जगन्नाथ यात्रा:निलंबित हुए डीसीपी और कमांडेंट

ओडिसा के पूरी में जगन्नाथ यात्रा के दौरान एक बेहद दुखद घटना देखने को,दर्शन हेतु उपस्थित हुए श्रद्धालुओं में अचानक भगदड़ मच गई,इस भगदड़ में तीन से चार की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए,ये घटना श्रीगुंडिचा मंदिर के पास की है,जिस समय भगवान जगन्नाथ अपने रथ पर विराजमान हो कर निकले थे अचानक भीड़ अनियंत्रित हो गई और लोगो में धक्का मुक्की शुरू हो गई,जिससे कुछ लोग की मृत्यु हो गई और क्या लोग घायल जिसका इलाज चल रहा हैhttp://news24hourslatest.in
डीसीपी और कमांडेंट हुए सस्पेंड;
पूरी में हुई इस लापरवाही पर सीएम ने एक्शन ले लिया है,ओडिसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने को मृतक परिवार के प्रति शोक संवेदना व्यक्त किया और मृतक श्रद्धालु के परिवार 25 लाख का आर्थिक सहायता प्रदान करने को कहा,सीएम मोहन चरण माझी ने जिला अधिकारी और एसपी का तबादला कर दिया है
बीजू जनता दल ने सरकार की लापरवाही बताई:
बीजू जनता दल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा की ये वर्तमान सरकार की लापरवाही की वजह से इन लोगों की जान गई,बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिसा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि ये सरकार की विफलताओं का कारण है, मैं मृतकों के परिवार के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करता हूं और जो घायल हुए है उनके लिए भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूं की जल्दी स्वस्थ हो,सरकार की लापरवाही बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम नहीं किया था जिसकी वजह से ये भगदड़ मची
क्यों निकाली जाती है भगवान जगन्नाथ की यात्रा:
भगवान जगन्नाथ की यात्रा आषाढ़ महीने महीने में निकाली जाती है,इस साल ये यात्रा 27 जून से आरंभ हुई है,कथा के अनुसार भगवान जगनाथ भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण के लिए निकलते है,भगवान और भाई बलराम बहन सुभद्रा को रथ पर बैठा कर पूरा नगर घुमाते है और रास्ते में अपनी मौसी माता गुड़ीचा के घर कुछ दिनों के लिए रुकती है,माता गुंडीचा को भगवान की मौसी माना जाता है जहां भगवान,बलराम और बहन सुभद्रा सात दिनों तक रुकते है और आपको बता दे की इसी मंदिर में उनको भोग चढ़ता है और पूजा होती है और तभी से इस घटना की याद में हर साल श्रद्धालुओं द्वारा ये यात्रा निकाली जाती है जिसमे देश भर से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते है,ये भी कहा जाता है जो जो इस रथ को खींचेगा उसके सारे पाप धुल जाते है,आपको जान कर हैरानी होगी की यात्रा निकालने से पहले पूरे रास्ते को सोने के झाड़ू से सफाई की जाती है जिसे “छेरा पहरा” कह कर पुकारा जाता है
भगवान क्यों पढ़ जाते है बीमार:
एक कथा के अनुसार भगवान का परम भक्त माधव दास बीमार थे और वो भगवान से गुहार लगाते थे की आप तो सबके पालनहार है लेकिन मेरी बीमारी ठीक नही कर सकते,इस पर भगवान ने उत्तर दिया की सबको अपने कर्मो का फल भोगना पड़ता है,इस पर माधव दास ने कहा की भगवन मुझे बहुत पीड़ा हो रही है,माधव दास की पीड़ा मात्र 15 दिन के लिए बची थी,भगवान उसकी पीड़ा को देखते हुए उसकी सारी बीमारी को अपने ऊपर ले लिया,और तभी से ये रिवाज चला आ रहा है की भगवान 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते है
मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के 15 दिन बाद भगवान एकांतवास में चले जाते है और किसी को दर्शन नहीं देते है,ऐसा कहा जाता है इन दिनों में भगवान को काढ़ा,और औषधियों का लेप लगाया जाता है ताकि भगवान बीमारी से दूर हो,और अपने भक्तों को दर्शन दे और कथा ये भी कहती है भगवान ने ये बीमारी अपने भक्त से उतारकर कर अपने ऊपर ले लिया
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