मजार टूटने के पीछे का असली कारण

देवरिया शहर के गोरखपुर रोड ओवर ब्रिज के नीचे बना अब्दुल गनी शाह मजार जो वर्षों से विवादों के घेरे में था वह आज टूट चुका है,आपको बता दे कि इसके पीछे देवरिया सदर के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी लगे हुए थे पिछले कई महीनों से,कोर्ट का फैसला आने के बाद इस मजार को तोड़ दिया गया,आपको बता दे की 90 के दशक में रामनगीना यादव ने इस मजार का मुद्दा उठाया था उसके बाद उनकी हत्या हो गई थी फिर फर्जी इंद्राज के जरिए बंजर भूमि को मजार के नाम से 1992 में कर दिया गया,इस मजार को लेकर कई बार विवाद भी खड़े हुए हैं लेकिन सार्थक पहल व पैरवी न होने के चलते कोई कार्यवाही नहींhttp://news24hourslatest.in
शलभ मणि त्रिपाठी की मुख्य भूमिका रही:
आपको बता दे की देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी की मुख्य भूमिका रही,उन्हीं के वजह से यह मजार आज टूटा है,2025 में सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी नैना केवल इस मामले को उठाया बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इसकी पूरी जानकारी प्रशासन को दे दी गई थी,उसके बाद कार्रवाई तेजी से शुरू की गई और अंततः सरकारी भूमि पर बना मजार ध्वस्त कर दिया गया,काफी संख्या में भीड़ थी,विपक्ष के लोग इसे देवरिया के इतिहास का काला दिन बता रहे हैं
हिंदूवादी संगठनों ने किया था विरोध:
आपको बता दे की गोरखपुर रोड स्थित मजार का विरोध हिंदूवादी संगठन के लोग आए दिन किया करते थे,यहां तक की प्रशासन को शिकायत भी की इस मजार को लेकर लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होती थी,इस मामले में 25 जून 2025 को सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की साथ ही उन्होंने बताया कि यह मजार अवैध रूप से बना हुआ है और उसका दायरा हर वर्ष बढ़ता जा रहा है,विधायक के इस शिकायत से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया और जांच करने का निर्देश डीएम को दिया
देवरिया के लिए काला दिन:
आपको बता दे की शहर के गोरखपुर रोड ओवर ब्रिज के नीचे बना मजार जो टूट चुका है,उसे काला दिन के रूप में याद किया जा रहा है,समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष व्यास यादव ने अपने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आज का दिन देवरिया के इतिहास में काला दिन के रूप में याद किया जाएगा,उन्होंने अपने बयान में कहा है कि धार्मिक स्थलों से लोगों की भावनाएं जुड़ी होती है,जब धार्मिक स्थलों पर ऐसी कार्रवाई होती है तो लोगों का भावुक होना स्वाभाविक है,देवरिया गंगा जमुना तहजीब के लिए जानी जाती है,आपसी भाईचारे के लिए जानी जाती है,शिव बारात हो या हनुमान जयंती हो अल्पसंख्यक समाज के लोग धूमधाम से मनाते हैं और इस मजार पर भी हिंदू समाज की आस्था जुडी हुई है,उन्होंने आगे कहा कि जब मजार का मामला विभिन्न न्यायालय में विचाराधीन था तो ध्वस्थिकरण में इतनी जल्दी बाजी क्यों की गई
प्रशासन ने पहले ही कर दी थी नाकेबंदी:
आपको बता दे की बुलडोजर चलने से पहले ही प्रशासन पूरे तेवर में आ गया था मौके पर सीओ सिटी संजय कुमार रेड्डी,सदर कोतवाल विनोद कुमार सिंह,ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा,तहसीलदार के मिश्रा भारी संख्या में पुलिस और पीएसी जवानों के साथ पहुंच गए,पुलिस ने वहां के लोगों को हटाया और कई जगह के आवागमन को रोक दिया गया,इसके साथ ही सुभाष चौक,मालवीय रोड रूद्रपुर रोड,पुरवा चौराहा,कसया रोड के विभिन्न स्थान के थानाध्यक्षों को तैनाती दे दी गई थी
उर्स की तिथि निर्धारित होने के बाद मामला और बढ़ गया:
आपको बता दे की मजार पर हर वर्ष उर्स होता रहा है, इस बार भी तीन और चार जनवरी को इसका आयोजन होना था लेकिन पहले ही इस मजार को वैध घोषित कर दिया गया था,न्यायालय द्वारा इसलिए प्रशासन ने उर्स कराने की अनुमति नहीं दी,एसडीएम ने 1 जनवरी को ही इसकी अनुमति देने से मना कर दिया था इसके बाद यह मामला और तूल पकड़ लिया और फिर कार्यवाही हो गई,मजार कमेटी के लोगों से प्रशासन निर्वाचित की और यह भी कहा कि वहां से अतिक्रमण हटाया जाए साथ ही मजार कमेटी के अध्यक्ष राशिद खान ने खुद को अतिक्रमण हटाने की बात कही और शासन को पत्र भी लिख कर दिया,आपको बता दे की मजार कमेटी व मजार के आसपास रहने वाले लोगों को पुलिस ने पहले ही सूचना दे दी थी इसके बाद मजार कमेटी के लोगों ने साथ ही आसपास वाले लोगों को पुलिस ने पाबंद कर दिया और उन्हें नोटिस भी पहुंचा दिया गया थ,सब कुछ बहुत तेजी से हुआ कुछ लोग इसको सही मान रहे हैं तो कुछ पक्ष का कहना है कि यह गलत है फिलहाल कोर्ट का जो निर्णय है उसे पर सबको अमल करना पड़ेगा,अब आगे देखते हैं कि क्या फैसला होता है उस मजार वाले स्थान पर
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