यही जिंदगी है जिसका कोई भरोसा नहीं

दोस्तों जिंदगी को कोई भरोसा नहीं है,कब कौन कहा छोड़ कर चला जाए किसी को नही पता,इसलिए कहते है वर्तमान में अच्छे से जी लो भविष्य का किसी को नही पता की हम कहा रहेंगे,आज कल हम हमेशा सतर्क रहते है की कुछ हो ना जाए लेकिन लेकिन बावजूद इसके जान खतरे में पड़ जाती है,खुद को सुरक्षित करने की चाहे कितनी ही कोशिश क्यों न कर ले कोई, लेकिन अगर किस्मत का साथ न हो तो मुसीबत कहीं से भी आ सकती है. कभी-कभी कोई बड़ा हादसा चेतावनी देकर भी निकल जाता है. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. बिना किसी लापरवाही और गलती किए भी कैसे जान पर आफत आ सकती हैhttp://news24hourslatest.in
अहमदाबाद विमान हादसा में यही हुआ सभी यात्री मारे गए जिसमे गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपानी भी शामिल थे,लेकिन कहते है न,”जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”यानी जिसपर भगवान की कृपा होती है उसे कोई नही मार सकता,और ऐसा ही हुआ इस हादसे में सब के सब यात्री मारे गए लेकिन मात्र एक यात्री बच गया,ना जाने इसपर भगवान की कौन सी कृपा बरसी की बच गया,इस आदमी को खुद यकीन नही था की ये बच गया.लेकिन बच गया और इलाज चल रहा है,उसी फ्लाई में एक महिला ने सेल्फी लेकर अपने परिवार को भेजी जिसमे गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी भी पीछे बैठे थे,उसने लिखा की जिस फ्लाइट में मैं आ रही हूं उसमें गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी भी बैठे है लेकिन कुछ ही मिनट बाद प्लेन क्रैश हो जाता है और एक को छोड़कर सब ईश्वर के श्री चरणों में चले जाते है इसलिए कह रहा हूं जीवन का एक सेकंड का भी भरोसा नही,
ऐसे हादसे में तो लोग सदमें से ही मर जाते हैं,हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां है जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में बंधी हैं. कब, कौन, कैसे उठेगा यह कोई नहीं बता सकता है’.
ऐसे में देश के प्रसिद्ध कवि डॉक्टर कुमार विश्वास की चार लाइने याद आती है की
“वक्त के क्रूर छल का भरोसा नहीं
आज जी लो कि कल का भरोसा नहीं
दे रहे है वो अगले जनम की ख़बर
जिनको अगले ही पल का भरोसा नहीं ”
साहिर लुधियानवी की जीवन के ऊपर ये रचना दिल को छू लेती है आइए पढ़ते है ये रचना
मौत कभी भी मिल सकती है लेकिन जीवन कल न मिलेगा
मरने वाले सोच समझ ले फिर तुझ को ये पल न मिलेगा
कौन सा ऐसा दिल है जहाँ में जिस को ग़म का रोग नहीं
कौन सा ऐसा घर है जिस में सुख ही सुख है सोग नहीं
जो हल दुनिया भर को मिला है क्यूँ तुझ को वो हल न मिलेगा
मरने वाले सोच समझ ले फिर तुझ को ये पल न मिलेगा
इस जीवन में कितने ही दुख हों लेकिन सुख की आस तो है
दिल में कोई अरमान बसा है आँख में कोई प्यास तो है
जीवन ने ये फल तो दिया है मौत से ये भी फल न मिलेगा
मरने वाले सोच समझ ले फिर तुझ को ये पल न मिलेगा
मृत्यु जगत का सार है, एक कड़वी सच्चाई है, रहस्य भी है, जिसे लेकर इंसान हमेशा सोचता रहता है। सदियों से यह सवाल अपनी जगह खड़ा है कि मौत क्यों आती है, कहां ले जाती है जीव को,कुछ शेर मौत पर पढ़िए;
बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
– ख़ालिद शरीफ़
बला की चमक उस के चेहरे पे थी
मुझे क्या ख़बर थी कि मर जाएगा
-अहमद मुश्ताक़
ज़िंदगी इक सवाल है जिस का जवाब मौत है
मौत भी इक सवाल है जिस का जवाब कुछ नहीं
– अम्न लख़नवी
कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
ज़िंदगी तू ने तो धोके पे दिया है धोका
– फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़िंदगी इक हादसा है और कैसा हादसा
मौत से भी ख़त्म जिस का सिलसिला होता नहीं
– जिगर मुरादाबादी
हमेशा याद रखिये “ज़िन्दगी…का कोई भरोसा नहीं” !
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