मतदाता सूची में गड़बड़ UP में बवाल

UP की मतदाता सूची से क़रीब तीन करोड़ नाम काटे गए,SIR को लेकर उत्तर प्रदेश में अभी भी समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में जंग हो रही है,अखिलेश यादव का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी SIR के ज़रिए भी अपने वोटर जोड़ना चाहती है,आपको बता दें कि कि उत्तर प्रदेश में SIR का मसौदा सूची जारी हो चुकी है और क़रीब 2.89 करोड़ यानी लगभग 18% मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं जिनमें से लगभग 47 लाख मृत घोषित हो चुके हैं और लगभग दो करोड़ स्थानान्तरित हो गए हैंऔर लगभग 25 लाख दोहरे वोटर है और इसी को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव नें भारतीय जनता पार्टी पर कटाक्ष कियाhttp://news24hourslatest.in
कितने करोड़ मतदाता बचे हैं:
आपको बता दें कि पहले जो दर्ज हुआ था उसमें क़रीब 15 करोड़ मतदाताओं में से अब 12 करोड़ मतदाता बचे है,यानी कि क़रीब हर पाँचवा मतदाता सूची से बाहर हो गए है,वोटर लिस्ट में शामिल क़रीब 13 करोड़ मतदाताओं में से 90% मतदाताओं की मैपिंग की जा चुकी है,आपको बता दें कि सबसे ज़्यादा 12 लाख मतदाताओं ke नाम लखनऊ में कटे हैं और सबसे कम लगभग 85354 वोटरों ke नाम महोबा से कटा है
11 राज्यों की सूचि में कितने नाम हटे:
आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश से पहले 11 राज्यों की मसौदा सूचियाँ चुकी है इनमें क़रीब चार करोड़ मतदाताओं के नाम कटे है,आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में 42 लाख छत्तीसगढ़ में 27 लाख तो केरला में 24 लाख अंडमान निकोबार में तीन लाख 97 लाख गुजारात में गोवा मे एक लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिवडा ने क्या कहा:
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिवडा ने कहा कि नई मतदाता सूची SIR के बाद तैयार करने के निर्देश है,नए मतदाता कार्ड बनाने का निर्देश भारत निर्वाचन आयोग से मिलेगा तो यह कार्य किया जाएगा,उन्होंने आगे ये भी बताया कि जो ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल 12.55करोड़ में 11.55 करोड़ लोग यानी 91.75% लोगों की मैपिंग चुनाव आयोग ने कर ली है यह वह मतदाता है जिनका मिलान वर्ष 2003 की सूची में शामिल लिया गया है अब उन्हें कोई नहीं भेजी जाएगी, ल बाकि 8.25% लोगों को नोटिस भेजी जा रही है नोटिस जारी होने के बाद उनसे दस्तावेज़ मांगे जाएँगे, फिर जाँच होगी और अगर सही पाया गया तो वोटर बनाया जाएगा
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश है:
बता दे कि एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के निर्देश स्पष्ट है कि वैध मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी वही जो अवैध है उनकी जांच होगी अगर वह घुसपैठियों है तो उन्हें बाहर किया जाएगा जो व्यक्ति भारत के नागरिक हैं या जिसके पास भारत में निवास के संबंध के वैद्य प्रमाण हैं उनका नाम मतदाता सूची में रहेगा भले वोे महिला हो पुरुष हो लेकिन जिनका भारत से कोई रिश्ता नहीं है,अवैध तरीके से भारत मे रह रहे है उनको भारत से निकाला जाएगा
एसआईआर लोकतांत्रिक सुधार की प्रक्रिया है:
आपको बता दे कि SIR लोकतांत्रिक सुधार की प्रक्रिया है इसका लक्ष्य बस इतना है कि जितने भी वैध मतदाता है उनको मताधिकार से वंचित नहीं किया जाए बल्कि मतदाता सूची में शामिल करके और विश्वसनीय बनाया जाए,एसआईआर के प्रक्रिया में नागरिकों को किसी भी राजनीतिक दल या संगठन द्वारा फैलाई जा रहे बहकावे में नहीं आना चाहिए क्योंकि इससे आपसी द्वेष बढ़ता है, जितनी भी राजनीतिक पार्टियों हो चाहे सत्ता पक्ष की हो या विपक्ष की हो सब आपस में एक दूसरे से जुबानी जंग करते नजर आ रहे हैं,हाल ही में आपने देखा कि कैसे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जमकर भारतीय जनता पार्टी पर बरस रहे हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिए लगभग 3 करोड़ नाम काटे गए हैं और अखिलेश यादव का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी एसआईआर के जरिए अपने वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में है
कोई नाम छूटना नहीं चाहिए:
आपको बता दे की एसआईआर के जरिये मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल होना है लेकिन अगर गलती से भी कोई वैध मतदाता का नाम छूट जाता है तो उसे पर्याप्त मौके दिए जाएंगे अपने नाम जुड़वाने के लिए और इसमें यह नहीं देखा जाएगा कि वह महिला या पुरुष बस दिक्कत हो रही है कि एसआईआर को लेकर कुछ राजनीतिक दल आपस में एक दूसरे से लड़ाई कर कर जनता में भ्रम फैला रहे हैं उनका यह कहना है कि एसआईआर किसी विशेष वर्ग का नाम काटने के लिए शुरू किया,लेकिन ऐसा नहीं है अब देखते हैं कि मुद्दा 2026 के बंगाल के चुनाव में कितना कर डालता है
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