Election Comission:चुनाव आयोग पर क्यों उठते है सवाल?

लोकतंत्र की बुनियाद चुनाव पर ही टिकी है,लोकतंत्र की नीव स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर ही टिकी होती है,दोस्तों भारत का निर्वाचन आयोग भारत के चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभाता है,चुनाव आयोग का गठन देश में निष्पक्ष और पारदर्शी और साफ सुथरा चुनाव करवाने के उद्देश्य से बनाया गया था,भारतीय चुनाव आयोग का गठन एक स्वतंत्र इकाई के रूप में 25 जनवरी 1950 को हुआ था,लेकिन हाल फिलहाल सालों में चुनाव आयोग पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं,आखिर चुनाव आयोग पर उठते सवाल पर अपना रुख स्पष्ट क्यों नही करतीhttp://news24hourslatest.in
विपक्ष ने चुनाव आयोग पर क्या सवाल उठाए:
आपको बता दे की 2024 में महाराष्ट्र में विधानसभा और लोकसभा चुनाव हुए,लोक सभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से सवाल पूछा है की मई 2024 में महाराष्ट्र में जो लोक सभा चुनाव हुआ था और नवंबर 2024 में महाराष्ट्र में जो विधानसभा चुनाव हुआ था,इन दोनो चुनाव में करीब 6,7 महीने का अंतर है, और आपको बता दे की इन 6 महीनो में ही महाराष्ट्र के करीब 40 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है और आपको बता दे की 2019 में जो महाराष्ट्र में विधानसभा सभा चुनाव हुआ था और 2024 में जो महाराष्ट्र में लोक सभा चुनाव हुआ था इन 5 सालों में मात्र 32 लाख मतदाताओ की बढ़ोतरी हुई थी,नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का कहना है की ५ साल में मात्र ३२ लाख मतदाताओ की बढ़ोतरी हुई और ६ महीने में 40 लाख की बढ़ोतरी हुई,ये कैसे हुआ,इस पर चुनाव आयोग चुप क्यों है,इतना बढ़ा इजाफा कैसे हुआ?
बिहार विधान सभा चुनाव 2025 :
दोस्तों कुछ ही महीने में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले है,बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर फिर सवाल उठाया है,तेजस्वी यादव का कहना है की अल्पसंख्यकों और वंचितों,दलितों,कमजोर वर्ग के मतदाताओं को आखिर चुनाव से वंचित क्यों किया जा रहा है,उनका नाम क्यों वोटर लिस्ट क्यों हटाया जा रहा है,तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है,हालाकि चुनाव आयोग का कहना है की आयोग ने एक महीनो के भीतर करीब 8 करोड़ मतदाताओं की सूची को जांचा परखा है आने वाले महीनों में जारी भी कर देगा,ये जो सवाल चुनाव आयोग पर उठ रहे है वो वाकई एक चिंता का विषय है,घर घर जाकर अलग अलग दस्तावेज मांगे जा रहें है और पेपर नही मिलने पर मतदाता सूची से नाम काट दिए जा रहें है
अब आप बताइए अगर मतदाता सूची से नाम गायब कर दिए जायेंगे,वो वोट का मतलब क्या रह जायेगा,ये तो संविधान के अनुकूल की बात है की हमारा अधिकार हमसे छीना जा रहा है
कभी कभी ऐसा देखने और सुनने को मिलता है की इतने फर्जी वोट डाले गए,आखिर ये फर्जी वोट कैसे डाल दिए जाते है,चुनाव आयोग इस पर ध्यान क्यो नही देता,
देश के विभिन्न विभिन्न राज्य जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार,बंगाल जिसमे बंगलदेशी रोहिंग्या घुसपैठियों का नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया है उसे चुनाव आयोग जल्द से जल्द हटाने के काम में जुट गया है,चुनाव आयोग का कहना है कि 2029 के पहले जितने भी फर्जी वोटर है उनकी मतदाता की सूची से नाम हटाए जाएंगे,ये कदम चुनाव आयोग का बहुत प्रशंसनीय और सराहनीय है ,इसका हर पार्टियों को समर्थन करना चाहिए,अगर चुनाव आयोग अपने फैसले पर अडिग रहे और इस देश में नई क्रांति की शुरुआत होगी
भारत निर्वाचन आयोग एक संविधानिक संस्था है,इसके ऊपर देश के हर राज्य के विधानसभा चुनाव,लोक सभा चुनाव की जिम्मेदारी होती है,आपको पता ही होगा की चुनाव आयोग चाहता है तो एक चरण के चुनाव को भी कई चरणों में संपन्न कराने की क्षमता रखता है,चुनाव आयोग को केवल निष्पक्ष ही नही बल्कि अपनी विश्वसनीयता को भी बरकरार रखना चाहिए,अगर कोई उस अपर सवाल उठता है तो उसका जवाब भी तुरंत देना चाहिए ताकि उसकी विश्वसनीयता बनी रहें,लोकतंत्र में सबको वोट देने का अधिकार है,हमारा संविधान हमे इसकी आजादी देता है,ये संविधान की ताकत है की एक गरीब और एक अमीर का वोट एक ही गिना जाता है,
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