पर रोक लगा दी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से क्या आदेश दिया था:
आपको बता दे कि कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा को टालते हुए जमानत दे दी थी लेकिन पीड़िता ने इसका जमकर विरोध प्रदर्शन किया,पूरे देश में विरोध हुआ और मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए उसकी जमानत पर रोक लगा दी हाई, कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे सेंगर को यह कहते हुए निलंबित कर दिया था कि वह पहले ही 7 साल और 5 महीने जेल में बिता चुका है,हाई कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया था,आपको बता दे कि कुलदीप सिंह सेंगर पीड़िता के पिता की मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है और उस मामले में उसे अभी जमानत नहीं मिली है
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिया यह फैसला:
आपको बता दे की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जे.के माहेश्वरी,न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ में कुलदीप सिंह सेंगर को नोटिस जारी कर सीबीआई की जाँच का पर जवाब मांगा,जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है आपको बता दे कि सीबीआई की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया,सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस मामले पर पुनः विचार करेगी,आपको बता दे की हाई कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता ने फिर विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया,पीड़िता का कहना था की कुलदीप सिंह सेंगर कोे रिहा होने के बाद उसके जान को खतरा है,उसके परिवार को खतरा है पीड़िता ने यह भी कहा कि उसे कभी भी मारा जा सकता है
क्या मजबूरी थी सेंगर को वापस जेल भेजना:
आपको बता दे कि कुलदीप सिंह सेंगर भाजपा से ही विधायक है लेकिन जब उन पर बलात्कार के आरोप लगे तो बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया,उसके बाद पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई तो उसे उम्र कैद की सजा दी गई थी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया फिर सुप्रीम कोर्ट में मामला गया,फिर उनकी रिहाई पर रोक लगा,क्या कुलदीप सिंह सेंगर को जेल भिजवाने में भारतीय जनता पार्टी का हाथ है क्योंकि अगर सेंगर रिहा हो गया तो भारतीय जनता पार्टी को बहुत नुकसान हो सकता है और 2027 उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं
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