क्या विपक्ष से लोगों का भरोसा उठ गया

विपक्ष की लगातार हार के बाद ऐसा लग रहा है जैसे लोगों का भरोसा विपक्ष से उठता जा रहा है,भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का नेतृत्व इस समय राहुल गांधी के हाथ में है लेकिन जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस का नेतृत्व संभाला है तब से कांग्रेस लगातार चुनाव हारती आ रही है और अगर कहीं सरकार भी बनी है तो बहुत मुश्किल से,आखिर ऐसा विपक्ष के साथ क्यों हो रहा है क्या विपक्ष जनता के नसों को पकड़ने में विफल है,आपने देखा कि कैसे बिहार में चुनाव हुआ जिसका कांग्रेस पर इतना पूरा असर पड़ा की मात्रा 6 सीटों में कांग्रेसी मत गई और उसके साथ उसके सहयोगी पार्टियों का भी बहुत बुरा हाल हुआhttp://news24hourslatest.in
क्या कारण है विपक्ष कमजोर होता जा रहा है:
आज के इस समय में विपक्ष खासतौर कांग्रेस को लेकर लोगों के मन में निराशा है,रील्स हो या फिर सोशल मीडिया हो कांग्रेस का मजाक दिन प्रतिदिन बनता जा रहा है और ऐसा लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस धीरे-धीरे समाप्ति के कगार पर है,आपको बता दे कि कई रिपोर्ट के अनुसार यह पता लगा है कि कांग्रेस का नेतृत्व जब से राहुल गांधी कर रहे तब से कांग्रेस 95 चुनाव हार चुकी है,ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस समाप्त हो रही है लेकिन क्या यह वास्तविक है नहीं ऐसा नहीं है कि कांग्रेस समाप्त हो रही है बल्कि इस बात का संकेत है कि कांग्रेस की विचारधारा विपक्ष की भूमिका से कुछ लोग असहज है,विपक्ष लगातार मंदिर का विरोध,हिंदुओं का विरोध करते चले आ रहे हैं,जिसका एक अच्छा खासा प्रभाव पड़ा है भारतीय जनमानस पर
2014 के बाद लगातार विपक्ष गिरता चला रहा है:
2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आई तब से लेकर 2025 तक विपक्ष मजबूत नहीं हो सका,जितने भी इंडिया गठबंधन के नेता हैं सबका यही हाल है कुछ जगह भले ही उन्हें सीट मिली हो लेकिन वास्तविकता यह है कि उनका नेतृत्व कमजोर हो रहा है,आपने देखा कि राहुल गांधी ने कैसे भारत जोड़ो यात्रा की हजारों किलोमीटर पैदल चलकर लोगों से संवाद किया जिससे कांग्रेस में एक नई योजना का संचार तो हुआ और इस कारण 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 99 सिट जीतकर 2019 की तुलना में अपनी ताकत को बढ़ाया, इंडिया ब्लॉक ने भाजपा को पूर्ण बहुमत से रोका तो यह कहना गलत होगा कि कांग्रेस कमजोर हो रही है,हां लोग धीरे-धीरे उसे समझने की कोशिश कर रहे हैं यही तो लोकतंत्र के खासियत है
कांग्रेस का नेतृत्व राहुल गांधी नहीं कर पा रहे हैं:
आपको बता दे की राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता बने और उन्होंने बेरोजगारी,महंगाई,जाति जनगणना,सामाजिक समानता,पर्यावरण जैसे मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरा और उसका अच्छा खासा प्रभाव लोगों के दिमाग में बैठ चुका है लेकिन कांग्रेस के सामने चुनौतियों की कमी नहीं है 2024 के बाद कुछ राज्यों में चुनावी हार,संगठन के भीतर मतभेद और भाजपा की सशक्त चुनौती मशीनरी के सामने कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ गई है,कांग्रेस में जितने भी युवा महिला हैं वह सब हासिये पर खड़े हैं,उन्हें एक तरफ से मौका नहीं मिल पा रहा है आगे आने का
देश को मजबूत विपक्ष चाहिए:
भले ही 2014 में देश में कोई विपक्ष नहीं था इसीलिए भाजपा सरकार ने जैसे मन किया वैसे कानून बनाया, संविधान में संशोधन किया,इसलिए कहा जाता है कि देश में विपक्ष की मौजूदगी बहुत जरूरी है क्योंकि वह सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध कर सकती है,एक मजबूत विपक्ष लोकतंत्र की रीढ़ होता है,सत्ता से सवाल पूछना नीतियों की समीक्षा करना और वैकल्पिक दृष्टि पेश करना यही सोच स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है, कांग्रेस आज भी वही लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती है लेकिन कांग्रेस में केवल परिवार से आगे कोई नहीं जा पा रहा है इतनी दिक्कत नेता हुए कांग्रेस के लेकिन सब पार्टी छोड़ दिए हैं राहुल गांधी के नेतृत्व करने में कांग्रेस थोड़ा सा पीछे चला गया है,कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सिर्फ नाम के अध्यक्ष हैं,85 साल की उनकी उम्र है,मल्लिकार्जुन खड़गे भले ही अध्यक्ष है लेकिन पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी ही करते हैं जो भी फैसला लेना होता है राहुल गांधी,प्रियंका गांधी ही करते हैं और यही कारण है कि पार्टी के अन्य कार्यकर्ता कांग्रेस के नेतृत्व से नाराज है
क्या करना चाहिए कांग्रेस को:
अगर कांग्रेस को सत्ता में आना है तो उन्हें पहले अपने संगठन को मजबूत करना पड़ेगा,जितने कार्यकर्ता हैं उनको मजबूती देनी पड़ेगी और जो भी कांग्रेस की रीढ़ कहे जाने वाले नेता हैं उनको आगे करना पड़ेगा तब जाकर कांग्रेस में कुछ हो सकता है,राहुल गांधी से कहीं बड़े अनुभवी लोग कांग्रेस में है लेकिन केवल परिवार की वजह से पीछे रह गए हैं अगर कांग्रेस को सत्ता वापस करनी है तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आगे करना होगा धन्यवाद
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